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मोदी की काशी से आगे जोशी का कानपुर, राहुल की अमेठी से मां की रायबरेली अच्छी

मोदी की काशी से आगे जोशी का कानपुर, राहुल की अमेठी से मां की रायबरेली अच्छी

शहरों में पढ़े लिखे लोगों की संख्या भी बढ़ी और हाईटेक भी हुए, मगर डिजिटल इंडिया की दौड़ में कई शहर पिछड़ गए। अगर हम ऑनलाइन सिटीजन सर्विस की बात करें, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बनारस से काफी आगे निकल चुका है डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी का कानपुर। बल्कि अखिलेश यादव का इटावा बेहतर स्थिति में है, यह अलग बात है कि उनकी पत्नी डिम्पल का कन्नौज और मुलायम सिंह का आजमगढ़ काफी पीछे है। चौंकाने वाली बात यह कि बिहार से सटे सूबे के पिछड़े इलाके में शुमार कुशीनगर के लोग सबसे ज्यादा जागरुक निकले हैं। गौतम बुद्ध के इस परिनिर्वाण स्थल ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल कर लिया है।

प्रदेश में ई-डिस्ट्रक्टि के लिए दो तरह की ऑनलाइन सेवाएं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शुरू की थी। लोकवाणी केंद्रों के जरिए खतौनी के अलावा आय, जाति, जन्म, मृत्यु व निवास प्रमाण पत्र एवं सभी प्रकार के पेंशन के लिए ऑनलाइन आवेदन और निस्तारण। इसी तरह सिटीजन सर्विस के तहत लोग अपने घर से ही लैपटॉप, डेस्कटॉप या मोबाइल के जरिए इन प्रमाण पत्रों या सेवाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं। अभी 27 तरह की सेवाएं ऑलाइन हो चुकी हैं।

राहुल की अमेठी से मां की रायबरेली अच्छी
वहीं राहुल गांधी के अमेठी की हालत तो बहुत बुरी है। बल्कि सोनिया गांधी का रायबरेली इससे चार गुना अच्छा है। सूबे की सबसे हाईटेक सिटी गौतम बुद्धनगर (नोएडा) में जागरुकता का सवर्था अभाव दिख रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के हाईटेक शहर गाजियाबाद की स्थिति रायबरेली से कुछ ही ठीक है। आजम खां के रामपुर में भी जागरुकता न के बराबर नजर आई। यहां की स्थिति लगभग कन्नौज जैसी ही है। वहीं योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर ने मोदी के बनारस को थोड़ा सा पीछे छोड़ दिया है। सबसे तेजी से जागरुक होने वाले जोशी के कानपुर ने नौवें स्थान से उछाल मारकर तीसरे स्थान पर कब्जा कर लिया है। ऑनलाइन आवेदनों के आंकड़ों से जागरुकता की परख आसानी से की जा सकती है।


 

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