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27 फरवरी, 2020|3:05|IST

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कुंदन ने खोला मुंह तो उनकी उड़ीं हवाइयां

वैसे तो नक्सली-सफेदपोश-पुलिस गठजोड़ की खबरें आती रहती हैं, लेकिन इसकी पुष्टि कुंदन पाहन के बयान से हुई है। हथियार डाल चुके इस नक्सली कमांडर ने जब मुंह खोला, तो पुलिस अधिकारियों की हवाइयां उड़ने लगीं। कुंदन के सरेंडर की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन यह खबर आम है कि वह पुलिस के कब्जे में है। नकुल यादव की तरह उसके भी सरेंडर करने का नाटक कराया जाएगा।

कुंदन ने पुलिस अफसरों को नक्सलियों के नेटवर्क और करीब एक हजार करोड़ रुपए की लेवी वसूली की जानकारी दी है। उसने नक्सलियों के आधुनिक हथियारों से लैस होने और संगठन की दूसरी गतिविधियों का पूरा ब्योरा दिया है। बकौल कुंदन, झारखंड में नक्सलियों के पैर जमाने में इलाके के नेताओं की बड़ी भूमिका रही है। चुनाव के दौरान संगठन से मदद लेते रहे हैं और इसके एवज में मोटी रकम देते हैं। कई नेता तो बड़े नक्सली नेताओं से मिले भी हैं। ये नेता पुलिस की रणनीति की कई संवेदनशील जानकारी भी संगठन को देते थे। कई थानेदार संगठन से यह समझौता करते थे कि उनके इलाके में कोई वारदात न हो। कुंदन ने कई नेताओं और पुलिस अधिकारियों के नाम और मोबाइल नंबर भी बताए।

कुंदन पाहन 24 साल की उम्र में संगठन से जुड़ा था। आदिवासियों को संगठन से जोड़ने में उसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह खूंटी के अड़की थाना क्षेत्र के बारीहातू गांव का निवासी है। उसका पूरा परिवार पाहन (पुरोहित) है। उसके रिश्तेदारों ने उसकी पुश्तैनी जमीन हड़प ली। इसके बाद ही वह नक्सली बना। अभी वह करीब 50 साल का है और उसे शुगर तथा ब्लड प्रेशर जैसी बीमारी है। वह इलाज के लिए चेन्नई, कोलकाता, भुवनेश्वर तक जा चुका है। उसके बच्चे बोकारो में पढ़ते हैं। पुलिस के पास उसकी 20 साल पुरानी तस्वीर थी। इसलिए उसे पहचानना असंभव था।

कुंदन के अनुसार, नक्सली पूरे झारखंड में संगठन खड़ा करना चाहते थे। एक रणनीति के तहत आदिवासियों को महत्वपूर्ण दर्जा दिया जाता था। उसके दस्ते में कई महिलाएं भी हैं। इनमें सरिता महत्वपूर्ण थी। दो महिला नक्सलियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वे अब झारखंड पुलिस में हैं।

कुंदन ने डीएसपी प्रमोद कुमार, पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा, इंस्पेक्टर फ्रांसिस इंदवार और बुंडू थाना के बगल में चार लोगों की हत्या में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। कुंदन ने तमाड़ में आईसीआईसीआई बैंक के कैशवैन को लूटने की बात स्वीकार की है। उसने बताया कि उस रकम का बड़ा हिस्सा शीर्, कमेटी को भेजा गया था।

गर्दन काटने में खर्च कम

कुंदन ने पुलिस को बताया है कि गर्दन काटने में खर्च कम होता था। गोली मारने से सौ रुपए का खर्च होता है। एक तलवार कई लोगों को गर्दन काटने में काम आता था। इसलिए वह गोलियां कम चलाता था। इंस्पेक्टर फ्रांसिस इंदवार की भी उसने गर्दन काटी थी।

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  • Web Title:Naxali commander spills bitter truth