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अब तो और जिम्मेदारी बढ़ गई है: अरुणिमा

राष्ट्रपति भवन में सोमवार को जब राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी अम्बेडकरनगर की अरुणिमा सिन्हा को पद्मश्री से सम्मानित कर रहे थे तो उनके चेहरे की चमक वाकई ‘अरुणिमा’ सी थी। नीले रंग का सूट पहने अरुणिमा सिन्हा ने खुशी में कई बार हॉल में बैठे लोगों का अभिवादन किया। राष्ट्रपति के प्रति कृतज्ञता जताई। सम्मान के बाद अरुणिमा सिन्हा ने हिन्दुस्तान को फोन पर बताया कि ‘कभी-कभी मुझे यकीन नहीं होता मैंने कोई इतना बड़ा काम किया है। बस, जोश और हौसला दिखाया है। मैं चाहती हूं कि मेरे जैसी देश की हर लड़की कुछ ऐसा करके दिखाए कि वे भी इसी तरह सम्मानित हों।’

अरुणिमा वॉलीबाल की राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी थीं। अप्रैल, 2011 को लखनऊ से दिल्ली जाते समय किसी ने उन्हें चलती रेलगाड़ी से धक्का दे दिया था। जिसमें वह बुरी तरह घायल हो गई थीं। उन्हें अपना एक पैर गंवाना पड़ा। हर तरफ से असहाय अरुणिमा ने हिम्मत नहीं हारी। इस घटना के बाद उन्होंने जानीमानी पर्वतारोही बछेंद्री पाल से ट्रेनिंग ली और माउंट एवरेस्ट की चोटी फतह कर ली। उन्होंने चढ़ाई पूरी करने में 17 घंटे का समय लिया। माउंट एवरेस्ट को फतह करने वाली वह पहली विकलांग महिला बनीं। इसके बाद तो उन्होंने कभी पीछ मुड़कर नहीं देखा।

उन्होंने बताया कि इस सम्मान के साथ उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। वह अपने जैसी तमाम अरुणिमा तैयार करना चाहती हैं। उन्नाव में वह इंटरनेशनल स्पोट्र्स व एडवेंचर स्पोट्र्स अकादमी खोलकर अपने इस सपने को पूरा करेंगी। वह फिलहाल हर महाद्वीप की सबसे ऊंची पर्वत चोटियों को फतह करना चाहती हैं। वह अपनी टीम के 112 अप्रैल को आस्ट्रेलिया जा रही हैं। वहां वह माउंट कोस्कीयूज्को को फतह करने का प्रयास करेंगी। उनकी टीम में उनके ट्रेनर प्रतीक भौमिक व ओम प्रकाश होंगे।

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