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हत्या के जुर्म में दोषी को उम्रकैद की सजा

कादिरगंज के मायाबिगहा में 14 साल पहले ताश खेलने के विवाद में हुई हत्या के मामले में कोर्ट ने दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथही उस पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

मायाबिगहा में 19 सितंबर 2003 को कुछ युवक ताश खेल रहे थे। इस बीच उनमें विवाद हो गया। इनमें से एक युवक के चाचा कैलाश चौहान वहां पहुंचे और बीच-बचाव करने लगे। इसी बीच मायाबिगहा के ही रामलाल चौहान ने लोहे की खंती से कैलाश पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मृतक कैलाश के बेटे सुग्रीव चौहान ने इस मामले की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई। पंचम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार ने गवाहों के बयान के आधार पर सुनवाई करते हुए राम लाल चौहान को उम्रकैद की सजा सुनाई। एपीपी राकेश कुमार सिंह ने अदालत में अभियोजन का पक्ष रखा।

दिव्यांग की हत्या में आजीवन कारावास

धमौल थना क्षेत्र के धरहरा गांव में पांच साल पहले दिव्यांग की हुई हत्या के मामले में दोषी निरंजन यादव को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

धरहरा गांव में पांच सितंबर 2012 को दिव्यांग दशरथ केवट की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मृतक के भाई भोला केवट के बयान पर एफआईआर दर्ज हुई। घटना के चश्मदीद गवाहों के बयान के आधार पर प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ओम प्रकाश श्रीवास्तव ने निरंजन यादव को सजा सुनाई। इस मामले में दो अभियुक्त अभी भी फरार चल रहे हैं। दो अन्य आरोपी का मामला अलग चल रहा है। एपीपी राजेश कुमार सिन्हा ने अदालत में अभियोजन का पक्ष रखा।

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  • Web Title:Sentenced to life imprisonment for murder