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10 अप्रैल, 2020|2:41|IST

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श्रद्धा के बगैर ईश्वर भक्ति संभव नहीं

साधनधाम परिसर में चल रहे मानस महायज्ञ के आठवें दिन लंका कांड प्रसंग का पाठ हुआ। आचार्य रामनरेश शास्त्री ने लंका कांड प्रसंग के तहत अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण-मेद्यनाथ संवाद, कुंभकर्ण-मेद्यनाद वध के उपरांत रावण वध प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि आचार्य ने तुलसीदास ने मानव मंगलाचरण में ही विश्वास की महत्ता बतलाई है।

उन्होंने कहा श्रद्धा व विश्वास के बगैर ईश्वर की भक्ति नहीं मिलती है। सायक एक नाभि सर सोषा..अपर लगे भुज सिर करि रोया..रावण वध प्रसंग में समिति की ओर प्रतीक स्वरुप नारियल की बलि दी गई और आतिशबाजी भी की गई। मौके पर हनुमानजी की सुंदर झांकी की प्रस्तुति भी की गई। कथावाचक बालक दास ने रावण वध की चर्चा करते हुए कहा कि अभिमानरूपी अवगुण रावण के सभी गुण प्रभु श्रीराम के आगे धूमिल हो गए व अज्ञान, अधर्म के प्रतीक रावण का वध आदर्श अवतार प्रभु श्रीराम ने किया। उन्होंने कहा कि समाज को अज्ञान, अत्याचार रूपी रावण से तभी मुक्ति मिलेगी, जब रामचरित मानस के आदर्शों को पालन समान रूप से सभी लोग करेंगे।