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गोपनीय फाइलें सार्वजनिक करने पर विचार

गोपनीय फाइलें सार्वजनिक करने पर विचार

नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक करने की बढ़ती मांग के बीच नए मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी)  विजय शर्मा ने कहा कि इन मामलों की नीति पर पुर्नविचार करने की जरूरत है, जिससे ऐतिहासिक घटनाओं की ज्यादा जानकारी औपचारिक माध्यमों से आए।

उन्होंने कहा कि इसके बारे में हमारे अतीत में बहुत कुछ लिखा है। कई सारी चीजें लिखी जा चुकी हैं और जो कुछ भी उपलब्ध है, उन पर भरोसा रखा गया है, लेकिन अगर यह औपचारिक माध्यमों से उपलब्ध है, तो उसके साथ खास गुणवत्ता है। अगर यह अन्य चैनलों से होती है, तो यह गायब होती है।

उनसे पूछा गया था कि क्या नेताजी के रहस्यमयी स्थितियों में लापता होने और विमान दुर्घटना में उनकी कथित मौत से जुड़ा विवाद टुकड़ों-टुकड़ों में प्रकट किया जाता है, जिससे गलत तस्वीर पेश होती है और साख कमजोर होती है। शर्मा ने कहा, बेहद स्पष्ट रुझान ज्यादा औपचारिक माध्यम से ज्यादा से ज्यादा सूचनाओं का आना है। अगर ज्यादा छानने और बीनने की जरूरत हुई, तो ज्यादा समझ एवं सूझ-बूझ वाले लोग एक साथ बैठ कर इसे तय कर सकते हैं।

हाल ही में इन रिपोर्टों पर विवाद छिड़ गया था कि खुफिया ब्यूरो ने नेताजी के परिवार को 20 साल तक निगरानी में रखा था। इसमें यह ज्यादा पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में हुआ था। उन्होंने गोपनीय दस्तावेज को सार्वजनिक करने की नीति पर पुर्नविचार करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, कई बार औपचारिक दस्तावेजों में जो व्यावधान आप पढ़ते हैं, जरूरी नहीं आपको उनकी जरूरत भी हो, इसलिए पुर्नविचार की जरूरत है। शर्मा ने अपने सामने मौजूद एक मामले की चर्चा की, जिसमें उन्होंने महसूस किया कि गृह मंत्रालय की आपत्ति के बावजूद राज्यपाल और राष्ट्रपति के बीच का 50 साल पुराना पत्राचार प्रकट किया जाना चाहिए।

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