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बेहोशी के लिए नहीं होगी इंजेक्शन की जरूरत

इलाज से पहले मरीजों को बेहोश करने के लिए अब इंजेक्शन की जरूरत नहीं होगी। इसके लिए अब एक नई तकनीक पर सफल प्रयोग किया गया है, जिसमें मरीजों को बिना इंजेक्शन के बेहोश किया जा सकता है। चंडीगढ़ पीजीआई व सरगंगाराम अस्पताल सहित देश के चार प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेज में तकनीक पर सफल परीक्षण किया जा चुका है। बेहोशी के लिए सीएलएडीएस तकनीक पर शोध के लिए सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा फंडिंग की गई।

सरगंगाराम अस्पताल की एनिस्थिसिया विभाग की डॉं. जयाश्री सूद ने बताया कि सीएलएडीएस (क्लोज्ड लूप एनिस्थिसिया डिलवरी सिस्टम) में मरीज को बेहोश करने के लिए खून में रक्त का प्रवाह करने वाली छोटी धमनियों पर दवाब बनाया जाता है, यह विधि कंप्यूटर पर आधारित है, जिसमें माइक्रो प्रोसेसर तकनीक के जरिए इस बात पर नजर रखी जाती है कि मरीज को कितनी मात्रा में दवा देनी है। लोकल एनिस्थिसिया में भी इसका कारगर असर देखा गया, जबकि मरीज को केवल सर्जरी करने वाले हिस्से को ही सुन्न करना होता है।

परीक्षण के दौरान दिल और मस्तिष्क की सर्जरी कराने वाले 242 मरीजों को दो श्रेणी में विभाजित किया गया। सात केन्द्र पर किए गए शोध में परीक्षण में देखा गया कि जिन मरीजों को सीएलएडीएस के जरिए बेहोश किया गया, उन्हें दवा की अपेक्षाकृत कम डोज दी गई। जबकि जिन मरीजों पर तकनीक का प्रयोग नहीं किया गया, उन्हें बेहोशी की दवा की न सिर्फ मात्रा बढ़ाई गई, बल्कि वह अधिक समय तक बेहोश रहे। जबकि सीएलएडीएस के जरिए सर्जरी के आधे घंटे बाद मरीज होश में आ गए।

ऐसे काम करती है सीएलएडीएस
बेहोशी की निर्धारित मात्रा में ओरल दवा देने के बाद मरीज के शरीर की बीआईएस (बिस्प्रैक्टल) वैल्यू को देखा जाता है। बीआईएस के जरिए शरीर की शून्यता व नसों की संवेदनशीलता को जांचा जाता है। विभिन्न केन्द्रों पर किए गए परीक्षण में देखा गया कि सीएलएडीएस और बीआईएस के जरिए किए गए एनिस्थिसिया के मरीजों में दवा की मात्रा कम दी गई। पूरी प्रक्रिया में मरीज के शरीर की संवेदनशीलता को कंप्यूटर मॉनिटरिंग पर देखा गया।

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