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महान पुण्यदायी योगिनी व्रत

योगिनी एकादशी व्रत और इसका फल क्या है?
- शिवांगी, भागलपुर, बिहार
आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम 'योगिनी' है। व्रती इस दिन दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहन भगवान की मूर्ति रख कर इसका पंचोपचार, दशोपचार या षोडशोपचार पूजन करें। इस व्रत में लाल चंदन तथा लाल गुलाब के फूलों की माला का अधिक महत्व माना गया है। पद्म पुराण में इस व्रत की कथा इस प्रकार है- प्राचीन समय में अलका नगरी के स्वामी कुबेर के पास हेम माली नाम का एक लड़का था। वह प्रतिदिन पूजा के लिए पुष्प लेकर आता था। उसकी विशालाक्षी नाम की सुंदर स्त्री थी। वह उससे बहुत प्रेम करता था। एक दिन मानस सरोवर से पुष्प लाते समय वह अपनी स्त्री के प्रेम में फंस गया और अपने स्वामी कुबेर के पास नहीं गया।

कुबेर उस समय मंदिर में भगवान शंकर की पूजा कर रहे थे। बहुत प्रतीक्षा करने पर भी हेम माली पुष्प लेकर नहीं आया। कुबेर ने अपने यक्षों से कहा- दुष्ट हेम आज क्यों नहीं आया? यक्षों ने उत्तर दिया- हे राजन! वह तो अपने निवास में अपनी कांता के संग रमण कर रहा है। इस पर कुबेर ने यक्षों को हेम को राज दरबार में लाने का आदेश दिया। हेम माली डर के मारे कांपता हुआ राज दरबार में आया। उसे देख कर क्रोध से कुबेर बोले- दुष्ट, तूने देव का अपमान किया है, इसलिए तुझे श्वेत कुष्ठ होकर सदा स्त्री का वियोग होगा। तू इस स्थान से चला जा। इस शाप के फलस्वरूप हेम माली जगह-जगह भटकने लगा। एक दिन वह हिमालय में महर्षि मार्कंडेय के आश्रम में जा पहुंचा। महर्षि ने कहा- क्यों भाई, तुम्हें यह कुष्ठ क्यों हुआ है और क्यों तुम इस अवस्था में पहुंच गए हो?  हेम ने अपना दोष तथा कुबेर के शाप की बात बताई। यह सब सुन महर्षि को दया आ गई। महषि बोले- तुमने सत्य कहा,  झूठ नहीं बोला, इसलिए मैं तुम्हें एक सुंदर व्रत के बारे में बताऊंगा। आषाढ़ के कृष्ण पक्ष में तू योगिनी का व्रत कर। इसके पुण्य से तुम कुष्ठ से मुक्त हो जाओगे। हेम ने यह व्रत किया और इसके प्रभाव से उसको दिव्य रूप प्राप्त हो गया।

जो इस व्रत को करता है, वह सब पापों का नाश करने वाली मुक्ति और भुक्ति को प्राप्त करता है। 80 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने से जो फल मिलता है, वही फल इस व्रत को करने से मिलता है। योगिनी पापों का नाश करने वाली और महान पुण्य देने वाली है। इसकी कथा पढ़ने व सुनने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है। इस व्रत से कुष्ठ रोगी का भयंकर कुष्ठ रोग दूर होता है।

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  • Web Title:महान पुण्यदायी योगिनी व्रत