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पीएम ने नहीं लगाई कोई पाबंदी: सुषमा स्वराज

पीएम ने नहीं लगाई कोई पाबंदी: सुषमा स्वराज

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने रविवार को कहा कि अतिसक्रिय प्रधानमंत्री होना कोई चुनौती नहीं है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन पर कोई पाबंदी नहीं लगाई है, बल्कि वह खुद सुर्खियों से दूर रहना पसंद करती हैं। जब सुषमा से पूछा गया कि क्या प्रधानमंत्री का अतिसक्रिय होना उनके लिए चुनौती है, तो उन्होंने कहा कि अतिसक्रिय प्रधानमंत्री से सहयोग मिलता है और वह कभी चुनौती नहीं होते।

विदेश नीति के मोर्चे पर पिछले एक साल में राजग सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए सुषमा ने कहा कि वह इसलिए खबरों में कम रहती हैं क्योंकि उन्हें यह अपनी भूमिका के साथ सही लगता है। सुषमा ने कहा कि टीम के सदस्यों में कभी नंबर एक, दो या तीन के लिए प्रतिस्पर्धा नहीं रहती। टीम मिलकर काम करती है। विरोधियों से प्रतिस्पर्धा होती है, टीम के सदस्यों में नहीं। मेरे सभी सहयोगी नंबर एक की तरह काम कर रहे हैं और अपना सर्वश्रेष्ठ काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जहां तक खबरों में कम रहने की बात है तो यह मेरे काम के अनुरूप है। प्रधानमंत्री ने किसी पर कोई पाबंदी नहीं लगाई तो मेरे पर क्यों लगाएंगे। लेकिन आपको मैं खबरों में कम इसलिए लगती हूं क्योंकि मैं नेता प्रतिपक्ष के पद से विदेश मंत्री बनी हूं। नेता प्रतिपक्ष के रूप में मुझे रोज बोलना पड़ता था।

सुषमा ने कहा, लेकिन विदेश मंत्री के रूप में मेरा मानना है कि मुझे घरेलू मुद्दों पर नहीं बोलना चाहिए। क्योंकि जब विदेश मंत्री बोलते हैं तो यह उनकी निजी राय या पार्टी की राय नहीं बल्कि देश की राय होती है। इसलिए विदेश मंत्री को नहीं बोलना चाहिए। यही कारण है कि मैंने तय किया कि मुझे जो काम मिला है, उसमें मुझे बोलना नहीं चाहिए और मैं इसका पालन करती हूं।

बार-बार खबरों में इस तरह की बात देखने को मिलती है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मोदी सक्रिय हैं और सुषमा खबरों में कम रहती हैं। इस पर प्रतिक्रिया दे रहीं सुषमा ने कहा कि पहले भी विदेश मंत्री खबरों में कम रहते थे। उनकी सरकार के एक साल के कामकाज को गिनाते हुए सुषमा ने कहा कि यात्राओं, संवाद और नतीजों, इन तीन चीजों पर ध्यान दिया गया है और मोदी, उनके तथा विदेश राज्य मंत्री एवं 101 देशों के बीच 162 कूटनीतिक बातचीत हुई हैं।

सुषमा ने पाकिस्तान, भूटान, मालदीव और अफगानिस्तान समेत पड़ोसी देशों के साथ साझेदारी का ब्योरा देते हुए अमेरिका, चीन और रूस जैसी महाशक्तियों के साथ भारत की साझेदारी पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि विदेश नीति का जोर विकास के साथ कूटनीति पर होगा। उन्होंने कहा कि सरकार की बड़ी घरेलू फ्लैगशिप योजनाओं को अंतरराष्ट्रीय कामकाज में शामिल किया जाएगा।

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