DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

शहीद सौरभ कालिया मामले में पाक के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट जा सकता है भारत

शहीद सौरभ कालिया मामले में पाक के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट जा सकता है भारत

भारत करगिल के शहीद कैप्टन सौरभ कालिया को पाकिस्तान द्वारा दी गई बर्बर यातना के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) का रुख कर सकता है। मामले की असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने इस मामले में अपना रूख बदलने का फैसला किया।

सरकार उच्चतम न्यायालय से उसके रूख की वैधता को घोषित करने का अनुरोध करेगी कि भारत पाकिस्तान के साथ सशस्त्र संघर्ष, शत्रुता आदि से जुड़े विवादों के बारे में आईसीजे के अनिवार्य क्षेत्राधिकार का सहारा नहीं ले सकता क्योंकि वे राष्ट्रमंडल देश हैं।

हालांकि, मामले की असाधारण परिस्थितियों पर गौर करते हुए, यह पूछेगी कि क्या यह आईसीजे जा सकती है।

विदेश मंत्रालय में आधिकारिक प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि करगिल शहीद कैप्टन कालिया के परिवार द्वारा दायर किए गए मुकदमे के मामले में सरकार ने राष्ट्रमंडल के प्रावधानों के तहत पारंपरिक रूख रखा है।

यह रुख, जिसे सरकार ने 26 सितंबर 2013 को हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट किया था, की अब समीक्षा की गई है। सरकार असाधारण परिस्थितियों पर गौर करते हुए उच्चतम न्यायालय से रुख की वैधता पर घोषणा करने का अनुरोध करेगी।
    
प्रवक्ता ने कहा कि ऐसा होने पर, सरकार अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्र होगी।

इस बीच, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उदयपुर में कहा कि सरकार ने इस मुद्दे पर अपने और पिछली सरकारों के रुख की चर्चा और समीक्षा की है।

विदेश मंत्री ने कहा कि यह फैसला किया गया है कि जिस तरह से कैप्टन कालिया को प्रताड़ित किया गया वह अपने आप में असाधारण था इसलिए सरकार उच्चतम न्यायालय में अपना हलफनामा बदलेगी और सवाल करेगी कि क्या कानूनी प्रावधानों के तहत वह आईसीजे का रुख कर सकती है। यदि न्यायालय सहमति देता है तो फिर हम मुद्दे को आईसीजे ले जाएंगे।

कैप्टन कालिया और पांच अन्य सैनिकों को 15 मई 1999 को करगिल के कासकर इलाके में गश्त ड्यूटी के दौरान पाकिस्तानी सैनिकों ने पकड़ लिया था। उन्हें बंधक रखा गया जहां उन्हें प्रताड़ित किया गया और उनके क्षत विक्षत शवों से देश में रोष की लहर दौड़ गई। उनके शव 15 दिन बाद भारत को सौंपे गए।

कैप्टन कालिया के कान के परदे को गर्म सलाखों से छेद डाला गया था, उनकी आंखें फोड़ दी गई थी और उनके शरीर के अंगों को तथा लिंग को काट डाला गया था। उनके अधिकांश दांत और हडि्डयां तोड़ डाली गई थी।

शहीद सैनिक के पिता एनके कालिया ने 2012 में उच्चतम न्यायालय का रुख कर इस मामले में एक अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की थी।
 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Modi govt shuts doors on Kargil martyr Captain Saurabh Kalia, Congress slams stand