यूं ही नहीं आता कोई जिंदगी में

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मिलिंद जाधव, मुंबई स्थित लाइफ कोच और सॉफ्ट स्किल्स ट्रेनर। लक्ष्यों की स्पष्टता और निजी चुनौतियों पर सफलता हासिल करना उनका प्रिय विषय है। अब से 20 वर्ष पहले मेरी उम्र लगभग 22 साल थी। मैं वैसा...

यूं ही नहीं आता कोई जिंदगी में

मिलिंद जाधव, मुंबई स्थित लाइफ कोच और सॉफ्ट स्किल्स ट्रेनर। लक्ष्यों की स्पष्टता और निजी चुनौतियों पर सफलता हासिल करना उनका प्रिय विषय है।


अब से 20 वर्ष पहले मेरी उम्र लगभग 22 साल थी। मैं वैसा नहीं था, जैसा आज हूं। मैं शर्मीला, कमजोर और डरपोक हुआ करता था। मुझे याद है, मैं पहली बार पुणे से बेंग्लुरू तक अकेले यात्रा कर रहा था।  600 कि.मी. की इस लंबी यात्रा में ऐसा लग रहा था कि मानो पूरी दुनिया मुझे ठगने के लिए तैयार बैठी है। 22 घंटे की इस यात्रा को गुजरे हुए अभी चंद घंटे ही हुए थे कि कुछ युवा लड़के मेरे पास आए। उन्होंने मुझे ऊपरी बर्थ पर रखे मेरे सूटकेस को हटाने के लिए कहा। कारण था कि उन्हीं में से एक लड़का वहां लेटकर आराम करना चाहता था। मैंने मना किया! थोड़ा उग्रता दिखाने की कोशिश भी की। इसके बाद वे सब लड़के मेरे पास आए और मुझे ट्रेन से बाहर फेंकने की धमकी दी। मैंने समर्पण कर दिया, पर विरोध जाहिर करते हुए कहा, 'तुम सब मुझे तंग कर रहे हो।' उन्हें यह कहने के बाद मैंने खुद से भी पूछा, 'मेरे साथ ऐसा क्यूं हुआ? यह सही नहीं है...'

हर व्यक्ति शिक्षक है
बहुत वर्षों बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि वे लड़के मेरे जीवन में 'शिक्षक' की तरह थे। उन्होंने मुझे सिखाया था कि कब मुझे सख्ती दिखानी चाहिए और कब अपनी सीमाओं में रहकर व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने मुझे यह भी सिखाया कि केवल सख्त दिखने की गरज से सख्त बनने की कोशिश करने का कोई अर्थ नहीं है। यह एक उपयोगी सबक था, चाहे आप ट्रेन में हैं या ट्रेन से बाहर!  समय के साथ मैंने हर जगह शिक्षकों की उपस्थिति को महसूस किया। ये भी कि  वे किसी भी रूप और आकार में आपके सामने आ सकते हैं। कोई खराब ट्रक ड्राइवर, घमंडी सहकर्मी, आलसी अधीनस्थ, सुस्त सुरक्षाकर्मी, शरारती बच्चा, हक दिखाने वाली मां या पत्नी, कोई अकृतज्ञ मित्र, समय का बेहद पाबंध कोई क्लाइंट, बेहद विनम्र बॉस, कोई ईमानदार सब्जीवाला या फिर कोई असहाय भिखारी.... सभी के पास कुछ सिखाने के लिए है। अब मुझे ऐसा लगता कि ये सब मुझे कुछ सिखाने के मकसद से ही जीवन में आए हैं। कुछ समय बाद मैंने पढ़ा भी कि जीवन में आने वाला हर शख्स एक शिक्षक है। भले ही उन्होंने आपको डराया हो, पर उन्होंने आपको आपकी सीमाओं के बारे में भी बताया। हालांकि हर व्यक्ति  शिक्षक है, इसका यह अर्थ नहीं कि आप उन्हें पसंद भी करें। आपको इतना करना है कि आप उनसे मिले सबक को समझें। ऐसा करना ही आपके लिए एक अच्छे संसार का निर्माण कर सकता है।

