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प्रचंड ने भारत के खिलाफ उगला जहर

प्रचंड ने भारत के खिलाफ उगला जहर

मधेसी आन्दोलन को शांत कराने के लिए लगातार दो दिनों से शांति वार्ता का राग अलापने वाले माओवादी पार्टी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' ने मंगलवार को आन्दोलन के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने भारत पर राजनैतिक और सैन्य हस्तक्षेप कर नेपाल के विभाजन का आरोप लगा डाला।

लाजिम्पाट स्थित अपने आवास पर आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रचंड ने कहा कि मधेसी नेता उपेन्द्र यादव और महंथ ठाकुर को भारत, नेपाल के खिलाफ राजनैतिक मोर्चे के रूप में प्रयोग कर रही है। साथ ही सीके राउत और जय कृष्ण गोइत को सैन्य मोर्चे के रूप में भारत सरकार प्रयोग कर नेपाल को अस्थिर करने की साजिश रच रही है।

प्रचंड ने भारत पर नेपाल की भावनाओं के साथ खेलने का आरोप भी लगाया। इसके लिए उपेन्द्र यादव, महंथ ठाकुर, सीके राउत और जयकृष्ण गोइत को मोहरा के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इस खेल में भारत कुछ भी कर ले लेकिन जीत उनकी ही होगी। भारत पर अघोषित नाकेबंदी का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि मधेस आन्दोल की आड़ में नाकेबंदी कर भारत ने नेपाल का ही नहीं अपना भी बुरा किया है। उसे भी बड़ा घाटा हुआ है।

हालांकि इससे पहले सुनसरी में शनिवार और रविवार को प्रचंड ने शांति वार्ता से मुद्दे के समाधान की बात उठाई थी। उन्होंने संयुक्त लोकतांत्रिक मधेसी मोर्चा पर विश्वास जताते हुए समाधान की उम्मीद जताई थी। इसके तहत वार्ता भी हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकलता देख मंगलवार को उनका सुर बदल गया। इस मुद्दे पर उपेन्द्र यादव ने कहा कि हम शुरू से जानते हैं कि नेपाल सरकार मधेसियों के साथ दोहरी निति अपनाएगी। ऐसा नहीं होता तो दो दिनों तक शांति वार्ता की रट लगाने वाले प्रचंड मंगलवार को मधेसियों के विरुद्ध कड़े शब्द का प्रयोग क्यों करते।

सरकार से बातचीत करेगा मोर्चे का तीन सदस्यीय दल
मधेसी आन्दोलन से बिगड़े नेपाल के हालात को सही करने के लिए संयुक्त लोकतांत्रिक मधेसी मोर्चा और नेपाल सरकार में शामिल तीन प्रमुख दलों से वार्ता के लिए तीन सदस्यीय दल का गठन किया गया। इसके लिए मंगलवार को तराई मधेस लोकतांत्रिक पार्टी के कार्यालय में मोर्चा के घटक दलों की बैठक हुई।

सरकार से वार्ता के लिए तराई मधेस लोकतांत्रिक पार्टी के हृदयेश त्रिपाठी, संघीय समाजवादी फोरम के राजेन्द्र श्रेष्ठ और तमसपा के रामनरेश राय को जिम्मेदारी सौंपी गई। ये नेता नेपाल सरकार में शामिल तीन प्रमुख दल नेपाली कांग्रेस, एमाले और एमाओवादी पार्टी के प्रतिनिधियों से वार्ता करेंगे। संविधान संशोधन सहित 11 बिन्दुओं की मांग पर भी बात आगे बढ़ाएंगे। यही वार्ता नेपाल में मधेसी आन्दोलन की दिशा तय करेगी। इसे गंभीरता से लेते हुए नेपाल सरकार ने भी तीन वरिष्ठ सदस्यों को जिम्मेदारी सौंपी है।  

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