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उत्तराखंड की छोटी नदियों में खनन शुरू कराने की तैयारी

प्रदेश में आय के स्रोत बढ़ाने के लिए राज्य सरकार छोटी नदियों पर भी खनन खोलने की तैयारी कर रही है। खनन विभाग इसके लिए कार्ययोजना तैयार कर रहा है। हाईकोर्ट की रोक से पहले राज्य की बड़ी नदियों में ही खनन की इजाजत थी। तकरीबन एक दर्जन नदियों में खनन से सरकार को सालाना 350 करोड़ राजस्व मिलता था। उत्तराखंड में खनन की अपार संभावनाएं देखते हुए अब सरकार इस क्षेत्र को राजस्व का प्रमुख स्रोत बनाना चाहती है।

वित्त मंत्री प्रकाश पंत खनन राजस्व को सालाना 1500 करोड़ तक ले जाने की संभावना जता चुके हैं। अब इस दिशा में प्रयास भी शुरू हो गए हैं। खनन विभाग के सूत्रों का कहना है कि राजस्व बढ़ाने को जिलों से उन नदियों का ब्योरा मांगा जा रहा है जहां अभी तक खनन की इजाजत नहीं है। सूत्रों ने बताया कि राज्य की अधिकांश नदियों से चोरी छिपे खनन होता है। इससे इन नदियों से सरकार को राजस्व नहीं मिल रहा। इसे देखते हुए अब छोटी नदियों का चिह्नीकरण कर सीमित मात्रा में खनन की इजाजत दी जा सकती है। वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने बताया कि उत्तराखंड में खनन पर हाईकोर्ट की रोक के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर रही है। इसके अलावा खनन के क्षेत्र में राजस्व बढ़ाने को भी और कदम उठाए जा रहे हैं। खनन राजस्व को सालाना 1500 करोड़ तक करने का लक्ष्य है।

रोक के खिलाफ सोमवार तक एसएलपी : पंत

उत्तराखंड की नदियों में खनन पर नैनीताल हाईकोर्ट की रोक के बाद राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करने की तैयारियों में जुट गई है। खनन विभाग की टीम दिल्ली पहुंच चुकी है और सभी तैयारियां पूरी होने के बाद सोमवार तक विशेष याचिका दायर कर ली जाएगी। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि खनन से रोक हटने के बाद नए सिरे से खनन की प्लानिंग की जाएगी।

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  • Web Title:Preparing to start mining in small rivers in Uttarakhand