सबक पर रखें नजर
जाहिर है, शुरुआत में हर किसी को शिक्षक के रूप में देख पाना आसान नहीं था। कितने ही लोग आए व सहज भाव से चले गए। कुछ ऐसे भी थे, जिनका प्रभाव बहुत बाद में हुआ। ऐसा भी हुआ कि शिक्षक भी थे, सबक भी दे रहे थे, पर मैं कहीं और ही था। लेकिन यह भी सच है कि जैसे ही आप खुद को छात्र-भाव में रखने को तैयार हो जाते हैं, वैसे ही आपको अपने आसपास सब शिक्षक नजर आने लगते हैं। यही वजह है कि एक जेन कहावत है, 'शिक्षक का जीवन में प्रवेश तभी होता है, जब विद्यार्थी तैयार होता है।' जब आप कहते हैं, 'मैं सीखने और बदलाव करने के लिए तैयार हूं।' और फिर, आपको हैरत होगी यह देखकर कि किस तरह आपके आसपास अचानक ही लोग आपके जीवन को प्रभावित कर रहे हैं। कोई मित्र अचानक ही आपको अच्छी किताब पढ़ने के लिए दे देता है, अखबार में कोई प्रेरक लेख पढ़करआप उछल पड़ते हैं या फिर किसी अजनबी से बात करके हल्का महसूस करते हैं। जीवन में बड़ा बदलाव आ जाता है।

याद रखें, जीवन शिक्षाओं की क्रमबद्ध श्रृंखला है, जो विभिन्न स्तर पर हमें मिलती है। हमें यह समझने की जरूरत होती है कि हमें ये सबक तब मिलते हैं, जब हम लोगों से मिलते हैं। उनसे बातचीत करके ही हम उनसे सीखने की क्षमता हासिल कर पाते हैं। भले ही बातचीत का वह अनुभव अच्छा रहा हो या बुरा। जितना जल्दी हम अपने अहंकार और भावों को अलग कर लोगों को शिक्षक मानकर उनसे व्यवहार करने लगते हैं, उतनी तेजी से खुशी और आत्म-विकास की राह की ओर बढ़ने लगते हैं। अंत में, खुद से प्रश्न पूछें, 'क्या मैं तैयार हूं?'  मैं सोचता हूं कि आप तैयार हैं! अपने चारों ओर देखें, संभव है आपका सर्वश्रेष्ठ शिक्षक उसी मकान में हो, जिसमें आप हैं।   


सहज: हम भगवान खोजते हैं, लेकिन वह शोर और हड़बड़ाहट में नहीं मिलता। वह मौन का  मित्र है। पेड़, फूल, घास को देखो, ये मौन में ही विकसित होते हैं। चांद, तारे और सूरज को देखो,  वे नि:शब्द अपनी यात्रा करते रहते हैं...आत्मा का अनुभव करने के लिए भी हमें मौन की ही जरूरत है।
मदर टेरेसा

मित्र:  प्रकृति को समझें, उसे प्यार करें, उसके नजदीक रहें। यह आपको कभी असफल नहीं होने देगी।  
एफ. एल. राइट, अमरीका के प्रसिद्ध आर्किटेक्ट
दर्पण:  दुनियाभर में वनों के साथ जो हम कर रहे हैं, वह उसी का प्रतिरूप है, जो हम अपने और अपनों के साथ कर रहे हैं।
क्रिस मेसर, पर्यावरणविद

यथार्थ:  मानवीय स्वभाव के बारे में सबसे दुखद बात जो मैं जानता हूं, वह यह कि हमने जीना छोड़ दिया है। हम सब क्षितिज पार किसी गुलाब के जादुई बगीचे के सपने देख रहे हैं। हमारी अपनी खिड़की के बाहर खिल रहे गुलाबों का हमें भान ही नहीं।
डेल कार्नेगी, मोटिवेशनल गुरु

स्नेह: जल्दबाजी में चलते हुए हम पृथ्वी पर बेचैनी और दुख की छाप छोड़ते हैं। हम यूं चलें कि पृथ्वी पर शांति और शुद्धता की छाप पड़े...अपने पैर और पृथ्वी के मध्य होने वाले संपर्क के प्रति सतर्क रहें। जब चलें तो ऐसे कि मानो हमारे पैर धरती को चूम रहे हैं।
टिक नत हन, बौद्ध भिक्षु
मनोहर:  आपके अच्छे और सुंदर कार्य पर यदि कोई ध्यान न दे तो उदास न हों। हर सुबह सूरज मनोहर लीला करता है और फिर भी अधिकतर दर्शक सोए रहते हैं।
जॉन लेनन, प्रसिद्ध रॉक सिंगर
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