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छपरा के मकेर प्रखंड की शिक्षक नियोजन की मूल पंजी ही गायब

छपरा के मकेर प्रखंड की शिक्षक नियोजन की मूल पंजी ही गायब

कहीं शिक्षक नियोजन के मूल कागजात ही गायब तो कहीं नियोजन इकाई के पास एक ही नियोजन प्रक्रिया की दो पंजियां मिलीं। शिक्षक नियोजन में बड़े पैमाने पर छपरा में हुआ फर्जीवाड़ा अब परत-दर-परत खुल रहा है। शिक्षक नियोजन से जुड़ी किसी प्रकार की पंजी नियोजन इकाई के पास नहीं मिल रही। निगरानी कैंप कार्यालय में मकेर प्रखंड की सभी नियोजन इकाईयों द्वारा कागजातों का सत्यापन करवाने के दौरान फर्जीवाड़ा से जुड़े कई खुलासे हुए। प्रखंड के कई पंचायतों में 2005 में हुए शिक्षक नियोजन की मूल कागजात ही नहीं मिले।

 

फर्जीवाड़ों की बारीकी से हो रही जांच

निगरानी कैंप कार्यालय में कागजात सत्यापन के दौरान चाहे नियोजन इकाईयों के पास एक ही नियोजन प्रक्रिया की दो काउंसलिंग पंजी मिलने की बात हो या मूल कागजात गायब होने की, सभी तरह के फर्जीवाड़ों की बारीकी से जांच की जा रही है। हालांकि कौन-सी नियोजन इकाई में इस तरह के फर्जीवाड़े सामने आ रहे हैं, उसका फिलहाल खुलासा करने से कैंप के कर्मी परहेज कर रहे हैं। इसके अलावे कई प्रखंडों से सत्यापन के लिए आए कागजातों में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी मिली है। कर्मियों ने बताया कि फर्जीवाड़े से जुड़े कई बड़े खुलासे हुए हैं।

 

फर्जी विकक्लांग सर्टिफिकेट पर भी बने हैं शिक्षक

सामान्य के अलावे विकलांग कोटे पर भी फर्जी ढंग से शिक्षकों की बहाली की गई है। मकेर प्रखंड की तारा अमनौर पंचायत के विकलांग उम्मीदवार उपेंद्र मांझी ने सीएम, डीएम के अलावे पीएम के पास भी पत्र भेजकर इस फर्जीवाड़े की जांच करने की मांग की है। वैसे सभी साक्ष्यों को लेकर उपेंद्र ने निगरानी कैंप प्रभारी से भी मिलकर फर्जीवाड़े की जांच कर संलिप्त लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।

 

बिना मेधा सूची के कर दी बहाली

बिना मेधा सूची में नाम के ही फर्जी ढंग से बहाली करने वालों पर अभी कार्रवाई का मन बना रही थी, तभी नियोजन की मूल संचिका गायब होने जैसे कई फर्जीवाड़े सामने आ गये हैं। निगरानी अब पूरे प्रखंडों के सभी नियोजन इकाईयों के द्वारा उपलब्ध कराये गये कागजातों की सत्यापन करने केबाद कार्रवाई करेगी। वैसे भी बिना मेधा सूची के बहाल हुए शिक्षकों की संख्या अब जिले में डेढ़ सौ के पार हो गई है। गौरतलब है कि वे अब भी शिक्षक बने हैं और उनका वेतन भुगतान भी हो रहा है। इसे बीईओ, पंचायत सचिव और मुखिया की मेहरबानी नहीं तो और क्या कहेंगे।

 

