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पांच गोली मारकर हत्या करता था राहुल खट्टा, एनकाउंटर में हुआ ढेर

पांच गोली मारकर हत्या करता था राहुल खट्टा, एनकाउंटर में हुआ ढेर

वेस्ट यूपी में आतंक का पर्याय बने ढाई लाख रुपये के इनामी राहुल खट्टा और उसके एक साथी को शुक्रवार दोपहर एसओजी ने मुठभेड़ में मार गिराया। राहुल के दो साथी भागने में सफल रहे। मुजफ्फरनगर पुलिस से लूटी एसएलआर समेत तीन कार्बाइन, दो राइफल, दो पिस्टल, एक तमंचा, 60 कारतूस और डेढ़ दर्जन मोबाइल फोन बदमाशों के पास से मिले हैं।

शामली जिले के थानाभवन क्षेत्र के भट्ठा व्यापारी से दो दिन पहले राहुल खट्टा ने एक करोड़ की रंगदारी मांगी थी। शुक्रवार को सफेद रंग की आई-20 कार में सवार राहुल अपने तीन साथियों के साथ थानाभवन क्षेत्र में पहुंचा और व्यापारी को फोन करके रुपये मांगे। व्यापारी ने इसकी सूचना शामली पुलिस को दी। दोपहर लगभग 12.15 बजे बदमाश चरथावल से होते हुए सहारनपुर में प्रवेश कर गए। पुलिस ने वायरलेस पर इसकी सूचना आसपास के जिले में फ्लैश कर दी।

बदमाश पुलिस को चकमा देकर बड़गांव की तरफ चले गए। अपराह्न करीब 2.15 बजे पुलिस को पीछे देखकर बदमाशों ने कार बड़गांव-सहारनपुर मार्ग स्थित गांव हलगोवा में घुसा दी। संकरी गली होने से कार दुर्घटनाग्रस्त होकर फंस गई। आनन-फानन में बदमाश हथियार और बैग लेकर जंगल की तरफ भागे। इसी दौरान पुलिस से मुठभेड़ हो गई। पुलिस की गोलियों से राहुल खट्टा व उसका साथी बिंटा बाल्मीकि घायल हो गए। जबकि, उनके दो साथी निकल भागे। पुलिस ने घायलों को जिला अस्पताल भिजवाया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

पांच गोली मारकर हत्या करता था खट्टा
रंगदारी और अपहरण की वारदातों का माहिर राहुल खट्टा ने कई लोगों को बेहरमी से मौत के घाट उतारा। खास बात यह थी कि वह पांच गोली मारकर हत्या जैसी संगीन वारदातों को अंजाम दिया करता था। जुर्म की दुनिया से जुड़े लोगों की माने तो ऐसा वह दहशत फैलाने और नाम कमाने के लिए करता था।

राहुल ने अपने गांव प्रहलादपुर में पूर्व प्रधान की पांच गोली मारकर हत्या की। इसके बाद उसने हत्या की जितनी भी वारदतों को अंजाम दिया उन सभी में पांच गोली मारी। उसने बाद में हनीफ ठेकेदार को मौत के घाट उतारा। हनीफ को भी पांच गोली मारी। पांच गोली मारने की चर्चाएं क्षेत्र में फैली तो खट्टा ने इसने हत्या का तरीका बना लिया। इसके बाद पुलिस रिकार्ड में भी हत्या का यह तरीका राहुल खट्टा के नाम दर्ज हो गया।

चप्पल चुराने से लेकर रंगदारी और अपहरण तक का सफर
यूपी समेत, एनसीआर हरियाणा और उत्तराखंड में अपहरण, डकैती और हत्या की अनगिनत वारदातों को अंजाम दे चुके राहुल खट्टा ने सबसे पहले गांव के मंदिर से चप्पल चोरी की थी। इसके बाद उसने बाइक चुराई और फिर लोनी पुलिस थाने का मुखबिर बन गया। यहीं से खट्टा ने जरायम की दुनिया में कदम रखा और कदम रखते ही, पहली बड़ी घटना को अंजाम देते हुए पशु व्यापारियों से 14 लाख रुपये की लूट की। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

वर्ष 2010 में पहली बार राहुल पर पुलिस ने चार्ज लगाए। इसे गुंडा एक्ट और एनडीपीएस एक्ट में निरुद्ध किया। इन आरोपों को पुलिस न्यायालय में सिद्ध नहीं कर पाई और राहुल सभी आरोपों में दोषमुक्त हो गया। इस घटना ने उसके सोचने का तरीका ही बदल दिया उसे कानून के हाथ छोटे लगने लगे। इसके बाद तो उसने जैसे जरायम की दुनिया में रफ्तार के साथ दौड़ना शुरू कर दिया। पशु लूट की वारदात से राहुल पुलिस की नजर में आया। लूट की इस घटना के बाद उसने एक दवा व्यापारी से पांच लाख रुपये की रंगदारी मांगी।

अब तक वह जरायम की दुनिया में नाम कमा चुका था और इन दोनों वारदातों के बाद राहुल ने भूरा के साथ मिलकर देहरादून में विशाल मेगा मार्ट में डकैती डाली। डकैती की वारदात के बाद उसने पिलखुवा से व्यापारी ऋषि रमन जैन का अपहरण किया। फरीदाबाद के रहने वाले इस व्यापारी के एवज में उसने दो करोड़ रुपये की फिरौती मांगी। इसके बाद इसने रंगदारी मांगना शुरु कर दिया।

