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पांच साल में भी नहीं खुला पौड़ी अस्पताल का ब्लड बैंक

पौड़ी जिला अस्पताल में करीब पांच सालों से ब्लड बैंक का संचालन नहीं हो सका। पैथोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण जिला अस्पताल में संचालित हो रहे ब्लड बैंक को बंद करना पड़ा था। हालांकि इस बीच पैथालॉजिस्ट की तैनाती तो हुई लेकिन ब्लड बैंक नहीं खुल सकता।पौड़ी में ब्लड बैंक का संचालन नहीं होने से इसका असर महिला अस्पताल पर भी पड़ रहा है। एक ओर जहां ब्लड बैंक नहीं खुल पाया वहीं दूसरी ओर एनेस्थेटिक का पद रिक्त होने के कारण पिछले करीब चार महीने से यहां गर्भवती महिलाओं के ऑपरेशन भी नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे मामलों को यहां से रेफर ही करना पड़ रहा है। जिला महिला चिकित्सालय में तैनात डॉ. पी पांडे का कहना है कि पहले तो किसी तरह ब्लड का इंतजाम तीमारदार कर लेते थे तो प्रसव संबंधी ऑपरेशन कर लिए जाते थे लेकिन अब एनेस्थेटिक भी नहीं होने के कारण ऑपरेशन नहीं किए जा रहे है। ब्लड बैंक का संचालन नहीं होने से पौड़ी और उसके आस-पास समय-समय पर स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा लगाएं जाने वाले रक्तदान शिविरों का भी लाभ नहीं मिल रहा है। इन शिविरों में रक्तदान होता है तो उसे श्रीनगर ब्लड बैंक को भेजना पड़ता है। जिला अस्पताल में डिजिटल एक्सरे मशीन भी ठप पड़ी है। 22 में से 14 डॉक्टर यहां कार्यरत हैं लेकिन इनमें भी कार्डियोलॉजिस्ट, ईएमओ जैसे पदों खाली हैं। थलीसैंण से लेकर पाबौ, कोट, कल्जीखाल आदि इलाकों से मरीज यहां आते हैं लेकिन इन मामलों में यहां से उन्हें रेफर ही करना पड़ता है। इस बीच पौड़ी में डाक्टरों की तैनाती को लेकर यहां आंदोलन भी चले। इनका असर यह हुआ कि यहां कुछ डॉक्टर भी आए लेकिन हालत धीरे-धीरे फिर पटरी से उतर रहे हैं। ब्लड बैंक के संचालन के लिए केंद्रीय औषधि नियंत्रण विभाग की टीम ने यहां का दौरा भी किया लेकिन अभी तक इसके संचालन को लाइसेंस नहीं मिल पाया है। पैथोलॉजिस्ट डा.यूएस कंडवाल ने बताया कि केंद्रीय टीम के दौरे के बाद लाइसेंस मिलने की उम्मीद जगी है। इसके बाद ब्लड बैंक की शुरूतात कर दी जाएगी।

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  • Web Title: Cardiovascular Blood Bank not open in five years