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नोटबंदी को लेकर विदेशी मीडिया भी मुखर

नोटबंदी को लेकर विदेशी मीडिया भी मुखर

कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए लिए गए नोटबंदी के फैसले की चर्चा दूसरे देशों में भी हो रही है। कई देशों के बड़े अखबारों ने इस पर अपनी राय व्यक्त की है।

न्यूयॉर्क टाइम्स
न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि 'भारत में गलत नीतियों से बनता है कालाधन'। जाहिर तौर पर भारत में डिमोनेटाइजेशन (विमुद्रीकरण) भ्रष्टाचार, आतंकवाद के वित्तपोषण और महंगाई को काबू में करने के लिए लागू किया गया था। लेकिन यह बाजार के खराब नियमों के भुगतान और कम समय को ध्यान में रखकर बनाई गई नीति है। वेबसाइट के मुताबिक इसके विफल होने की आशंका है। इसका असर मध्यम और निम्न मध्यम वर्गों के साथ-साथ गरीबों के लिए भी पीड़ादायक है। अमेरिका के पूर्व वित्तमंत्री लारेंस एच समर्स ने भी इस फैसले पर संदेह जताया है। उन्होंने कहा कि यह उपाय भ्रष्टाचार रोकने में भी पूरी तरह सक्षम नहीं है।
 
द गार्डियन डॉट कॉम
गार्डियन ने लिखा है कि भारत में लाइन में लगकर भुगतान के इस जुगाड़ का स्वागत किया जा रहा है। यह आश्चर्यजनक है। जबकि पहले ब्रिटिश उपनिवेश में इसे पहले आओ, पहले पाओ के रूप में देखा जाता था।

फ्री मलेशिया टुडे
फ्री मलेशिया टुडे वेबसाइट के अनुसार, 'मलेशिया से भारत आने वाले पर्यटकों को भी मोदी सरकार के इस कदम से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि मनी चेंजर्स ने नोट बदलना बंद कर दिया है।'
 
सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स

सिंगापुर के स्थानीय अखबार द स्ट्रेट्स टाइम्स के अनुसार, वहां पर काफी लोग पुराने भारतीय नोटों को बदलने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन न तो बैंक और न ही मनी चेंजर पुरानी भारतीय मुद्रा को स्वीकार रहे हैं। अखबार के अनुसार, 'भारत सरकार के इस कदम का असर सिर्फ भारत में ही नहीं अन्य देशों पर भी पड़ेगा।'
 
काठमांडू पोस्ट
नेपाल के अखबार काठमांडू पोस्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंक 'द नेपाल राष्ट्र बैंक' ने भी भारत में बंद किए गए नोटों को नेपाल में बैन कर दिया है। इसका असर नेपाल में कारोबार में बड़े पैमाने पर पड़ रहा है, क्योंकि वहां भारतीय मुद्रा बहुत अधिक प्रचलन में है।
 
द डेमोक्रेटिक वॉयस ऑफ वर्मा
म्यांमार के वेबसाइट 'द डेमोक्रेटिक वॉयस ऑफ बर्मा' के अनुसार म्यांमार के सीमांत कस्बे टामू के व्यापारियों को तो इस कदम से काफी नुकसान सहना पड़ रहा है।
 
बीडी न्यूज 24
बांग्लादेश की वेबसाइट बीडीन्यूज24 डॉटकॉम के अनुसार भारत में हजारों बांग्लादेशी अक्सर इलाज कराने के लिए आते हैं। बांग्लादेश के जैसोर के रहने वाले शेख मुदस्सर अली अपनी किडनी का इलाज कोलकाता से करा रहे हैं। अली के भाई ने वेबसाइट को बताया, 'अस्पताल ने कहा है कि वे केवल 100 रुपये के नोट लेंगे, जबकि मेरे पास 100 के कुछ ही नोट हैं।'

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  • Web Title:black money notbandi foreign media the new york times