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हॉस्टल मामले पर डीएम, एसएसपी व रजिस्ट्रार तलब

पटना हाईकोर्ट ने हॉस्टल व्यवस्था को लेकर पटना विश्वविद्यालय (पीयू) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि पीयू की हॉस्टल व्यवस्था देख इसे बंद कर दिया जाना चाहिए। ऐसा लगता है कि विवि की प्रशासनिक व्यवस्था ध्वस्त हो गई है।

अदालत ने कहा कि विवि की ओर से दायर हलफनामा में स्वीकार किया गया है कि उसके हॉस्टल पर अवैध छात्रों का कब्जा है। ऐसे में जरूरतमंद छात्रों को पढ़ाई के लिए हॉस्टल कैसे दिया जा सकता, जहां उनकी पढ़ाई के साथ-साथ जीवन खतरे में है। कोर्ट किसी भी हाल में छात्रों सहित स्थानीय नागरिकों को खतरे में नहीं डाल सकता। अदालत ने पटना के डीएम, एसएसपी तथा पीयू रजिस्ट्रार को पूरे दस्तावेज के साथ कोर्ट में बुधवार को हाजिर होने का आदेश दिया।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति इकबाल अहमद अंसारी तथा न्यायमूर्ति डॉ.रवि रंजन की खंडपीठ ने सैदपुर हॉस्टल में बरामद जिंदा बम की खबर पर स्वत: संज्ञान लिए गए केस की सुनवाई के दौरान यह बातें कहीं। पीयू की ओर से हलफनामा दायर कर कोर्ट को बताया गया कि पीसी हॉस्टल संख्या एक और नौ में अवैध रूप से जमे छात्रों से हॉस्टल खाली करा लिया गया है। लेकिन छात्र रूम में ताला लगा गए हैं। वहीं ज्ञानचंद हॉस्टल संख्या नौ को भी अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया है। यहां भी दरवाजे पर छात्रों का ताला लटका है। पीजी हॉस्टल संख्या छह के काफी हिस्से को अवैध कब्जा से खाली करा लिया गया है। बाकी बचे अवैध कब्जा को भी मुक्त करा लिया जाएगा। डॉ.भीम राव अम्बेदकर के पूरे हॉस्टल पर अवैध छात्रों का कब्जा बरकरार है। उनसे खाली कराने के लिए विवि से गुहार लगाई गई है।

विवि की ओर से दायर हलफनामा पर कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि जब हॉस्टल पर अवैध कब्जा है और इसकी जानकारी विवि को है, तब विवि ने कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की। कोर्ट ने कहा कि विवि प्रशासन ने हॉस्टल के अधीक्षकों पर क्यों नहीं कार्रवाई की।

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  • Web Title:DM, SSP and PU registrar called on hostel case