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ताजमहल का साथ छोड़ रहे हैं पत्थर

ताजमहल का साथ छोड़ रहे हैं पत्थर

ताजमहल में सदियों पहले तराश कर लगाए गए पत्थर अब उसका साथ छोड़ रहे हैं। कई जगह से पत्थर गिर रहे हैं। हवा के झोंकों का दबाव भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। इससे संगमरमरी स्मारक की खूबसूरती बनाए रखने के लिए पुरातत्व विभाग द्वारा कराए जा रहे संरक्षण कार्यों पर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं।

ताजमहल को कई भागों में बनाया गया। इनमें से मुख्य गुबंद के अलावा मीनारें, रॉयल गेट, शाही मस्जिद, म्यूजियम में बड़े-बड़े पत्थर लगे हुए हैं। मुख्य गुंबद की स्थिति ज्यादा खराब है। यहां कई जगह से पत्थर निकल चुके हैं। ताजमहल की असली शान मुख्य गुंबद ही है, लेकिन यहां निकल चुके पत्थरों को न लगाने से ये हिस्सा बेनूर दिखने लगा है। विदेशी सैलानी निकले हुए पत्थर के हिस्से की फोटोग्राफी कर ले जाते हैं। इससे गलत संदेश जा रहा है।

रॉयल गेट (फोरकोर्ट के निकट) में लगे लाल पत्थर भी साथ छोड़ रहे हैं। इनको संरक्षित कराने के लिए कोई प्रयास नहीं हो रहे हैं। पूरे परिसर में लगभग 81 पत्थर ऐसे हैं, जो चटके हुए हैं। इन सभी पर नंबर भी डाल दिए गए हैं, लेकिन इनके स्थान पर नए पत्थर नहीं लगाए गए हैं।

इतिहासकार राजकिशोर राजे का कहना है कि पत्थरों में लगाया गया मसाला धीर-धीरे पत्थरों का साथ छोड़ रहा है, जिसके कारण ये गिर रहे हैं। थोड़ी सी तेज हवा चलने पर पत्थर नीचे गिर जाते हैं। उनका कहना है कि गर्मियों में ज्यादा तापमान की वजह से भी पत्थर गिर रहे हैं। राजे का कहना है कि इनके संरक्षण के प्रति पुरातत्व विभाग को ध्यान देना होगा, अन्यथा मुहब्बत की निशानी की दुर्दशा हो जाएगी।

प्रति वर्ष करोड़ों रुपये का होता है खर्च
ताजमहल में संरक्षण के नाम पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। ताजमहल में प्रतिवर्ष लगभग दो करोड़ रुपये के काम कराए जाते हैं। कभी ये धनराशि कम और ज्यादा भी हो जाती है। इतनी धनराशि खर्च होने के बाद भी स्मारक का हाल बुरा है।

मद धनराशि प्रतिवर्ष
संरक्षण कार्य:  एक से दो करोड़ रुपये
टिकट से आय: 70 से 80 करोड (55 करोड़ एडीए और 25 करोड़ एएसआई)
सीआईएसएफ पर खर्च: 30 करोड़ रुपये

ताजमहल में लगातार संरक्षण का काम चलता रहता है। जो पत्थर चटक गए हैं। उन्हें चिन्हित कर लिया गया है। गिरे हुए पत्थरों के स्थान पर दूसरे लगवाए जाएंगे।
- डॉक्टर भुवन विक्रम सिंह, अधीक्षण पुरातत्वविद
 

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