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उपग्रह को अंतरिक्ष में छोड़कर वापस लौटने वाले यान का प्रक्षेपण करेगा इसरो

उपग्रह को अंतरिक्ष में छोड़कर वापस लौटने वाले यान का प्रक्षेपण करेगा इसरो

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अंतरिक्ष में एक और छलांग लगाने जा रहा है। इसरो ऐसे उपग्रह प्रक्षेपण यान का परीक्षण करने जा रहा है, जो उपग्रह को अंतरिक्ष में छोड़कर वापस धरती पर लौट आएगा और इसका फिर से इस्तेमाल किया जाएगा। इस परीक्षण के सफल होने के बाद देश में उपग्रह प्रक्षेपण की लागत में भारी कमी आएगी और यह दसवें हिस्से के बराबर रह जाएगी।

इसरो के प्रमुख ए एस किरण कुमार ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि अगले महीने रियूजेबल उपग्रह प्रक्षेपण यान का परीक्षण किया जाएगा। इसके निर्माण का कार्य करीब-करीब पूरा कर लिया गया है। यह प्रक्षेपण वाहन हवाई जहाज जैसा होगा, जो उपग्रह को उसकी कक्षा में छोड़कर वापस लौट आएगा। पहले परीक्षण में इसे समुद्र में उतारने की योजना है। पहली बार यह प्रयोग सफल रहने पर दोबारा इसे हवाई पट्टी पर उतारा जाएगा।

कुमार ने कहा कि यह प्रयोग अभी शुरुआती स्तर पर है। अभी अनेक प्रयोग किए जाने हैं। लेकिन हम पहला परीक्षण जुलाई में करेंगे। यदि हमारा प्रयास सफल रहता है, तो यह बड़ी उपलब्धि होगी। इससे हम प्रक्षेपण की लागत दसवें हिस्से तक लाने में सफल हो जाएंगे। इसरो सूत्रों के अनुसार अभी एक प्रक्षेपण पर कम से कम करीब दो सौ करोड़ रुपये खर्च होते हैं। रियूजेबल प्रक्षेपण यान से यह कीमत 20 करोड़ रह जाएगी। कुमार ने कहा कि प्रक्षेपण यान पहली बार समुद्र में उतरेगा और अंतिम प्रयास इसे श्रीहरिकोटा में एक हवाई पट्टी पर उतारने का होगा। इसके लिए तैयारियां तेजी पर हैं।

इंडियन नेविगेशन सिस्टम-एनडीए सरकार की एक साल की उपलब्धियों का ब्यौरा पेश करने के लिए आयोजन प्रेस कांफ्रेस में पीएमओ के राज्यमंत्री डॉक्टर जितेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत अगले साल इंडियन रीजनल नेविगेशन सेटेलाइट सिस्टम (आईआरएनएसएस) श्रृंखला के दो उपग्रहों का और इससे अगले साल तीन उपग्रहों का प्रक्षेपण करेगा। मंत्री ने कहा कि अंतरिक्ष विभाग ने पिछले एक साल में 11 उपग्रहों का प्रक्षेपण किया है।

एस्ट्रोसेट-कुमार ने कहा कि एस्ट्रोसेट उपग्रह के प्रक्षेपण में इसलिए देरी हुई क्योंकि एक पेलोड के एक घटक को लेकर एक समस्या थी। अब उपग्रह पूरी तरह से लैस है और पर्यावरण परीक्षण में पूरी तरह प्रगति है तथा इसका प्रक्षेपण इस साल सितंबर में किया जाएगा। चंद्रयान-2- कुमार ने कहा कि चंद्र मिशन के दूसरे उपग्रह चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण के लिए तीन साल और लगेंगे। मंगल मिशन के बारे में बात करते हुए उन्होंने मिशन से प्राप्त तस्वीरों के बारे में बताया।

विदेशों से समझौते-उन्होंने कहा कि हमारा नासा के साथ कामकाजी समझौता है। हम फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी सीएनईएस के साथ भी चर्चा कर रहे हैं। हाल ही में हमने यूएई के साथ चर्चा की थी। वह 2020 तक मंगल मिशन चाहता है और इसलिये वह हमारे अनुभवों का उपयोग करना चाहता है।

 

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  • Web Title:India to test reusable launch vehicle next month, ISRO