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प्लान बी : करियर का दूसरा पहलू

आज के कॉम्पिटीटिव माहौल में एक सुरक्षित जॉब की चाहत और जीवनभर एक ही प्रोफेशन में बने रहने के मानदंड बदलते जा रहे हैं। करियर में बीच रास्ते में बदलाव की चाहत को अमल में लाने में मदद करता है आपका प्लान बी। क्या है प्लान बी और इसे अपनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ? बता रही हैं वंदना अग्रवाल
आप जिस क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, यदि किसी कारणवश उसमें असफल रहते हैं तो उसके विकल्प के तौर पर उससे मिलते-जुलते या किसी अन्य क्षेत्र में करियर बनाने का मार्ग आपकी नजर में पहले से होना चाहिए। यही मार्ग प्लान बी कहलाता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि प्रोफेशनलिज्म और कॉर्पोरेटाइजेशन के इस दौर में दूसरे रास्ते पर न केवल नजर बनाए रखना, बल्कि इस रास्ते पर चलने के लिए जरूरी साधनों की तलाश में जुटे रहना भी जरूरी है। इसके लिए वक्त-वक्त पर खुद को तराशते रहना चाहिए। इससे करियर के उतार-चढ़ाव के दौरान मानसिक मजबूती तो मिलती ही है, कई बार खुद की ऐसी अभिरुचियां भी सामने आती हैं, जिनके बारे में खुद को भी अंदाजा नहीं होता।
राकेश और सुमित-दो दोस्तों के उदाहरण से इसे समझा जा सकता है। राकेश ने बेहद दमदार तरीके से मार्केटिंग फर्म में प्रवेश किया। शुरू में उसका करियर ग्राफ तेजी से चढ़ा, पर पांच साल बीतते-बीतते वह परेशान रहने लगा। धीरे-धीरे उसका परफॉरमेंस ग्राफ नीचे आने लगा। स्थितियां बिगड़ते देख राकेश ने नौकरियां भी बदलीं, पर कोई लाभ नहीं हुआ। परिणामस्वरूप उसने नौकरी को अलविदा कह एक पीआर कंपनी खोल ली। आज राकेश ब्रांड प्रमोशन और ईवेंट मैनेजमेंट की दुनिया में बड़ा नाम है। इसके पीछे उसका प्लान बी कॉन्सेप्ट काम कर रहा था।

दूसरी तरफ एमबीए करने के बाद सुमित एक कॉरपोरेट कंपनी के मार्केटिंग डिपार्टमेंट से जुड़ा। पूरे उत्साह और लगन से उसने कंपनी के लिए काम किया। उसकी परफॉरमेंस भी ठीक थी। समय के साथ तरक्की भी मिल रही थी, लेकिन विश्वव्यापी मंदी के दौर में कंपनी की कई ब्रांच बंद होने के बाद वह भी छंटनी का शिकार हो गया। चूंकि सुमित ने करियर के अन्य विकल्पों के बारे में कभी मन नहीं बनाया था, इसलिए वह हताश और निराश हो गया। समय के साथ उसका आत्मविश्वास गिरता गया और उसे कहीं नई नौकरी नहीं मिली। हार कर उसने बिना किसी योजना के एक पर्सनैलिटी ग्रूमिंग सेंटर खोला, लेकिन यहां भी उसे मुंह की खानी पड़ी, क्योंकि उसने कभी भी प्लान बी के बारे में नहीं सोचा था।
 
कुछ लोग प्लान बी नहीं अपनाते। मुख्य वजह होती है स्पष्ट नजरिए और मजबूत इरादों का अभाव। काउंसलर डॉ. सुशील कुमार कहते हैं कि सबसे पहले व्यक्ति के दिमाग में प्लान बी यानी वैकल्पिक करियर की रूपरेखा स्पष्ट होनी चाहिए। उसे न केवल वैकल्पिक करियर की बारीकियों का पूरा ज्ञान होना चाहिए, बल्कि नए करियर में उसके लिए क्या स्कोप है, किस तरह की बाधाओं से उसे रूबरू होना पड़ेगा, किन अतिरिक्त योग्यताओं की जरूरत होगी, किन रुचियों को विकसित करने से वह बेहतर कर पाएगा, इन बातों पर गहन चिंतन-मनन जरूरी है। साथ ही वैकल्पिक करियर से जुड़े फील्ड के नामचीन लोग कौन-कौन हैं, नए करियर में जमने में कितना समय लगेगा- इनके बारे में भी पता होना चाहिए।

