DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मैगी ने विज्ञापन पर खर्च किए 445 करोड़ जबकि गुणवत्ता जांच पर सिर्फ 19 करोड़

मैगी ने विज्ञापन पर खर्च किए 445 करोड़ जबकि गुणवत्ता जांच पर सिर्फ 19 करोड़

नेस्ले इंडिया इन दिनों मैगी की गुणवत्ता को लेकर घिरी हुई है। इस बीच कंपनी की एक आर्थिक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमे उजागर हुआ है कि नेस्ले ने 2014 में विज्ञापनों पर 445 करोड़ रुपये फूंके, जबकि उत्पादन की गुणवत्ता जांच पर इस राशि का भी पांच फीसदी से भी कम यानी सिर्फ 19 करोड़ रुपये। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि दूसरी कंपनियां भी ब्रांड प्रमोशन पर लगभग इसी तरह ज्यादा खर्च करती हैं।

पांच सालों में बिक्री पर खर्च 47% बढ़ा:  नेस्ले की भारतीय इकाई के सालाना वित्तीय खातों के विश्लेषण से पता चलता है कि पिछले पांच साल में कंपनी ने कर्मचारियों पर खर्च 75% बढ़ाया है। यह 2010 में 433 करोड़ रुपये था जो 2014 में बढ़कर 755 करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह कंपनी ने जहां 2010 में अपने विज्ञापन व बिक्री पर 302 खर्च किए थे वह 2014 में 47% बढ़कर 445 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। वहीं इस अवधि में कंपनी का प्रयोगशाला या गुणवत्ता परीक्षण पर खर्च इस राशि का सिर्फ पांच फीसदी से भी कम यानि 13 से 19 करोड़ रुपये पहुंचा।

गुणवत्ता जांच से ज्यादा खर्च यात्रा-ट्रेनिंग पर:  खातों के विश्लेषण में सामने आया है कि कंपनी ने ट्रैवेलिंग और ट्रेनिंग पर गुणवत्ता जांच की तुलना में ज्यादा खर्च किया है। ट्रैवेलिंग खर्च जहां 2010 के 54 करोड़ से 27% बढ़कर 2014 में 68 करोड़ रुपये रहा वहीं ट्रेनिंग खर्च में 51% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 2010 में 25 करोड़ रुपये से बढ़कर 2014 में यह 38 करोड़ रुपये हो गया।

कर्मचारियों पर खर्च में 75% इजाफा
कंपनी की भारतीय इकाई ने पिछले पांच साल के दौरान अपने कर्मचारियों पर होने वाले खर्च में पिछले पांच साल के दौरान 75% का इजाफा किया है। साल 2010 में जहां कर्मचारियों पर होने वाला खर्च 433 करोड़ रुपये था वहीं 2014 में यह 755 करोड़ रुपये हो गया।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:मैगी ने विज्ञापन पर खर्च किए 445 करोड़ जबकि गुणवत्ता जांच पर सिर्फ 19 करोड़