धार्मिक भेदभाव बर्दाश्त नहीं: नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि उनकी सरकार जाति, संप्रदाय और धर्म के आधार पर किसी तरह का भेदभाव बर्दाश्त या स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में अल्पसंख्यकों के अधिकारों...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि उनकी सरकार जाति, संप्रदाय और धर्म के आधार पर किसी तरह का भेदभाव बर्दाश्त या स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर काल्पनिक आशंकाओं की कोई जगह नहीं है।
भाजपा के कुछ नेताओं की विवादित टिप्पणियों की खिलाफत करते हुए मोदी ने कहा, जब भी किसी खास अल्पसंख्यक धर्म के बाबत किसी व्यक्ति द्वारा कुछ कहा गया तो हमने तुरंत उसे अस्वीकार किया है। टाइम मैगजीन को दिए साक्षात्कार में उन्होंने यह बात कही। प्रधानमंत्री ने कहा, जहां तक भाजपा और मेरी सरकार का सवाल है तो सिर्फ एक ही पवित्र ग्रंथ है और वह है भारत का संविधान।
हिंदूवादी संगठनों के घर वापसी, लव जिहाद जैसे अभियानों और हाल ही में दिल्ली सहित कुछ अन्य शहरों में चर्चो में हुई तोड़फोड़ की घटनाओं के मुद्दे पर मोदी सरकार आलोचना का शिकार होती रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के बयान के सवाल पर मोदी ने कहा कि यदि भारत के इतिहास का विश्लेषण किया जाए, तो एक भी ऐसी घटना नहीं मिलेगी जब इस देश ने दूसरे देश पर हमला किया हो। प्रधानमंत्री ने कहा, इसी तरह, आपको हमारे इतिहास में एक भी ऐसा उदाहरण नहीं मिलेगा जहां हमने जातीयता या धर्म के आधार पर युद्ध छेडम हो। लिहाजा, सभी धर्मो को स्वीकार करने की प्रकृति हमारे खून में है। यह हमारी सभ्यता है। साथ मिलकर काम करना, सभी धमर्ों को साथ लेकर चलना हमारी व्यवस्था में निहित है।
गौरतलब है कि ओबामा ने कहा था, यदि भारत को सफल होना है तो यह अहम है कि देश धार्मिक आधार पर न बंटने पाए।
भारत, चीन ने इतिहास से सीख ली
मोदी ने कहा है कि भारत और चीन ने अपने सीमा विवाद से निपटने में इतिहास से सीख ली है। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय संबंध एक ऐसे स्तर पर पहुंच गया है जहां वे वाणिज्य एवं व्यापार में प्रतिस्पर्धा करते हुए वैश्विक स्तर पर सहयोग कर सकते हैं। अगले हफ्ते चीन की यात्रा करने से पहले प्रधानमंत्री ने कहा, भारत-चीन सीमा पर कुल मिलाकर शांति और स्थिरता है। यह एक अशांत सीमा नहीं है। करीब 25 साल से भी अधिक समय से एक गोली तक नहीं चली। यह आवश्यक रूप से साबित करता है कि दोनों ही देशों ने इतिहास से सीख ली है।
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