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कुछ कहती है आपकी त्वचा

त्वचा  की देखभाल से जुड़े तमाम तरह के प्रोडक्ट्स जितने आज हैं, उतने पहले कभी नहीं रहे। बावजूद इसके त्वचा संबंधी समस्याएं कम नहीं हुई हैं। धूप, दूषित हवा व पानी की पहली मार झेलने वाली हमारी त्वचा कितनी ही बार हमारी अपनी लापरवाहियों का शिकार होती है। अस्वस्थ जीवनशैली, तनाव की अधिकता, हार्मोन असंतुलन, केमिकल उत्पादों का अधिक इस्तेमाल व कई तरह के संक्रमण हमारी त्वचा को नुकसान पहुंचाते रहते हैं और त्वचा असमय बूढ़ी होने लगती है।   

त्वचा देती है रोगों का संकेत
त्वचा को जानना व समझना बेहद जरूरी है। शरीर में सूजन व दर्द का सबसे पहला लक्षण त्वचा पर ही दिखता है। आमतौर पर त्वचा की समस्याओं को हम शरीर की अंदरूनी समस्याओं से जोड़ कर नहीं देखते।  खासतौर पर पेट व आंतों के हिस्से में जलन व सूजन, पेट में गड़बड़ी चेहरे पर सूजन व लाली के तौर पर दिखती है।  त्वचा पर रैशेज पड़ना रूमेटाइड आर्थाइटिस का एक प्रमुख  लक्षण माना जाता है। त्वचा की विभिन्न समस्याओं के पीछे हार्मोन में बदलाव होना बड़ी वजह होता है। इसी तरह मुंहासे अधिक होना शरीर में इंसुलिन के स्राव की अधिकता दिखाता है।   

आंखों के आसपास काले घेरे पेट कीसमस्या को दर्शाते हैं तो त्वचा का नीला पड़ना शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी का सूचक है। थाइरॉएड या रजोनिवृत्ति के समय भी चेहरे पर झाइयां बढ़ने लगती हैं। गला, पलक, छाती, कांख, पेट व जांघ के निचले हिस्से पर होने वाले मस्से का एक बड़ा कारण रक्त शर्करा का बढ़ना व हार्मोनल असंतुलन होता है। शरीर में विटामिनों की कमी भी त्वचा को खुश्क कर देती है और त्वचा के कसाव को कम करती है।   
त्वचा की कुछ आम समस्याएं...

त्वचा का असमय बूढ़़ा होना
समय से पहले त्वचा का उम्रदराज दिखना यानी झुर्रियां, काले धब्बे, त्वचा का ढीलापन, चेहरे पर महीन रेखाओं का उभरना त्वचा की आम समस्याएं हैं। इनका मुख्य कारण जीवनशैली से जुड़ी अनियमितता है, जिसके कारण त्वचा की खुद को ठीक करने की क्षमता कम हो जाती है। पौष्टिक आहार की कमी, तनाव की अधिकता और धूम्रपान त्वचा में फ्री रेडिकल्स को बढ़ा देते हंै, जिससे त्वचा को नुकसान पहुंचता है। शुगर की अधिकता भी त्वचा को नुकसान पहुंचाती है।  
क्या करें: स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। रेटिनॉल बेस्ड उत्पाद न लगाएं।  

एग्जिमा
दाद, खाज, खुजली की जाति का एक रोग एग्जिमा भी है, जो ज्यादा कष्टकारी है। इसमें शरीर में खासतौर पर चेहरा, हाथ, पैर, कान का पिछला हिस्सा व कोहनी के हिस्से पर लाल निशान पड़ने लगते हैं, जिनमें खारिश भी होती है।  इसका कारण शरीर का कुछ खाद्य पदार्थों के प्रति संवदेनशील होना व पेट संबंधी गड़बड़ी होती है। गलत खान-पान भी इसकी वजह है। इसमें छोटे-छोटे दाने भी निकलने लगते हैं।  
क्या करें: संवेदनशील पदार्थों से दूर रहें।  दानों को छीलें नहीं। देर तक स्नान न करें। साबुन का उपयोग न करें। रोग को ठीक करने के लिए डॉक्टर एंटी बायोटिक दवाएं भी देते हैं। सूत्रनेति, कुंजल तथा जलनेति करना भी फायदा देता है। जैतून के तेल का इस्तेमाल करें। ओमेगा 3 ऑयल से मसाज करें।

चेहरे पर मुंहासे
यह त्वचा की सबसे आम समस्या है, जो चेहरे पर लाल दानों, ब्लैकहेड्स, व्हाइटहेड्स और गांठ के रूप में दिखती है। अधिक उत्तेजक व मसालेदार भोजन करना, पोषक तत्वों की कमी व हार्मोनल असंतुलन के कारण ये होते हैं। खासतौर पर किशोरों में हार्मोन में बदलाव इसका प्रमुख कारण होता है। तैलीय त्वचा वालों में यह समस्या अधिक होती है। गलत खान-पान भी बड़ी वजह है।
क्या करें: चेहरा साफ रखें। डर्मेटोलॉजिस्ट द्वारा बताए प्रोडक्ट्स का ही इस्तेमाल करें। दानों को छेड़ें नहीं।

