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तोमर से पुलिस ने पूछा, बताओ किस रैकेट से हासिल की डिग्री?

तोमर से पुलिस ने पूछा, बताओ किस रैकेट से हासिल की डिग्री?

फर्जी डिग्री मामले में गिरफ्तार कर फैजाबाद लाए गए दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर के साथ दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को भी साकेत महाविद्यालय में अभिलेखों की गहन छानबीन व पूछताछ की। दिल्ली पुलिस ने तोमर की बीएससी मार्कशीट का महाविद्यालय के अभिलेखों से मिलान किया, लेकिन जितेंद्र सिंह तोमर के नाम का कोई अभिलेख नहीं मिला।

सूत्रों के अनुसार दिल्ली के एसीपी ने तोमर से यह जानने का प्रयास कि वह यह बता दें कि उन्हें किस रैकेट ने बीएससी की मार्कशीट उपलब्ध कराई, लेकिन तोमर अपनी डिग्री को फर्जी मानने को ही तैयार नहीं थे। करीब तीन घंटे महाविद्यालय में रहने के बाद दिल्ली पुलिस दोपहर करीब पौने तीन बजे महाविद्यालय से रवाना हो गई।

बुधवार को भी दिल्ली पुलिस ने साकेत महाविद्यालय में शाम पांच बजे से रात करीब 11 बजे तक प्राचार्य डॉ.एसएन दूबे व चीफ प्रॉक्टर एसपी सिंह की मौजूदगी में वर्ष 1987-88 के प्रवेश संबंधी रिकार्ड, प्रवेश फार्म, परीक्षा सूची, परीक्षा के दौरान के सभी रिकार्ड देखे थे, लेकिन कहीं भी जितेंद्र सिंह तोमर के नाम की बीएससी डिग्री संबंधी रिकार्ड नहीं मिले। डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में भी तोमर की डिग्री से संबंधित कोई भी साक्ष्य विश्वविद्यालय के अभिलेखों में नहीं मिल पाया था। 

वहीं, आप नेता जितेंद्र सिंह तोमर को झटका देते हुए दिल्ली की एक अदालत ने पुलिस रिमांड के खिलाफ उनकी याचिका को आज खारिज कर दिया। अदालत ने कथित फर्जी डिग्री मामले में आप नेता को राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें अंतरिम राहत प्रदान करने से मामला और जटिल हो जायेगा।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजीव जैन ने दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री तोमर की अंतरिम जमानत की याचिका को स्वीकार करने से तब तक के लिए इंकार किया जब तक कि उनकी नियमित याचिका पर सुनवाई नहीं होती है। उनकी नियमित जमानत की याचिका पर 16 जून को सुनवाई होगी।

अदालत ने कहा कि अंतरिम जमानत का आदेश देने से मामला और जटिल हो जायेगा और यह न तो उपयुक्त और न ही आवश्यक है। इस मामले में तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए रिकार्ड को देखने के बाद व्यवहारिक ढंग से विचार करने की जरूरत है। अदालत के अनुसार, यह सभी पक्षों के हित में है कि जमानत याचिका पर निर्णय पुलिस रिमांड की अवधि समाप्त होने पर रिकार्ड पर विचार करने के बाद किया जाए। जमानत की याचिका उपयुक्त अधिकार क्षेत्र वाली अदालत में 16 जून को पेश करें।

अदालत ने इस मामले के जांच अधिकारी (आईओ) को अगली सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया। अदालत ने तोमर की ओर से दायर उस समीक्षा याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें नौ जून को मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट द्वारा उन्हें चार दिन की पुलिस रिमांड में भेजने के आदेश को चुनौती दी गई थी।

बहरहाल, अदालत ने कहा कि तोमर अपनी पुलिस हिरासत के खिलाफ नये सिरे से याचिका दायर करने के लिए स्वतंत्र हैं। कल सत्र अदालत के समक्ष दायर याचिका में इस मामले में अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए तोमर ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन कर उन्हें गिरफ्तार किया था।

उल्लेखनीय है कि 49 वर्षीय तोमर को दिल्ली पुलिस ने दिल्ली बार काउंसिल की शिकायत के आधार पर दर्ज एफआईआर के तहत नौ जून को गिरफ्तार किसा था, जिसमें अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराने के लिए शैक्षणिक डिग्री समेत कथित फर्जी दस्तावेज पेश करने की बात कही गई थी। मजिस्ट्रेट की अदालत ने तोमर को 13 जून तक चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया था।

पुलिस ने उनकी डिग्री को फर्जी बताते हुए पांच दिन की पुलिस हिरासत मांगी थी क्योंकि शैक्षणिक योग्यता की पुष्टि के लिए उन्हें उत्तर प्रदेश के फैजाबाद और बिहार के भागलपुर ले जाने की जरूरत थी। आईओ ने अदालत को बताया था कि दिल्ली बार काउंसिल की शिकायत के आधार पर एक प्रारंभिक जांच की गई और संबंधित विश्वविद्यालयों से रिपोर्ट मिलने के बाद एफआईआर दर्ज की गई।

दूसरी ओर, तोमर की ओर से उपस्थित होने वाले वकील ने दलील दी कि पुलिस ने उन्हें कानून के प्रावधानों का अनुपालन किये बिना गिरफ्तार किया और सीआरपीसी की धारा 160 के तहत उन्हें गिरफ्तार करने से पूर्व नोटिस जारी नहीं किया गया।

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  • Web Title:Delhi ex-law minister Tomar lost for words in Faizabad, acts confused when asked about his college