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पहाड़ों के देवता पिसरनाथ

मुंबई के पास के लोकप्रिय हिल स्टेशन माथेरान में स्थित है पिसरनाथ यानी शिवजी का मंदिर। पिसरनाथ मंदिर माथेरान के मुख्य बाजार से दो किलोमीटर दूर घने जंगलों के बीच अनूठा मंदिर है। यह समुद्रतल से 2,516 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, इसलिए यहां पूरे साल शीतल वातावरण रहता है। ये माथेरान का बहुत प्रचीन मंदिर है। लाल रंग की दीवारों वाला मंदिर का भवन जंगल में बड़ा ही मनोरम लगता है। यह पैगोडा शैली में बना हुआ नजर आता है। मंदिर के अंदर एक बड़ा ध्यान कक्ष बना है। मंदिर के पुजारी का कहना है कि यहां स्वयंभू शिव हैं यानी वे खुद प्रकट हुए हैं, ठीक उसी तरह, जैसे महाबलेश्वर में शिव हैं।

परंपरागत मंदिरों की तरह यहां शिवलिंग की स्थापना नहीं की गई है। शिवलिंग अंगे्रजी के अक्षर एल के आकार का है। शिवजी का शृंगार सिंदूर से किया जाता है। शिवजी के साथ शेषनाग को स्थापित किया गया है। पुजारी जी की सातवीं पीढ़ी इस मंदिर में पूजा-पाठ करा रही है। पिसरनाथ, शिवजी का उपनाम है। पिसरनाथ यानी पहाड़ों के देवता। ये माथेरान के लोगों के ग्राम देवता हैं। इस मंदिर के प्रति लोगों में अटूट आस्था है। ये शिवजी का बड़ा ही सिद्ध मंदिर है। माथेरान के लोगों की शिवजी में काफी आस्था है। मंदिर के अंदर सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि जीव-जंतु भी आस्था से शीश नवाने आते हैं। मंदिर सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला रहता है। यहां दर्शन के लिए सूर्यास्त से पहले आना ही ठीक रहता है, क्योंकि रात्रि में मार्ग में अंधेरा हो जाता है। मंदिर परिसर में पहुंच कर अद्भुत शांति का एहसास होता है। चारों तरफ जंगल और घाटियां मंदिर के वातावारण को और भी आस्थावान बना देती हैं।

मंदिर के बगल में शारलेट झील है। झील के किनारे दो-तीन दुकानें हैं, जिनमें चाय-नाश्ता, जूस आदि मिल जाता है। यहां जंगल में मंगल जैसा माहौल नजर आता है।

 

 

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  • Web Title:पहाड़ों के देवता पिसरनाथ