सोरायसिस
सोरायसिस त्वचा की ऊपरी सतह का चर्म रोग है, जिसमें त्वचा पर लाल स्पॉट बन जाते हैं। देखने में यह जख्म की तरह लगते हैं, जिनमें कई बार दर्द व जोड़ के पास सूजन भी देखने को मिलती है। आनुवंशिकता के अलावा पर्यावरण भी एक बड़ा कारण माना जाता है। पेट की गड़बड़ी, इम्यून सिस्टम का अति सक्रिय होना या भोजन का ऊर्जा में  परिवर्तित न होना भी वजह हो सकता है।  

क्या करें
गले के संक्रमण से बचें। शरीर की अंदरूनी सेहत का ध्यान रखें। विटामिन ए, ई, डी, ओमेगा 3 फैटी एसिड शरीर को अंदर से हील करता है। तनाव रहित रहें।

हमारे  विशेषज्ञ : डॉ. हरि मेनन, (वैदिकग्राम नोएडा),
डॉ. नितिन वालिया (डर्मेटोलॉजिस्ट, बीएलके सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल) , डॉ. सुरुचि पुरी, (डर्मेटोलॉजिस्ट, पुरी स्किन एंड लेजर क्लिनिक)।

त्वचा शरीर का सबसे बड़ा अंग है और बाहरी कारकों के खिलाफ सबसे पहला सुरक्षा कवच भी। अकसर जितना ध्यान हम त्वचा की खूबसूरती पर देते हैं, उतना उसकी सेहत पर नहीं देते। सच यह है कि कई बीमारियों का सबसे पहला संकेत हमारी त्वचा ही देती है। त्वचा को कैसे रखें सेहतमंद, बता रही हैं नीलम शुक्ला

क्या पसंद है आपकी त्वचा को?
’    गाजर:  विटामिन सी और केराटिन से भरपूर। त्वचा का निखार बढ़ता है।  
’    टमाटर: विटामिन सी, लाइकोपीन, पोटैशियम की प्रचुरता। अच्छा एंटी-ऑक्सीडेंट। पराबैंगनी किरणों से बचाव।
’    कोको पाउडर और चॉकलेट: एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर। इनमें मौजूद फ्लेवनॉल त्वचा मुलायम रखता है। अल्ट्रॉवायलेट किरणों से बचाव।
’    पपीता: विटामिन सी, ए, ई व एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर। मुंहासे व दाग-धब्बों से राहत।  
’    पालक: कैल्शियम , मैग्नीशियम व आयरन जैसे खनिज। विटामिन ए, बी व सी का अच्छा स्रोत।
’    चुकंदर: रोमछिद्रों की सफाई। रक्तसंचार बढ़ता है। त्वचा पर रंगत आती है। जूस व लेप दोनों फायदेमंद।
’    बादाम: त्वचा के लिए फायदेमंद विटामिन ई से भरपूर।
’    अलसी: ओमेगा 3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत, जो रोमछिद्रों की सफाई करता है। कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयरन, केराटिन, थायमिन और नियासिन भी होते हैं।
’    नींबू: विटामिन-सी युक्त शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट। त्वचा से काले घेरे व निशान होते हैं दूर।

त्वचा रहेगी खिली-खिली
’    बीच में कुछ समय के लिए केमिकल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल बंद कर दें। त्वचा को खुद ठीक होने दें।  
’    नियमित व्यायाम से सेहत को कई लाभ होते हैं, जिसका असर त्वचा पर भी पड़ता है। त्वचा की खूबसूरती बढ़ती है।
’    रात में किसी भी तरह का मेकअप व केमिकल प्रोडक्ट लगा कर न सोएं। प्राकृतिक टोनर जैसे नारियल पानी और दही लगाएं। एलोवेरा जूस पियें। त्वचा पर भी लगाएं।
’    बाहर निकलते समय सनस्क्रीन लोशन या क्रीम लगाएं। पराबैंगनी किरणें त्वचा कोशिकाओं और रक्त वाहिनियों को कमजोर बनाती हैं।  
’    सोरायसिस की एक वजह धूम्रपान व एल्कोहल का सेवन है। इससे त्वचा से ऑक्सीजन की मात्रा कम होती जाती है और त्वचा बेरंग लगती है।
’    तनाव त्वचा के प्राकृतिक एंटी-ऑक्सीडेंट्स को कम करता है, जिससे त्वचा असमय बूढ़ी होने लगती है। हार्मोन असंतुलन से दाने होने लगते हैं।
’    खूब सारा पानी पिएं। त्वचा को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है।

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