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अमेरिका में कम नहीं हो रही है गरीबी

अमेरिका के किसी शहर में चले जाइए, रेलवे या मेट्रो स्टेशनों के बाहर, रेस्तरां के सामने और भीड़ भरे फुटपाथों पर बैठे कुछ लोग भीख मांगते हुए दिखाई देंगे। वे गत्ते का छोटा-सा बोर्ड पकड़े होते हैं, जिस पर लिखा होता है- 'हंग्री, प्लीज हेल्प मी', 'गॉड हेल्प चीयरफुल गीवर्स।' दुनिया अमेरिका को एक महाशक्ति के रूप में देखती है, इसलिए कभी-कभी यह विश्वास नहीं होता कि संसार के गरीब देशों को सहायता देने वाले देश में भी इतने सारे भिखारी होंगे। पर सच यही है कि अमेरिका में भिक्षावृत्ति एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। कुछ अमेरिकी मानते हैं कि भिक्षावृत्ति बढ़ने की सबसे बड़ी वजह यह है कि अमेरिका दुनिया भर के युद्धों  में शामिल है और उसके लिए पैसे को पानी की तरह बहा रहा है। वहीं कुछ लोग इसका कारण यह मानते हैं कि अमेरिकी उद्योगपतियों ने देश में उत्पादन बंद कर दिया है और वे विदेशों से सस्ता सामान खरीदकर या बनवाकर यहां बेचते हैं। सच जो भी हो, पर दुनिया को खुशहाली का सपना देने वाला अमेरिका अब लगातार बढ़ती गरीबी से जूझ रहा है।

यह जरूर है कि इतने खराब हाल के बावजूद अमेरिका और भारत की गरीबी की तुलना नहीं की जा सकती। भारत में गरीबों के पास बिल्कुल पैसा नहीं होता- बैंक में खाता होने का प्रश्न ही नहीं उठता। पर अमेरिका में तथाकथित गरीब के घर में टेलीफोन, कंप्यूटर, मोबाइल फोन के अलावा बैंक खाते में कुछ पैसे भी होते हैं। अमेरिका में अगर चार व्यक्तियों के परिवार की कुल सालाना आमदनी 23,850 डॉलर से कम है, तो वह परिवार गरीब मान लिया जाता है। यह अमेरिका की गरीबी रेखा है। जो परिवार इस रेखा के नीचे होते हैं, उन्हें अमेरिकी सरकार 'फूड स्टैम्प्स' देती है। फूड स्टैम्प्स डॉलर मुद्रा की तरह होते हैं, जिससे सीमित भोजन की चीजें ग्रॉसरी स्टोर से खरीदी जा सकती हैं। फूड स्टैम्प्स का मुख्य उद्देश्य होता है कि कोई अमेरिकी भूखा न रहे। इससे रेस्तरां में भोजन नहीं खरीदा जा सकता। ग्रॉसरी स्टोर से फल, सब्जियां, मीट और डेयरी पदार्थ आदि खरीदे जा सकते हैं। इसे कुछ हद तक हम भोजन के अधिकार जैसा कानून कह सकते हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार, 2013 में चार करोड़, 53 लाख लोग (14.9 प्रतिशत) गरीब थे। इस समय अमेरिका में 5.4 प्रतिशत बेरोजगारी है। यानी गरीबी की रेखा के नीचे रहने वालों की तादाद गरीबों की तादाद से ज्यादा है। अप्रैल 2009 में बेरोजगारी दर 9.9 प्रतिशत थी। यह वही वक्त था, जब अमेरिकी अर्थव्यवस्था मंदी की गिरफ्त में थी। 2009 के मुकाबले इस समय बेरोजगारी दर जरूर कम हो गई है। परंतु बेरोजगारों का औसत वेतन पहले के मुकाबले काफी कम हो गया है। इसलिए पूर्व के मुकाबले लोगों को रोजगार चाहे ज्यादा मिल रहे हों, पर इतने से ही गरीबी कम नहीं हुई है और अमेरिकी अर्थव्यवस्था का यह एक स्याह पहलू बनी हुई है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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