प्लान बी का चुनाव करते समय...
सबसे पहले अपने मोबाइल या कंप्यूटर में प्लान बी नाम से एक फाइल बनाएं। इसमें रोज उन करियर ऑप्शंस को नोट करें, जिन्हें आप अपनाना या आजमाना चाहते हैं। जब भी समय मिले, उन करियर ऑप्शंस के बारे में जानकारियां जुटाएं। ब्लॉग, करियर आर्टिकल्स, प्रोफेशनल एसोसिएशन की वेबसाइट्स पर उनके बारे में पढ़ें। दोस्तों-परिचितों से उनके प्रोफेशन की उपलब्धियों, अवसरों और संभावनाओं के बारे में बात करें। हो सकता है उनकी बताई बातों में से कोई बात आपको अपनी रुचियों और व्यक्तित्व के करीब लगे। इसके अलावा अपने ड्रीम करियर से जुड़े किसी व्यक्ति के साथ थोड़ा वक्त बिताएं।

ऐसी तीन-चार योग्यताओं की सूची बनाएं, जो आपके फेवरेट प्लान बी करियर के लिए आवश्यक हों।

अब अपनी पसंद के क्रम में प्लान बी के सारे विकल्प नोट करें। हर विकल्प को लोगों से हुई बातचीत, आपके द्वारा जुटाई गई जानकारियों के हिसाब से नंबर दें। इस तरह आपके सामने प्लान बी का स्पष्ट खाका तैयार हो जाएगा।

इसके बाद प्लान बी रेज्यूमे तैयार करें। पहली नजर में आपको लगेगा कि इसमें लिखने के लिए आपके पास कुछ नहीं है, पर गौर से देखेंगे तो ऐसी बहुत सारी बातें आपको मिल जाएंगी, जिन्हें आप इसमें लिख सकते हैं। जैसे आपने कई ऐसी वर्कशॉप या सेमिनार अटेंड किए होंगे, जो आपके प्लान बी के करीब होंगे। कई ऐसी स्किल्स और योग्यताएं आप में होंगी, जिनकी हर करियर में जरूरत होती है। बस इन्हीं को जोड़ कर आप अपना प्लान बी रेज्यूमे तैयार कर सकते हैं।

अपनी पसंद-नापसंद जानें
यह जानना जरूरी है कि आप किस वजह से करियर बदल रहे हैं। अगर आपके मन में कोई नई योजना है, कोई अन्य करियर अपनी रुचियों और व्यक्तित्व के ज्यादा करीब नजर आ रहा है तो इस दिशा में सोच सकते हैं।

नए करियर की खोज: खुद को थोड़ा असमंजस में पा सकते हैं, पर उसे नजरअंदाज कर अपनी खोज जारी रखें। इससे आपको समझ आएगा कि आप पुराने करियर के आसपास का ही क्षेत्र चुनना चाहते हैं या काम की धारा बदलने में आपकी रुचि है। जैसे टीचर से कॉरपोरेट ट्रेनर बनने की इच्छा पुराने करियर के आसपास का करियर है, जबकि नर्स से वेब डिजाइनर बनने की चाहत विधा बदलना कहलाएगा।

योग्यता पहचानें : पुराने करियर में काम आ रही ऐसी योग्यताएं पहचानें, जो नए करियर में मददगार हो सकती हैं। कम्युनिकेशन, लीडरशिप, प्लानिंग, पीआर आदि कई ऐसी स्किल्स हैं, जो नए करियर में काम आ सकती हैं।

अपडेट रहें : अपनी जानकारियों का दायरा बढ़ाएं और योग्यताओं को वक्त के साथ अपडेट करते रहें। जरूरत समझें तो कोई सर्टिफिकेट कोर्स भी कर सकते हैं।

नेटवर्किंग: जिस करियर में जा रहे हैं, उससे जुड़े प्रतिष्ठित और सफल लोगों से मेलजोल बढ़ाएं। उन्हें अपने नेटवर्क में शामिल करें। उनसे संबंधित फील्ड से जुड़े अवसरों और संभावनाओं के बारे में जानकारी लें। नए करियर के अच्छे और बुरे पक्षों को जानें। सप्ताह का एक दिन इस काम के लिए निर्धारित करें।

परामर्शदाता तलाशें : करियर बदलना बड़ा निर्णय होता है, इसलिए एक मेंटर तलाशें, जो नए करियर की राह में आने वाली बाधाओं को पार करने में आपकी मदद कर सके।
खुद को बदलें : कुछ लोग अपना करियर, अपनी नौकरी तो बदलते हैं, पर खुद को नहीं बदलते। करियर का प्लान बी अपनाते समय व्यवहार का प्लान बी भी अपनाएं।

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