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उत्तरी राज्यों में मानसून की देर से एंट्री संभव

उत्तरी राज्यों में मानसून की देर से एंट्री संभव

मानसून की कछुआ चाल से उत्तर भारत में इसके तय समय पर पहुंचने की उम्मीदें धूमिल होने लगी हैं। मौसम विभाग हालांकि इस बारे में स्पष्ट तौर पर कुछ भी कहने से बच रहा है लेकिन पांच जून को केरल पहुंचने वाला मानसून अब भी एक कदम आगे नहीं बढ़ सका है।

मौसम विभाग के अनुसार पिछले दो दिनों के दौरान मानसून की रफ्तार में यदि थोड़ी प्रगति हुई है तो वह पूर्वोत्तर में हुई है जहां धुबरी और गंगटोक तक मानसून पहुंच गया है। जबकि केरल से आंध्र और तमिलनाडु की ओर मानसून अभी भी नहीं बढ़ पाया है। आमतौर पर दस जून तक मानसून केरल और उसके बाद 12 जून तक झारखंड एवं बिहार तथा 15 जून तक उप्र में प्रवेश कर जाता है लेकिन इस बार धीमी चाल शंका पैदा कर रही है।

मानसून की रफ्तार कमजोर होने के कारण वैज्ञानिकों की उम्मीदें इस बार पश्चिम विक्षोभ पर टिकी हुई हैं जो उत्तर से आते हैं। नौ जून को फिर एक पश्चिमी विक्षोभ आने की संभावना है। विक्षोभों से उत्तर-पश्चिमी भारत में अच्छी बारिश हो जाती है। इधर, बार-बार पश्चिमी विक्षोभ आ रहे हैं जो बारिश की पूर्ति भी कर रहे हैं लेकिन देखना यह है कि यह क्रम कब तक बना रहता है। उत्तरी राज्यों को जुलाई के पहले सप्ताह में धान की रोपाई के लिए सबसे ज्यादा बारिश की जरूरत होती है। उस समय यदि मानसून या पश्चिमी विक्षोभ में से कोई नहीं पहुंचा तो मुश्किल होगी।

दिल्ली में मानसून 29 जून को पहुंचता है। इसमें काफी वक्त है इसलिए दिल्ली में इसके पहुंचने में देरी होने को लेकर मौसम विभाग अभी ठोस दावा करने की स्थिति में नहीं है। यदि आने वाले दिनों में मानसून फिर से मजबूत होता है तो अभी भी तय समय पर दिल्ली पहुंचने की संभावना है। इस बीच मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के दौरान उत्तर पश्चिम भारत में पारे में दो डिग्री की बढ़ोत्तरी की संभावना जताई है।

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