गाजियाबाद में अपने साथियों के साथ इसने मदर डेयरी की वैन लूटी और मेरठ में भी लूट की वारदातों को अंजाम दिया। सबसे अधिक भट्टा व्यापारी ही राहुल के निशाने पर रहते थे। इसने भट्ठा स्वामी प्रवीण मित्तल का अपहरण किया उनकी एवज में पांच करोड़ रुपये की वसूली की। करीब तीन माह पहले राहुल खट्टा ने बागपत के ज्वैलर्स प्रदीप कुमार का अपहरण किया। चर्चाएं हैं कि अपहरण के बाद राहुल ने ज्वैलर्स के बेटे को नानौता और रामपुर के बीच में ही कहीं रखा था। इस तरह मंदिर की चौखट से चप्पल चुराने के बाद बहुत तेजी से राहुल ने जरायम की दुनिया में अपनी पहचान बना ली थी।

कार में नीली बत्ती लगाकर करता था वारदात
राहुल खट्टा का अपराध करने का स्टाइल भी अलग था, वह नीली बत्ती लगी लग्जरी कारों में घटना को अंजाम देता था। तीन नवंबर 2014 को गाजियाबाद के कवि नगर के ईटभट्टा व्यापारी का पिलखुआ से राहुल खट्टा ने अपहरण कर लिया था। पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई थी।

डीआईजी रमित शर्मा ने सरधना एसओ और अपने पीआरओ अशोक शर्मा को मौके पर भेजा था। 24 घंटे के अंदर नवीन कंसल को सरधना के कालिंदी के टयूवैल से पुलिस मुठभेड़ के बाद बरामद कर लिया था। जिसका मुकदमा सरधना थाने में पंजीकृत किया गया था। इस दौरान राहुल खट्टा गैंग के सदस्य गिरफ्तार कर लिए गए थे। यह अपहरण खट्टा ने नीली बत्ती की कार में पुलिस की सीओ की वर्दी में किया था। खट्टा हर वारदात में नीली बत्ती की लग्जरी कार का प्रयोग करता था।

100 की स्पीड पर कार और धांय-धांय
पुलिस के चंगुल से बचने के लिए राहुल खट्टा की कार जब गांव की गलियों में सौ की स्पीड से दौड़ रही थी तो ग्रामीणों की समझ नहीं आया कि माजरा क्या है, क्योंकि उन्होंने आज तक कभी ऐसा नहीं देखा था।

जडौदा पांडा से जब बदमाश पुलिस से बचते हुए भागे तो उनकी कार हवा से बातें कर रही थी। कार से कुछ ही मीटर पीछे सहारनपुर एसओजी की बुलेरो भी दौड़ रही थी। एसओजी की सोच थी कि आई-20 सहारनपुर की तरफ ही जाएगी, क्योंकि 100 से ज्यादा की स्पीड से कार इसी मार्ग पर चल सकती थी। पुलिस ने इसी पर जाल बिछाया, लेकिन बदमाश भांप गए। उन्हें पता था कि यदि सहारनपुर की तरफ गए तो पुलिस मोर्चा लगाए बैठी होगी। वहां से बचना नामुमकिन ही होगा।

बदमाशों ने कार को बड़गांव-सहारनपुर मार्ग स्थित अंबेहटा चांद की गलियों में मोड़ दिया। गांव की गलियों में जब बदमाशों की कार 100 की स्पीड से गुजरी तो वहां खेल रहे बच्चों व परिजनों में भगदड़ मच गई। कई बच्चे कार की चपेट में आने से बाल-बाल बचे। आगे बदमाशों की कार तो पीछे-पीछे एसओजी की दो जीप भी उसी गति से चल रही थी। यहां बदमाशों की किस्मत देखिए कि वे इस गांव से सही-सलामत बचकर निकल गए और फिर बड़गांव-सहारनपुर मार्ग पर आ गए।

अगला गांव हलगोवा था। इस बार एसओजी को लग गया था कि बदमाश इस बार भी गांव में ही घुसेंगे। इसलिए वे भी इसके लिए तैयार हो गए। अंबेहटा चांद की तरह ही यहां भी बदमाशों ने गांव में कार घुसा दी। यहां भी 100 की स्पीड से कार जब गलियों में घुसी तो भगदड़ मच गई। गली संकरी होने तथा छोटा मोड़ होने के चलते कार की जोरदार टक्कर दीवार से हो गई। इस हादसे में कार आगे से खत्म हो गई। मौत को सिर पर देखकर बदमाशों ने अपने असलाह और बैग लिए और खेतों की तरफ भाग निकले।

पुलिस को भनक लग गई थी कि बदमाश पैदल हो लिए हैं। इसका सीधा मतलब था कि आगे मुठभेड़ होनी है। एसओजी ने अपने असलाहों को लोड करके पोजीशन लेकर आगे बढ़ना शुरू कर दिया। पुलिस ने ललकारा तो बदमाशों ने भी फायरिंग कर दी। पुलिस और बदमाशों के बीच फायरिंग हुई तो गांव में अफरा-तफरी मच गई। गांव का आबादी से महज 100 मीटर की दूरी पर हो रही गोलीबारी से ग्रामीण सकते में आ गए। गोलीबारी में दो बदमाश जमीन पर जा गिरे, जबकि दो भाग निकले।

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