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VIDEO : जब थरुर ने अंग्रेजों का बैंड बजाया, वीडियो हुआ वायरल

VIDEO : जब थरुर ने अंग्रेजों का बैंड बजाया, वीडियो हुआ वायरल

सांसद और कांग्रेस नेता शशि थरूर का ऑक्सफॉर्ड यूनियन सोसायटी में दिए गए भाषण का वीडियो वायरल हो रहा है। अपने तर्कों से वे भारत में ब्रिटिश राज की धज्जियां उड़ाने सुने जा रहे हैं। हालांकि ये भाषण नया नहीं है लेकिन इसमें थरूर द्वारा ब्रिटेन साम्राज्य के खिलाफ दिए गए तर्कों को लोग खूब पसंद कर रहे हैं। 14 जुलाई को अपलोड इस वीडियो को 1 लाख 20 हजार से ज्यादा लेख देख और साझा कर चुके हैं।

नुकसान की भरपाई करे
अपने भाषण में थरूर ने कहा कि ब्रिटेन को अपने 200 साल के राज से भारत को पहुंचाए गए नुकसान को पहले स्वीकार करना चाहिए, उसके लिए दुख जताना चाहिए और फिर उसकी भरपाई करनी चाहिए। औपनिवेशिक शासन की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा। थरूर कहते हैं कि एक तरफ ब्रिटेन में औद्योगिक क्रांति हो रही थी वहीं भारत में उद्योगों को बरबाद करने की कोशिश की जा रही थी।

बुनकर बने भिखारी
उदाहरण के तौर पर भारत का हैंडलूम उद्योग जो पूरी दुनिया में अपने बेमिसाल कपड़े के लिए जाना जाता था लेकिन अंग्रेजों के राज में देश के बुनकरों की हालत भिखारियों जैसी हो गई। उनके करघों की बरबाद करने के लिए उनके ऊपर टैक्स लगा दिए गए। दुनिया भर में बेहतरीन गुणवत्ता के कपड़े भेजा करता था भारत। पर अब अब वहां से कच्चा माल मंगाया जाने लगा और तैयार माल भेजा जाने लगा। बुनकर भिखारी बन गए और भारत बड़ा आयातक देश बन गया। कभी भारत हिस्सेदारी विश्व व्यापार में 27 फीसदी थी जो घटकर 2 फीसदी हो गई।

रॉबर्ट क्लाइव की लूट
रॉबर्ट क्लाइव ने तो भारत में 'लूट नीति' चलाई। पर ब्रिटेन के लिए भारत 'क्लाइव का इंडिया' बन गया था। 19वीं सदी की शुरुआत में भारत ब्रिटेन के लिए बड़ी दूध देने वाली गाय थी। भारत आने वाले ब्रिटिश अधिकारियों को भारत के ही धन से उच्च वेतनमान दिया जाता था।

अभी तक गांधी क्यों नहीं मरा
ब्रिटिश राज में तीन करोड़ के करीब लोग भारत में भूख से मारे गए। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान चर्चिल की गलत नीतियों के कारण अकेले बंगाल में 40 लाख से ज्यादा लोग भूख से मारे गए। इस मामले में जब विंस्टन चर्चिल को भारत के अधिकारियों ने इस ओर ध्यान दिलाया तो उन्होंने फाइल के कोने में नोट लिखा- अभी तक गांधी क्यों नहीं मरा।

हिंसा और नस्लभेद के लिए जिम्मेवार
हिंसा और नस्लभेद ब्रिटिश उपनिवेशवाद में शासन करने के लिए अनिवार्य हिस्से थे। तब ये कहावत मशहूर थी कि ब्रिटिश सम्राज्य में सूरज का कभी अस्त नहीं होता। पर मैं कहना चाहूंगा कि तब ईश्वर को भी अंधेरे से डर लगता था। आज भारत में नस्ल और धर्म के नाम पर जो समस्याएं खड़ी होती हैं उसके लिए कहीं ब्रिटिश राज के दौरान अपनाई गई नीतियां जिम्मेवार हैं।

विश्व युद्ध का ब्रिटेन पर कर्ज
दूसरे विश्व युद्ध में ब्रिटेन की ओर लड़ने वाले कुल फौज का छठा हिस्सा भारतीय फौजी थे। 54 हजार भारतीय फौजियों ने उस युद्ध में बलिदान दिया। 65 हजार फौजी घायल हुए जबकि 4 हजार लापता हो गए। 100 मिलियन पाऊंड की राशि टैक्स उस दौर में भारतीय लोग दे रहे थे। हालांकि भारत तब बड़ी मंदी से गुजर रहा था लेकिन युद्ध में उसका योगदान 8 बिलियन पाउंड का रहा था। युद्ध के दौरान भारत से ली गई 1.25 बिलियन पाउंड की राशि आजतक भारत को नहीं दी गई।

ब्रिटिश निवेशकों के लिए रेलवे
रेलवे और सड़कें देश में ब्रिटिश लोगों के हित में बनाई गईं न कि स्थानीय लोगों के लिए। यहां तक की रेल नेटवर्क के उपनिवेश की कंपनियों की मांग के लिए कच्चे माल की सप्लाई करने से इनकार कर दिया गया। भारत में रेल का विकास सिर्फ ब्रिटिश निवेशकों के हितों में ध्यान में रखते हुए किया गया। भारत में रेलों के विकास में दूसरे देशों की तुलना में दुगुना खर्च किया गया और इसमें भी ब्रिटेन ने बड़ी कमाई की।

सहायता का सच
ब्रिटेन से मिलने वाली आर्थिक सहायता की बात करें तो ब्रिटेन से मिलने वाली सहायता तब की जीडीपी का 0.4 फीसदी मात्र था। आप ये कहते हो कि हमारे कारण भारत में लोकतंत्र और कानून का शासन आया। मैं पूछता हूं कि आपने दो सौ साल तक लोगों मारा, यातनाएं दी, शोषण किया, भूख का शिकार बनाया और अंत में कहते हो कि हमारे कारण लोकतंत्र आया। हम इस तर्क को बिल्कुल नकारते हैं।

खूब बजी तालियां
अपने पूरे भाषण के दौरान थरूर ने भारत में ब्रिटिश राज पर कई तरह की चुटकियां लेते हुए और तंज कसते हुए हॉल में बैठे अलग-अलग देशों के लोगों की खूब तालियां बटोरीं।

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  • Web Title:3 reasons why Shashi Tharoor's speech at Oxford is a must watch