DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पढ़िए कैप्टन कालिया के साथ पाक ने किस तरह की बर्बरता

पढ़िए कैप्टन कालिया के साथ पाक ने किस तरह की बर्बरता

कारगिल के शहीद कैप्टन सौरभ कालिया को दी गई बर्बर यातनाओं के मामले में सरकार पर जनभावनाओं का दबाव काम करता दिख रहा है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद भारत पाकिस्तान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय जा सकता है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उदयपुर में कहा कि इस मामले में पिछली और हमारी सरकार के रुख की समीक्षा की गई है।

सुषमा ने बताया, यह फैसला लिया गया है कि 1999 में पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा कैप्टन कालिया को दी गई यातनाएं, एक असाधारण मामला बनता है। लिहाजा सरकार सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा दायर करेगी और अदालत से पूछेगी कि क्या मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत इस मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। अगर अदालत सहमति देगी तो हम अंतरराष्ट्रीय न्यायालय जाएंगे।

कैप्टन कालिया और पांच अन्य सैनिकों को 15 मई 1999 को करगिल के कासकर इलाके में गश्त ड्यूटी के दौरान पाकिस्तानी सैनिकों ने पकड़ लिया था। उन्हें बंधक रखा गया जहां उन्हें प्रताड़ित किया गया और उनके क्षत विक्षत शवों से देश में रोष की लहर दौड़ गई। उनके शव 15 दिन बाद भारत को सौंपे गए।

कैप्टन कालिया के कान के परदे को गर्म सलाखों से छेद डाला गया था, उनकी आंखें फोड़ दी गई थी और उनके शरीर के अंगों को तथा लिंग को काट डाला गया था। उनके अधिकांश दांत और हडि्डयां तोड़ डाली गई थी। शहीद सैनिक के पिता एनके कालिया ने 2012 में उच्चतम न्यायालय का रुख कर इस मामले में एक अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की थी।

सरकार ने पहले कहा था कि इस मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय जाना मुमकिन नहीं है। इस उदासीनता को लेकर सरकार की चौतरफा आलोचना हुई थी। वहीं विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि कारगिल शहीद कैप्टन कालिया के परिवार की ओर से दायर मुकदमे के मामले में सरकार ने राष्ट्रमंडल के प्रावधानों के तहत पारंपरिक रुख रखा है।


 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:पढ़िए कैप्टन कालिया के साथ पाक ने किस तरह की बर्बरता