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गंगा की जमीन पर कब्जा कराने वाले सरकारी कर्मचारी अब जाएंगे जेल

गंगा की जमीन पर कब्जा कराने वाले सरकारी कर्मचारी अब जाएंगे जेल

गंगा नदी की अविरलता एवं निर्मलता के लिये मोदी सरकार की नमामि गंगे परियोजना के तहत अब इस राष्ट्रीय नदी के किनारे अवैध रूप से कब्जाई गयी हजारों हेक्टेअर ज़मीन को वापस लेने का अभियान शुरू हो गया है और कब्जाधारियों की मदद करने वाले सरकारी कर्मियों को गैंगस्टर एक्ट में गिरफ्तार करके जेल भी भेजा गया है।

उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार गंगा की ज़मीन वापस लेने का अभियान उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फ़रनगर जिले से शुरू किया गया है। इस अभियान में तहसील जानसठ के ग्राम रामराज एवं अन्य आस पास के गाँवों में वन विभाग के अधीन हस्तिनापुर वन्य जीव विहार के अंतर्गत आने वाली 44०1 हेक्टेअर ज़मीन को कब्ज़े से मुक्त करा लिया गया और लगभग 16०० हेक्टेअर भूमि को मुक्त कराने की कार्यवाही चल रही है।

नमामि गंगे मिशन के तहत अवैध कब्ज़े से छुड़ाई गयी इस भूमि पर वृक्षारोपण शुरू किया गया है। बीते सप्ताह केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने जानसठ में रामराज के समीप मजाहिदपुर अहतमाली, धरमपुरा कदीम जाकर इस ज़मीन पर वृक्षारोपण अभियान की शुरूआत की। यहाँ करीब 13 हज़ार वृक्ष लगाये जा रहे हैं। इस मौके पर स्थानीय सांसद एवं केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री संजीव बालियान भी मौजूद थे जिनका गंगा की भूमि को अवैध कब्ज़े से मुक्त कराने में योगदान रहा।

सूत्रों के अनुसार ज़मीनों से कब्ज़ा छुड़ाने का यह अभियान पिछले वर्ष ही शुरू हुआ है। स्थानीय प्रशासन ने भूमि खातों की पड़ताल कर पाया कि करीब तीन चार दशक पहले गंगा के नाम पर दर्ज सरकारी ज़मीन को स्थानीय राजनीतिज्ञों और प्रभावशाली लोगों ने लेखपाल एवं पटवारी से मिलकर अपने और अपनों के नाम करा ली और फिर सिलसिला शुरू हुआ, इसे बेचकर धन कमाने का। जिन लोगों ने ऐसी जमीनें ख़रीदीं, उनमें से कइयों ने आगे बेच दीं और बहुत से लोगों ने अवैध रूप से खेती शुरू कर दी।

स्थानीय प्रशासन ने इसके बाद कार्रवाई शुरू की। पाँच थाना क्षेत्रों जानसठ, रामराज, भोपा, ककरौली और नई मण्डी के अंतर्गत 68 गाँवों की करीब छह हज़ार हेक्टेअर ज़मीन के अवैध कब्ज़े में होने की बात पता चली। जब प्रशासन ने आगे जाँच की तो उन पटवारियों एवं लेखपालों के नाम भी खुले जिन्होंने अवैध कब्ज़ों में मदद की। प्रशासन ने ज़मीन पर कब्ज़ा लेना शुरू किया तो अधिकारियों को राजनीतिक दबाव का भी सामना करना पड़ा लेकिन प्रशासन के अडिग रुख के कारण दोषी लेखपालों एवं पटवारियों को गिरफ्तार भी किया गया।

प्रशासन के ताज़ा रिकार्ड के अनुसार वर्तमान में कुल 3० मुकदमें पंजीकृत हैं और उनमें कुल 175 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है। इनमें से 33 लोग गिरफ्तार किये गये हैं जिनमें पटवारी एवं लेखपाल और उनके परिजन भी शामिल हैं। अन्य 31 अभियुक्तों ने आत्मसमर्पण किया है जबकि 1०1 लोग फरार हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी नौकरों पर गैंगस्टर एक्ट लगाया गया है।  मुज़फ्फ़रनगर जिले में कितनी तेज़ी से यह काम चल रहा है, इसका पता इस बात से भी चलता है कि 23 मामलों में आरोपपत्र दाखिल हो चुका है और बाकी में भी तेज़ी से काम हो रहा है। सूत्रों के अनुसार कुछ और मुकदमे कायम होने की संभावना है।

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  • Web Title:Ganga occupied land to government employees not well now