मुखिया पर भी एफआईआर

बिना मेधा सूची में नाम के ही शिक्षक बनाने, नियोजन की मूल संचिका गायब होने जैसे फर्जीवाड़े के मामले में अब बीईओ के अलावे पंचायत सचिव के साथ मुखिया पर भी एफआईआर होगी। जिले में फर्जीवाड़े की तो अभी ये सिर्फ ट्रेलर है, फिल्म तो आना अभी बाकी है। निगरानी जांच पूरी होते होते जिले की अधिकतम नियोजन इकाई कार्रवाई की जद में होगी। भले ही उनके फर्जीवाड़े अलग-अलग प्रकार के हो सकते हैं। निगरानी के अनुसार, जिले की 350 नियोजन इकाइयों में से करीब 90 नियोजन इकाई के द्वारा अब तक मेधा सूची भी निगरानी को नहीं सौंपी गई है। शेष नियोजन इकाईयों के द्वारा मेधा सूची उपलब्ध भी कराई गई है तो उसमें काफी विसंगतियां है।

 

सस्पेंस में फंस गई नियोजन इकाई

मेधा सूची में बिना नाम के ही शिक्षक बनाने वाली नियोजन इकाई सस्पेंस में फंस गई है। निगरानी ने पहले नियोजित शिक्षकों की जांच करने के लिए सिर्फ फोल्डर की मांग की थी। फोल्डर आनन-फानन में उपलब्ध करा दिया गया। फर्जीवाड़े करने वाली उन नियोजन इकाईयों को ये पता नहीं था कि मेधा सूची, काउंसलिंग पंजी व अन्य कागजात भी निगरानी को देना पड़ेगा। अगर उनको ये पता होता तो वे अपनी जुगाड़ टेकनोलॉजी से फोल्डर व मेधा सूची दोनों की मिलान करने के बाद ही निगरानी को सौंपते।

 

अब तक मिले फोल्डर की जांच शुरू

शिक्षक नियोजन के लिए कैंप कर रही निगरानी टीम को अब तक नियोजन इकाईयों द्वारा सौंपे गये 12,184 फोल्डर की जांच शुरू कर दी गई है। शिक्षक नियोजन की जांच करने के लिए जिले में कैंप कर रही निगरानी को करीब नौ माह बाद काफी जद्दोजहद के बाद फोल्डर मिल सके हैं। इसके लिए बीच में निगरानी ने तीन बीईओ और 27 पंचायत सचिवों पर एफआईआर भी दर्ज करवाई थी। जिले में कुल 12,236 शिक्षक नियोजन फोल्डर हैं।

 

फर्जी संस्थानों के प्रमाण पत्रों पर कई बने हैं शिक्षक

प्रखंड व पंचायत नियोजन में फर्जी संस्थानों के प्रमाण पत्रों का धड़ल्ले से इस्तेमाल हुआ है। कोर्ट द्वारा फर्जी शिक्षकों को स्वेच्छा से त्याग पत्र देने की तिथि तय करने के बाद भी ये फर्जी शिक्षक अपनी नौकरी पर कायम हैं। यहीं नही अमान्य संस्था के प्रमाण पत्र पर भी कई शिक्षक नौकरी कर रहे हैं। ऐसे शिक्षक पदाधिकारियों के लिए कामधेनु बने हैं।

 

जिले में नियोजन इकाई व नियोजित शिक्षक -

नियोजन इकाई संख्या नियोजित शिक्षक

नगर पंचायत 06 723

नगर परिषद 01 119

पंचायत 323 5,148

प्रखंड 20 6,905

 

 

निगरानी कैंप में शिक्षक नियोजन के मूल कागजातों से सत्यापन का कार्य चल रहा है। जो भी फर्जीवाड़े सामने आ रहे हैं, उसकी बारीकी से जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

- रामनिवास चौधरी, निगरानी इंस्पेक्टर

 

फर्जी शिक्षक किसी भी हाल में नहीं बख्शे जाएंगे। समय लग सकता है लेकिन फर्जीवाड़े में शामिल लोगों पर कार्रवाई होनी तय है। निगरानी अपने स्तर से नियोजन की जांच कर रही है।

- दिलीप सिंह, डीपीओ, स्थापना

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  • Web Title:Register of teacher recruitment in Maker in Chapra lost निगरानी जांच मकेर प्रखंड के शिक्षक नियोजन सं