DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

प्रभु जगन्नाथ बने गणेश जी

क्या भगवान जगन्नाथ एक दिन गणेश जी का रूप भी धारण करते हैं?
-निहारिका गुप्ता, पटना, बिहार

जी हां, यह सत्य है। यह दिन ज्येष्ठ पूर्णिमा (2 जून) है। असल में भगवान का भक्त अपने आराध्य देव के रूप में जब-जब उन्हें बुलाता है, तब-तब वह उसकी इच्छा पूर्ण करने की खातिर उसी देवी-देवता का रूप धारण कर लेेते हैं। ऐसे ही एक गणेश भक्त थे महाराष्ट्र के गणपति भट्ट। सोलहवीं शताब्दी में हुए भट्ट केवल गणेश की पूजा मंे ही मग्न रहते थे। एक बार वे तीर्थयात्रा पर निकले। घूमते-घूमते पुरी में स्थित चार धामों में से एक जगन्नाथ धाम जा पहुंचे। शास्त्रों के अनुसार यहां नारायण प्रसाद ग्रहण करते हैं। भट्ट जी पुरी में गणेश मंदिर तलाशने लगे। उन्हें वहां न पाकर दुखी हुए और जगन्नाथ जी के चरणों में बिना प्रणाम किए ही पुरी छोड़ दिया। मार्ग में एक मंदिर में वह गणेश जी  के स्मरण में डूबे हुए थे कि एक तेजस्वी ब्राह्मण ने कहा- भट्ट जी, क्या आप नहीं जानते कि श्री जगन्नाथ जी भक्त की तीव्रतम कामना से अपना स्वरूप बदल कर दर्शन दे देते हैं? आपने प्रभु के समक्ष उत्तम स्तोत्र का पाठ क्यों नहीं किया? यह कह कर ब्राह्मण वहीं अंतर्ध्यान हो गए।

भट्ट जी स्तब्ध! सोचने लगे कि मेरे मन की बात यह कैसे जानते हैंं। जरूर गणेश जी ने ही मेरा मार्गदर्शन किया है। वे तुरंत पुरी धाम लौटे। उस दिन ज्येष्ठ पूर्णिमा थी। उन्हांेने श्रीगणेश स्तवराज का पाठ किया। भट्टजी क्या देखते हैं कि श्री जगन्नाथ महाप्रभु स्वयं श्री गणेश के रूप में प्रकट हो गए। आज भी ज्येष्ठ पूर्णिमा आने पर श्री गणेश स्वरूप दर्शन महत्वपूर्ण होता है। श्री राघवदास मठ तथा श्री गोपालतीर्थ मठ की ओर से श्री गणेश जी का शृंगार इस प्रार्थना के साथ श्री जगन्नाथ जी को चढ़ाया जाता है- भक्तप्रिय महाबाहो भक्ततोष्ताविग्रह। गणेशरूपधृग् विष्णो प्रणमामि जगत्पते॥ गणाध्यक्ष जगन्नाथ सर्वमंगलमूर्तये। नमो विघ्नहर: साक्षाज्जगन्नारायणो हरि:॥

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:प्रभु जगन्नाथ बने गणेश जी