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बेकार चीजों का जादूगर

चंडीगढ़ के विख्यात रॉक गार्र्डन के सर्जक नेक चंद की मृत्यु के साथ एक अद्वितीय कलाकार इस दुनिया ने खो दिया। नेक चंद कई मायनों में अद्वितीय थे और उनका रॉक गार्डन भी दुनिया में अपनी तरह की एक कलाकृति है। नेक चंद को कला में कोई प्रशिक्षण नहीं मिला था। जब भारत की आजादी के बाद विख्यात वास्तु शिल्पी ला कार्बूजिए की परिकल्पना के मुताबिक एक नया शहर चंडीगढ़ बन रहा था, तब वह वहां रोड इंस्पेक्टर के पद पर काम करने लगे। इस बीच चुपचाप वह चंडीगढ़ शहर के दायरे में एक संरक्षित वन क्षेत्र में स्थानीय पत्थरों और कबाड़ से कलाकृतियां बनाकर एक नया संसार रचते रहे। कहा जाता है कि वह दिन में अपनी नौकरी करते और रात में चुपचाप रॉक गार्डन में काम करते और लगभग दो दशकों तक किसी को इस अद्भुत रचना की खबर भी नहीं मिली। और जब सरकारी अधिकारियों को इसका पता चला, तो गैर-कानूनी होने की वजह से रॉक गार्डन के नष्ट होने का खतरा हो गया, लेकिन जनता के समर्थन की वजह  से नेक चंद और उनकी कला को सरकारी स्वीकृति मिल गई और यह असाधारण पत्थरों का बाग चंडीगढ़ का विशेष पर्यटक आकर्षण बन गया। कबाड़, टूटी चूडि़यां, बिजली के बेकार पुजार्ें से बना यह जीवंत संसार अचानक ही सुर्खियों में आ गया।

एक बहुत छोटे पद पर काम करने वाले इस सरकारी कर्मचारी की प्रतिभा और लगन से कई एकड़ में फैले इस जादुई बाग के निर्माण की कहानी अनोखी है। रॉक गार्डन की कला इस मायने में भी अनोखी है कि आसानी से वह लोकप्रिय और श्रेष्ठ कला, सार्वजनिकता और निजता, कला और वास्तु शिल्प के तमाम सुविधाजनक भेदों को मिटाते हुए चलती है। इसकी कलाकृतियों में कहीं आदिवासी कला की, कहीं लोककला की और कहीं आधुनिक अतियथार्थवादी शैली की झलक मिलती है। ये सारे तत्व अलग-अलग नहीं हैं, ये बहुत सहज और स्वाभाविक रूप से आपस में मिले हुए हैं। इसी तरह, इस बाग में प्रकृति और वास्तु शिल्प एक होते हुए दिखते हैं। वास्तु शिल्प में भी मुगल शैली के साथ ग्रामीण वास्तु शिल्प और आधुनिक वास्तु शिल्प घुले-मिले नजर आते हैं। हमें अपने दौर की कला से जो शिकायतें हैं, उनमें एक यह भी है कि उसमें परंपरा, प्रकृति या संस्कृति की निरंतरता नजर नहीं आती। यह कला सहज ढंग से हमारे जीवन के प्रवाह का हिस्सा नहीं बनती, वह अलग चीज की तरह अपनी उपस्थिति दर्ज कराती है। नेक चंद के यहां हर चीज अद्वितीय है, लेकिन वह एक विराट कलाकृति का हिस्सा भी है, और यह कलाकृति प्रकृति का हिस्सा है, साथ ही प्रकृति उस कलाकृति में भी शामिल है। आधुनिक कला में इन दिनों संस्थापनों (इंस्टालेशन) का दौर चल रहा है और कई नामी कलाकार तरह-तरह के संस्थापन तरह-तरह की सामग्री से बना रहे हैं। नेक चंद का रॉक गार्डन इतना बड़ा और विराट संस्थापन है, जितना कभी किसी कलाकार ने नहीं बनाया होगा और न किसी संस्थापन को जनता में ऐसी लोकप्रियता मिली होगी।

नेक चंद जैसे लोग समाज में रूढ़ धारणाओं को चुनौती देते हैं, मसलन यह कि कलाकार एक खास किस्म के लोग होते हैं, या सौंदर्यशास्त्र का ज्ञान एक खास किस्म की पढ़ाई से आता है। नेक चंद की कला, कला संबंधी सारी धारणाओं को खारिज करते हुए भी श्रेष्ठ कला है। वह एक व्यक्ति की रचनात्मक उपलिब्ध होते हुए भी सबकी अपनी है। वयस्क उसका आनंद ले सकते हैं, बच्चे उसमें ऊधम मचा सकते हैं और कला के मर्मज्ञ उसकी बारीकियां परख सकते हैं। नेक चंद जैसे लोग समाज में कभी-कभी होते हैं, और अपने बड़प्पन से हमें विनम्र और कृतज्ञ बना जाते हैं।

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