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मिलिए मैगी की सबसे पहले पोल खेलने वाले यूपी के अफसर से

मिलिए मैगी की सबसे पहले पोल खेलने वाले यूपी के अफसर से

मैगी आज जहां पहुंच गई है वहां से वापस आने में उसे बहुत वक्त लगेगा और वापस आने पर भी उसे शायद ही वो जगह मिल पाए जो पहले थी। मैगी को रसातल में पहुंचाने वाला आखिर है कौन? यूपी सरकार के इस कारिंदे का नाम है वीके पांडे।

वीके पांडे का काम ही है खाने-पीने के सामानों पर निगाह रखने का। वे फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन में काम करते हैं। सीधे शब्दों में कहा जाए तो वे खाद्य विभाग में हैं। 40 साल के वीके पांडे ने मैगी के सैंपल लिए और जांच में पाया कि इसमें लेड और एमएसजी है।

मैगी से पहले वे ब्रिटेनिया की नाक में भी दम कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि ब्रिटेनिया ने नियम तोड़े थे और इसी पर कार्रवाई की गई थी। उन्होंने बताया कि,"नॉनवेज दर्शाने के लिए पैक पर लाल रंग का इस्तेमाल किया जाता है और वेज के लिए हरे रंग का लेकिन ब्रिटेनिया ने ब्राउन रंग का इस्तेमाल किया था। मैंने एडीएम कोर्ट में मामला डाला और कंपनी ने आरोपों को स्वीकार किया।"

कहानी यहां खत्म नहीं होती। उन्होंने लखनऊ की प्रसिद्ध वाहिद बिरयानी के भी सैंपल लिए थे। ये सैंपल बाराबंकी ब्रांच से लिए गए थे। टेस्ट में पता चला कि बिरयानी के रंग में गड़बड़ है तो उन्होंने इस मशहूर बिरयानी ब्रांड के खिलाफ भी मामला दर्ज करा दिया।

मैगी मामले पर वे बताते हैं कि उन्होंने 10 मार्च 2014 को सैंपल लिए थे जिनको जांच के लिए भेजा गया। गोरखपुर लैब में टेस्ट हुआ तो एमएसजी निकली। कंपनी को नोटिस भेजा गया। कंपनी चाहती थी कि जांच कोलकाता लैब में कराई जाए जो देश की सबसे आधुनिक लैब्स में से एक है।

कोलकाता लैब ने भी इस बात पर मुहर लगा दी कि मैगी में एमएसजी है। इसके बाद एफएसडीए कमिश्नर पीके सिंह ने भी प्रोसीक्यूशन के लिए आगे बढ़ने को कहा। यह पूछने पर कि उन्हें किसी तरह के दवाब का सामना करना पड़ा? वे बताते हैं कि हम प्रेशर को हैंडल करना जानते हैं।

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