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असीमित के साथ संबंध है योग

योग का अर्थ जोड़ना है, छोटे मन को बड़े मन के साथ जोड़ना। शरीर, श्वास और मन में एकरसता लाना। यदि शरीर और मन सीध में नहीं हैं तो वह योग नहीं है। योग से आप इनमें एकरसता लाते हैं। एक योगी अपने आप के साथ जुड़ा है, पूरे ब्रह्मांड के साथ, प्रत्येक व्यक्ति के साथ जुड़ा है, क्योंकि सब आपस में जुड़े हुए हैं। यही योग है।


योग एक तकनीक है, जिससे शरीर, मन और आत्मा को जोड़ा जाता है। योग आपको चिंता और तनाव से मुक्त करवाता है। तनाव के कारण कमजोरी, क्रोध, ईष्र्या और अन्य नकारात्मक भावनाएं आती हैं। जब आप श्वास-तकनीक से, ध्यान-प्रक्रिया और कुछ साधारण व्यायाम से तनाव मुक्त होते हैं तो इससे आपके शरीर और मन को सहायता मिलती है, स्वस्थ होने की और अंदर से प्रसन्न होने की वृत्ति का निर्माण होता है। यदि आप स्वस्थ हैं और प्रसन्न हैं तो आप हिंसक नहीं होंगे। जब कोई हिंसक कार्रवाई में लगता है तो जान लें कि उसकी हिंसा के पीछे क्रोध और कुंठा है।

बचपन में हम सबने योग किया है। बच्चा जब तक तीन वर्ष का होता है, वह सारे योगासन कर चुका होता है। अगर आप बच्चे को ध्यान से देखेंगे तो आपको योग शिक्षक की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक बच्चा जिस तरह से श्वास लेता है, वह बड़ों के श्वास लेने से भिन्न है। शरीर और भावनाओं में श्वास एक कड़ी का काम करती है और श्वास पर ध्यान देकर आप अपनी भावनाओं को कोमल बना सकते हैं और नकारात्मक भावनाओं से मुक्ति पा सकते हैं। योगी बनना एक बार फिर से बच्चा बन जाने के समान है।

इसी तरह सारे जानवर भी कुछ आसन करते हैं। योगी वह है, जिसका संबंध असीमित के साथ हो। जो सबके साथ जुड़ा हो। इसको कभी भी किसी के साथ भी अकेलापन महसूस नहीं होता। योगी वह है, जो कुशल हो, जो लचीला हो। कुछ लोगों का शरीर बहुत लचीला होता है, लेकिन उनके मन बहुत कठोर होते हैं। कठोर व्यक्ति अधिक स्वीकार्य नहीं होता। वह ठीक ढंग से संपर्क नहीं कर पाता और नए विचारों के लिए खुलता नहीं है, नए विचारों को स्वीकार नहीं करता। एक योगी कठोर नहीं होता, पर वह बहुत ढुलमुल भी नहीं होता, वह स्पष्टवादी होता है। उसमें भोलापन होता है, बुद्धि में प्रगाढ़ता होती है। वह बच्चे की तरह होता है, बचकाना नहीं होता। उसमें सरलता है, पर वह बुद्धिमान है। योगी समझदार और संवेदनशील होता है। प्राय: जो लोग अपने आप को बहुत समझदार समझते हैं, वे संवेदनशील नहीं होते और जो लोग संवेदनशील होते हैं, वे समझदार बिल्कुल नहीं होते। एक योगी समझदारी और संवेदनशीलता का उत्तम सम्मिश्रण है।
योगी वह है, जो प्रेम करने वाला, पर बहुत केंद्रित है। प्राय: जो लोग प्रेम में पड़ जाते हैं, वह अपना केंद्र खो देते हैं और जो लोग बहुत केंद्रित होते हैं, वह प्रेम बिखेरते प्रतीत नहीं होते। योगी मस्तिष्क और हृदय का उत्तम सम्मिश्रण है, केंद्रित और साथ ही बहुत प्यार करने वाला भी।

योग, ज्ञान सागर के समान विशाल है। इसका अभ्यास आपको उच्च सत्य जानने के लिए तैयार करता है। अगर आप दुखी हैं तो यह आपको दुख में से बाहर निकालता है। अगर आप बेचैन हैं तो यह आप में वह धैर्य लाता है। यह आपकी वे योग्यताएं पाने में भी सहायता करता है, जो आप में नहीं हैं, क्योंकि कार्यशीलता ही है, जो आप में प्रसन्नता या दुख लाती है। और यदि आप अपने कार्यों में कुशल हैं तो आपका कार्य आपके लिए प्रसन्नता लाएगा।
तो आपका योग कैसा है?

 

 

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