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भारत में ऐसी गर्मी, मानो सिर पर जल रहे हों 60 वॉट के आधा दर्जन बल्ब

भारत में ऐसी गर्मी, मानो सिर पर जल रहे हों 60 वॉट के आधा दर्जन बल्ब

अमेरिका के नासा की अर्थ अब्जर्वटोरी की तस्वीरों ने मई में पड़ी गर्मी और लू के भयावहता को उजागर किया है। संगठन के टेरा उपग्रह से मिली तस्वीरों के मुताबिक 15 से 27 मई के बीच 12 दिन में भारत में पड़ी असहनीय गर्मी के दौरान पृथ्वी की सतह से 325 वाट्स पर स्क्वायर मीटर ऊर्जा निकली। इस उत्सर्जित गर्मी को भयावहता को अगर हम सरल भाषा में समझें तो कह सकते हैं कि एक वर्ग मीटर क्षेत्र में सिर पर 60 वॉट के छह बल्ब जला दिए गए हों।

भारतीय उपमहाद्वीप और मध्य-पूर्व भी तपे
- नासा की भू वेधशाला के मुताबिक इस बार भारत में मई में गर्मी असामान्य रही। दो सप्ताह तक देश के कई भागों में तापमान 5.5 डिग्री सेल्शियस से ज्यादा रहा।
- चार जून तक भारत में 2500 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। इस बार की प्रंचड गर्मी को रिकार्ड पांच जानलेवा गर्मियों में जगह मिली है।
- टेरा उपग्रह से मिले फोटो का मानचित्र के जरिये किए गए विश्लेषण के मुताबिक भारतीय भूभाग के अलावा, पाकिस्तान, दक्षिण ईरान, यूएई और ओमान भी उबल रहे थे।
- तीन जून को यूएई के स्वेइहन क्षेत्र में पारा 50.7 डिग्री सेल्सियश पर पहुंच गया था। यहां तक कि 2000 फुट की ऊंचाई पर बसे मसूरी में भी तापमान 36.1 डिग्री सेल्शियस पर पहुंच गया था।

जानलेवा गर्मी
- जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे हिमालय क्षेत्र को छोड़ दें तो बाकी जगह 225 से लेकर 325 वाट्स पर स्क्वायर मीटर ऊर्जा का विकिरण हुआ।
- नासा के अनुसार भारतीय ऊंचे हिमालयीन क्षेत्र, तिब्बत और चीन की तरफ ऊर्जा उत्सर्जन 125 वाट्स पर स्क्वायर मीटर रहा।
- श्रीलंका समेत दक्षिण भारत (आंध्र प्रदेश-तेलंगाना, जहां सबसे ज्यादा मौतें लू से हुईं) में 225 वाट्स पर स्क्वायर मीटर ऊर्जा का विकिरण हुआ।
- उत्तर, पश्चिमी और मध्य भारत में ऊर्जा उत्सर्जन 325 वाट्स पर स्क्वायर मीटर रहा।

क्यों हुईं ज्यादा मौतें
(नासा का विश्लेषण)

कारण-1
- भारत में ज्यादा मौतें आर्द्रता की वजह से हुई। ज्यादातर लोगों ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में दम तोड़ा। इसका कारण अत्याधिक तापमान और आर्द्रता का एक साथ होना रहा।
- ज्यादा आर्द्रता हीट इंडेक्स को बढ़ाती है। इससे और गरमी महसूस होती है।
- आर्द्रता लू की स्थिति में अहम भूमिका निभाती है। दरअसल मानव शरीर अपने को ठंडा रखने को पसीने पर निर्भर करता है। अधिक आर्द्रता में यह स्थिति बदल जाती है। इससे शरीर ज्यादा गरम हो जाता है।

कारण-2
- स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना कि अचानक तेज गर्मी पड़ने से ज्यादा मौतें हुईं। देश के एक बड़े भूभाग में मार्च, अप्रैल से मई के पहले हफ्ते तक गैर मौसमी बरसात हुई।
- इस कारण तापमान ठंडा रहा। लिहाजा लोगों को अचानक आई गर्मी से अनुकूलन करने में मुश्किल हुई। बढ़ते तापमान का अभ्यस्त होना एक क्रमिक प्रक्रिया है, लेकिन इस बारे इसके लिए मानव शरीर को समय कम मिल पाया। इसलिए ज्यादा मौतें हुईं।
 

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