फोटो गैलरी

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi Newsनीति आयोग की बैठक में केंद्रीय योजनाओं में कटौती की सिफारिश

नीति आयोग की बैठक में केंद्रीय योजनाओं में कटौती की सिफारिश

नीति आयोग के उप समूह की ओर से केंद्र प्रायोजित योजनाओं की संख्या में भारी कटौती की सिफारिश की गई है। समूह ने 72 योजनाओं में से 36 को खत्म करने की सिफारिश की है जबकि राज्य विशेष योजनाओं के खर्च का भार...

नीति आयोग की बैठक में केंद्रीय योजनाओं में कटौती की सिफारिश
नीति आयोग की बैठक में केंद्रीय योजनाओं में कटौती की सिफारिश
लाइव हिन्दुस्तान टीमSat, 27 Jun 2015 09:13 PM
ऐप पर पढ़ें

नीति आयोग के उप समूह की ओर से केंद्र प्रायोजित योजनाओं की संख्या में भारी कटौती की सिफारिश की गई है। समूह ने 72 योजनाओं में से 36 को खत्म करने की सिफारिश की है जबकि राज्य विशेष योजनाओं के खर्च का भार राज्यों पर लादने की सिफारिश को कड़े विरोध के चलते वापस ले लिया है।

नीति आयोग की उप-समूह के संयोजक मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को बैठक के बाद कहा, योजनाओं की संख्या में कमी और योजनाओं के दो समूह बनाने को लेकर एक व्यापक सहमति बनी है। सिफारिशों को 5 जुलाई तक अंतिम रूप दिया जाएगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अंतिम रिपोर्ट जमा करने से पहले सभी सदस्यों से सहमति मांगी जाएगी।

चौहान ने कहा कि कुछ अन्य सुझाव आए हैं। मैंने नीति आयोग के अधिकारियों की एक समिति बनाई है, जिसकी अगुआई उसके सीईओ कर रहे हैं। यह समिति चर्चा करेगी और पांच जुलाई तक अंतिम मसौदा तैयार करेगी। मसौदे पर सभी मुख्यमंत्रियों की सहमति मांगने के बाद प्रधानमंत्री को सिफारिशें सौंपी जाएंगी।

अंतिम बैठक में उप-समूह ने अपनी कई सिफारिशों में भारी बदलाव करते हुए पिछड़ा क्षेत्र अनुदान, पर्यटन ढांचागत विकास, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन और राजीव गांधी पंचायत सशक्तीकरण समेत 36 योजनाओं को खत्म करने की सिफारिश की है। इनमें योजनाओं के खर्च में राज्यों के अनुपात बढ़ाए जाने की सिफारिश की गई थी। बाद में उत्तर प्रदेश, झारखंड और उत्तर पूर्वी राज्यों के कड़े विरोध के चलते राज्यों के खर्च के अनुपात को बढ़ाए जाने की सिफारिश वापस ले ली। याद रहे कि आठ केंद्रीय योजनाओं पर आयोग के उप-समूह की सिफारिश का दबी जबान से कुछ भाजपा शासित राज्यों ने विरोध किया था। इसके बाद बीच का रास्ता निकालने की जुगत पर उप-समूह चला, पर बात नहीं बनी और सिफारिश वापस लेनी पड़ी।

किन मुद्दों पर हुई चर्चा
अंतिम बैठक में 72 केंद्रीय योजनाओं में से 36 को  फिलहाल खत्म किए जाने पर चर्चा हुई। समूह की ओर से इस पर जोर दिया गया है कि खत्म करके योजनाओं को नए कलेवर में लाया जाना ही उचित होगा। क्योंकि मौजूदा समय चल रही योजनाओं में आधे से ज्यादा का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा है। ऐसे में इन योजनाओं को तकनीकी और प्रायोगिक तौर पर सशक्त करने के बाद ही लाया जाए। कुछ योजनाओं में केंद्र सरकार की ओर से खर्च का अनुपात बढ़ाए जाने पर भी उप-समूह के सदस्यों ने जोर दिया है। अंतिम बैठक के सदस्यों की सिफारिशों पर आधारित एक रिपोर्ट जल्द प्रधानमंत्री को सौंपी जाएगी। इसके बाद प्रधानमंत्री और सहयोगी मंत्रियों की ओर से समीक्षा रिपोर्ट पर निर्णय लिया जाएगा।

केंद्र राज्यों के साथ बनाए नीतियां
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को कहा, विकास की रफ्तार बढ़ाने और सहकारी संघवाद के सिद्धांत पर चलने के लिए यह जरूरी  है कि केंद्र राज्यों के साथ  मिलकर नीतियां बनाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015-16 के केंद्रीय बजट में राज्यों से सहमति लिए बिना ही केंद्र प्रायोजित योजनाओं के पुनर्गठन का जो निर्णय लिया गया उससे राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पडे़गा। अखिलेश ने कहा, 14 वें वित्त आयोग की रिपोर्ट पर केंद्र ने राज्यों के हिस्से को 32 से 42 प्रतिशत  किया है लेकिन वन क्षेत्र को अत्यधिक महत्व दिए जाने के कारण उत्तर प्रदेश को 9000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है।

केंद्र और राज्य की भागीदारी 75:25 हो
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सुझाव दिया है कि केंद्र प्रायोजित प्रमुख योजनाओं के लिए वित्त पोषण में केंद्र और राज्यों की भागीदारी 60 : 40 के बजाय 75:25 अनुपात में रखी जानी चाहिए। साथ ही ऐच्छिक योजनाओं के लिए भागीदारी 50:50 प्रतिशत की जगह 60:40 प्रतिशत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में भौगोलिक आधार पर काफी विविधताएं हैं। ऐसे में राजस्थान जैसे विशिष्ट परिस्थिति वाले राज्यों में योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए विशेष रियायत एवं स्वतंत्रता प्रदान की जानी चाहिए। ंसाथ ही नई योजनाओं और विशेष पैकेज आदि के लिए पृथक वित्तीय प्रावधान रखे जाने चाहिए।