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SC ने वायु प्रदूषण पर केंद्र की श्रेणीबद्ध कार्य योजना को स्वीकृति दी

SC ने वायु प्रदूषण पर केंद्र की श्रेणीबद्ध कार्य योजना को स्वीकृति दी

उच्चतम न्यायालय ने अलग अलग स्तर के प्रदूषण से निपटने के लिए केंद्र की श्रेणीबद्ध कार्य योजना को शुक्रवार को स्वीकृति प्रदान कर दी और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) से कहा कि वह मौजूदा बुनियादी ढांचे को उन्नत बनाए और छह महीने के भीतर दिल्ली-एनसीआर में अतिरिक्त निगरानी स्टेशन स्थापित करे।

हवा में प्रदूषक कण (पीएम) 2.5 के 250 से 430 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर के ऊपर रहने को प्रदूषण का गंभीर स्तर करार देते हुए प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जब वायु प्रदूषण ऐसे खतरनाक स्तर तक पहुंचता है तो निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाने और सम-विषम योजना लागू करने सहित कई तत्काल कदमों की जरूरत पड़ती है।

न्यायालय की ओर से स्वीकृति उस वक्त मिली जब सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की सुनीता नारायण ने पीठ से कहा कि केंद्र की श्रेणीबद्ध कार्य योजना स्वीकार्य है और इस क्रियान्वयन की स्थिति में लाया जा सकता है।

शीर्ष अदालत ने सीपीसीबी को निदेर्श दिया कि वह छह महीने के भीतर दिल्ली-एनसीआर में अतिरिक्त निगरानी स्टेशन स्थापित करने को लेकर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करे। उसने केंद्र को भी आदेश दिया कि वह चार सप्ताह के भीतर उन पेट्रोलियम कोक और भटटी के तेल के हानिकारक प्रभावों के बारे में छानबीन करे जिनका इस्तेमाल एनसीआर के उद्योगों और बिजली उत्पादन संयंत्रों में होता है।

सॉलीशीटर जनरल रंजीत कुमार ने पीठ को बताया कि सीपीसीबी ने अपने केंद्रीकृत नियंत्रण कक्ष को 57 लाख रुपये की लागत से आधुनिक उपकरणों से उन्नत बनाने का प्रस्ताव रखा है।

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  • Web Title:supreme court approved pollution codes for delhi-ncr