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11 अप्रैल, 2020|1:04|IST

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विरासत ही बिहार के विकास का मॉडल है: नीतीश

विरासत ही बिहार के विकास का मॉडल है: नीतीश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को कहा कि धंधा-पानी में रुचि रखने वालों को क्या पता कि विरासत क्या चीज होती है? हमारे लिए विरासत जरूरी है।

उन्होंने कहा कि बिहार के लोग, बिहार की मिट्टी और बिहार की विरासत ही बिहार के विकास का मॉडल है। कॉरपोरेट लोग आकर यहां विकास नहीं करेंगे। हमें अपने वर्तमान को भी इस तरह से संवारना है कि वह भी प्रेरणा दे।

एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट स्थित सभागार से गांधी शिविर संरचना, मॉरिसन भवन, जार्ज आरवेल के मोतिहारी स्थित जन्मस्थली के पुनरुद्धार व गोलघर में लेजर शो के उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री ने यह बात कही।

देर शाम मुख्यमंत्री ने गोलघर में लेजर शो भी देखा, जिसमें पटना की कहानी दिखायी गयी है। मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन बिहार संग्रहालय की चर्चा करते हुए कहा कि इतना तय है कि वहां बच्चे से लेकर बूढ़े तक को संतोष की अनुभूति होगी।

पटना संग्रहालय का हाल यह है बहुत सारी कलाकृतियां बांध कर रखी हुई हैं। उनको बिहार संग्रहालय में रखा जाएगा। उन्होंने कला संस्कृति एवं युवा विभाग के प्रधान सचिव विवेक सिंह को निर्देश दिया कि वह मधुबनी के बलिराज गढ़ व छपरा के चेचर जाकर देखें कि उत्खनन की क्या स्थिति है।

इस क्रम में उन्होंने तेल्हाड़ा और नालंदा की भी चर्चा की। एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट परिसर स्थित गांधी शिविर संरचना के तहत उस भवन को विकसित किया गया है, जिसमें नोआखाली से लौटने के बाद 1947 में गांधी जी ठहरे थे। इसे फिर से पुराना स्वरूप दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस भवन में गांधी जी के प्रवास से जुड़ी चीजों को प्रदर्शित किया जाए। गांधीवादी विचारक रजी अहमद ने कहा कि जब गांधी को भुलाने की कोशिश हो रही है, तो ऐसे समय में गांधी की स्मृतियों को जिंदा करना बड़ा काम है।

कला संस्कृति मंत्री राम रमण, भवन निर्माण मंत्री दामोदर रावत व एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट के निदेशक डीएम दिवाकर ने भी विचार रखे। मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह भी मौजूद थे।

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