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डॉक्टरों जैसी नर्स तैयार करने का आईएमए ने किया विरोध

डॉक्टरों जैसी नर्स तैयार करने का आईएमए ने किया विरोध

ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की एक और पहल पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने आपत्ति की है। केंद्र सरकार डॉक्टरों जैसी नर्स तैयार करके ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों के संकट से निपटना चाहता है। लेकिन आईएमए ने केंद्र सरकार से दो टूक कह दिया है कि नर्सों को किसी भी रूप में दवा लिखने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

केंद्र सरकार ने नर्स प्रैक्टिसनर कोर्स का खाका तैयार कर लिया है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में ऐसी नर्स होती हैं, जिन्हें काफी हद तक डॉक्टरों की तरफ कार्य करने का अधिकार होता है। मसलन, वे दवाएं लिख सकती हैं। बीमारी की जांच के लिए टेस्ट करा सकती हैं तथा छोटे-मोटे आपरेशनों को भी अंजाम दे सकती हैं। वे मरीज को रेफर भी कर सकेंगी।

छोटे-मोटे चिकित्सकीय कार्य के लिए नर्स प्रैक्टिसनर को फिजिशियन की जरूरत नहीं होगी। अमेरिका और यूरोप में नर्स प्रैक्टिसनर के कोर्स को डॉक्टरों के विकल्प के रूप में शुरू किया गया था जहां यह सफल रहा है। लेकिन भारत में इस प्रकार का कोर्स अभी तक स्वीकृत नहीं था। लेकिन अब सरकार इसे शुरू करना चाह रही है तो डाक्टर विरोध पर उतर आए हैं।

पिछले दिनों केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने इस मुद्दे पर विभिन्न पक्षों की बैठक बुलाई। कोर्स शुरू करने के लिए नर्सिंग काउंसिल और रिसौर्स इंस्टीट्यूट ने पूरी तैयारियां कर ली है। बीएससी नर्सिंग कर चुकी नर्सों को यह कोर्स कराया जाएगा लेकिन बैठक में मौजूद आईएमए के पदाधिकारियों ने इसका विरोध कर दिया।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जुड़े मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार डॉक्टरों की कमी से निपटने का यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है। लेकिन आईएमए हर बार की तरह इस बार भी इसमें अड़चन डाल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है लेकिन आईएमए के विरोध को अनदेखा करने के अलावा सरकार के पास और कोई विकल्प नहीं है। लेकिन सरकार को डर है कि आईएमए कोर्ट में जाकर इस मामले में रोड़ा न अटका दे।
 
आईएमए का अडंगा
- केंद्र सरकार गांवों में डाक्टरों की कमी दूर करने के लिए पहले भी कई नए कदम उठाने की कोशिश कर चुकी है लेकिन आईएमए ने विरोध किया। मसलन, एक तीन वर्षीय ग्रामीण डॉक्टरी कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव यूपीए सरकार के कार्यकाल में तैयार किया गया था लेकिन आईएमए के विरोध से लटका गया।
- केंद्र सरकार आयुष यानी आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी के डॉक्टरों को ट्रेनिंग देकर गांवों में एक सीमा तक एलोपैथी दवाएं लिखने की अनुमति देना चाहती है। लेकिन आईएमए विरोध कर रहा है।
- केंद्र सरकार एमटीपी विधेयक में गर्भपात के लिए आयुष डॉक्टरों को अधिकृत करना चाहती है लेकिन आईएमए ने विरोध किया। इसके बाद सरकार ने कहा कि सिर्फ गर्भपात की दवा लिखने की अनुमति आयुष डॉक्टरों को दी जाएगी, लेकिन आईएमए इसका भी विरोध करने लगा है।

डॉक्टरों जैसी नर्स यानी नर्स प्रैक्टिसनर
- 1960 के दशक में अमेरिका में डॉक्टरों की कमी के चलते नर्स प्रैक्टिसनर का कोर्स शुरू हुआ। मशहूर फिजिशियन हेनरी सिल्वर एवं नर्स लौरेटा फोर्ड ने इस कोर्स को डिजाइन किया।
- अमेरिका में 2008 में करीब 86 हजार नर्स प्रैक्टिसनर थे जिनके 2025 तक 1.98 लाख होने की संभावना है। कई अन्य देशों ऑस्ट्रेलिया, यूरोप में भी नर्स प्रैक्टिसनर प्राइमरी स्वास्थ्य देखभाल में एक सफल व्यवस्था मानी जाती है।
- देश में छह लाख डाक्टरों की कमी है। छोटे शहरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में डाक्टरों की भारी कमी चिंता का विषय है।
- देश में हर साल दो लाख नर्स तैयार होती हैं हालांकि यह संख्या ठीक है लेकिन बड़े पैमाने पर नर्सो के विदेश चले जाने के कारण देश में नर्सों की भी कमी बनी हुई है।

 

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