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आठ माह बाद भी 108 सांसदों ने गोद नहीं लिया गांव

आठ माह बाद भी 108 सांसदों ने गोद नहीं लिया गांव

सांसद आदर्श ग्राम योजना की घोषणा होने के करीब आठ महीने बाद भी एक सौ आठ सांसदों ने अपने मनपसंद गांव का अभी तक चयन नहीं किया है,  जबकि उन्हें एक महीने के भीतर गांवों का चयन करना था। इनमें 55 सांसद केवल पश्चिम बंगाल के हैं। हालांकि, 679 सांसदों ने गांव का चयन किया है और वहां काम शुरू है।

ग्रामीण विकास मंत्री बीरेंद्र सिंह ने कहा कि गांवों के चयन में सांसदों को कुछ समस्याएं आ रही हैं। दिल्ली में कई सांसदों के चुनाव क्षेत्र में कोई गांव नहीं है। सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र से बाहर गांव को गोद नहीं लेना चाहते। हालांकि, सिंह ने स्वीकार किया कि दिल्ली में कई गांव ऐसे हैं, जहां विकास नहीं हुआ है। 2019 तक हर सांसद को तीन गांव गोद लेना है। सांसदों को अभी से दूसरे गांवों को चयन करने को कहा गया है। सांसद आदर्श ग्राम योजना से प्रेरणा लेकर छह राज्यों छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, हरियाणा, मिजोरम, कर्नाटक तथा आंध्रप्रदेश ने भी विधायक आदर्श ग्राम योजना शुरू की है। सिंह ने कहा कि ग्रामीण विकास की सभी अच्छी परंपराओं के पालन के लिए भोपाल में 6 और 7 अगस्त को एक कार्यशाला होगी। इस योजना में फंड की कमी नहीं आएगी।

प्रमुख सांसद जो नहीं कर सके चयन -
जिन सांसदों ने योजना के तहत गांवों का चयन नहीं किया, उनमें कांग्रेस के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश, जनार्दन द्विवेदी, परवेज हाशमी, डा. कर्ण सिंह तथा सत्यव्रत चतुर्वेदी के अलावा रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर, सपा की जया बच्चन, मनोनीत जावेद अख्तर, एचके दुआ भी इसमें शामिल हैं। दिल्ली से भाजपा के सभी सात सांसदों ने किसी गांव का चयन नहीं किया।
 

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