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दुनिया के हैं रंग हजार

एक दरवाजा बंद हुआ तो क्या!
सुबह 7 बजे जब मैं उठा तो बीमार था। पैसे की जरूरत थी, कुछ जरूरी काम भी पूरा करना था, इसलिए काम पर चला गया। दोपहर तीन बजे मुझे नौकरी से निकाल दिया गया। घर वापसी के दौरान कार के टायर की हवा निकल गयी। जब मैं डिक्की में पड़े अतिरिक्त टायर के लिए गया तो वह भी खराब निकला। पीछे से एक बीएमडब्ल्यू आ रही थी। उसमें बैठे व्यक्ति ने मुझे गाड़ी वहीं छोड़कर अपने साथ चलने को कहा। हम बातें करने लगे। उसने मुझे नौकरी ऑफर की और अब मैं कल फिर से काम करूंगा।

पीछे मुड़कर देखना
आज मैं, मेरे पिता, तीन भाई और दो बहनें हॉस्पिटल में मां के बेड के पास खड़े थे। मेरी मां ने अंतिम सांस लेते हुए कुछ शब्द कहे। उन्होंने कहा, 'मैं इस समय खुद को खास महसूस कर रही हूं। लग रहा है, सब मुझे प्यार कर रहे हैं। काश, हम पहले भी इसी तरह अक्सर मिला करते।'

संस्कार की छाप
आज एक बेटे को रेस्तरां में अपनी मां को खाना खिलाते देखा। मां बहुत बूढ़ी और कमजोर थी। खाना खाते समय उनका भोजन कपड़ों पर गिर रहा था। वहां उपस्थित दूसरे लोग उन दोनों को घृणा से देख रहे थे, पर लड़का शांत था। खाना खत्म होने के बाद लड़का बिना हिचकिचाए मां को वॉशरूम लेकर गया। हाथ और मुंह में लगा खाना साफ किया। बाल ठीक किए और मां का चश्मा आंखों पर सही से चढ़ा दिया। वापस आने के बाद पूरा रेस्तरां उन्हें बिल्कुल मौन होकर देख रहा था। वे हैरान थे कि कोई खुद को सार्वजनिक स्थल पर इस अजीब स्थिति में क्यों डाल रहा है। बेटा वापस आया। बिल चुकाया और मां को लेकर साथ जाने लगा। उसी समय वहां मौजूद एक बूढ़े आदमी ने बेटे को बुलाया और कहा, आप कुछ छोड़कर जा रहे हैं। बेटे ने कहा, नहीं, मुझे ऐसा नहीं लगता। बूढ़े आदमी ने कहा, 'हां, तुम छोड़कर जा रहे हो। हर संतान के लिए सबक और हर मां के लिए उम्मीद।'

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