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अब फेसबुक से लगेगी साइबर क्राइम पर लगाम

अब फेसबुक से लगेगी साइबर क्राइम पर लगाम

साइबर क्राइम की चुनौतियों से निपटने के लिए भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक पुख्ता तंत्र बनाने की कोशिश में जुटा है। वह इस मुद्दे से जुड़े संयुक्त राष्ट्र समझौते को प्रभावी तरीके से लागू किए जाने के पक्ष में है। वह गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियों की मदद लेने का प्रयास भी शुरू कर चुका है।

पारस्परिक संधि में अलग
साइबर क्राइम करीब 50 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। ऐसे में गृह मंत्रालय का स्पष्ट मानना है कि साइबर क्राइम पर नकेल कसने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी है। इस क्रम में भारत विभिन्न देशों के साथ पारस्परिक कानूनी सहायता संधि (म्युचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी, या एमलैट) में साइबर क्राइम का एक अलग अध्याय जोड़ने की कवायद करेगा। गृह मंत्रालय को हाल में सौंपी गई एक रिपोर्ट में इस तरह की सिफारिशें की गई हैं। यह रिपोर्ट गुलशन राय की अध्यक्षता वाले विशेषज्ञ समूह ने तैयार की है।

अमेरिका से विशेष उम्मीद
साइबर क्राइम को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई कवायद के संदर्भ में भारत की कोशिश खासतौर पर अमेरिका को भरोसे में लेने की है। दरअसल अधिकतर कंपनियों के सर्वर अमेरिका में हैं या अमेरिकी कंपनियों के स्वामित्व में हैं। उसकी कोशिश है कि अमेरिका सहित अन्य देशों के सहयोग से साइबर क्राइम पर संयुक्त राष्ट्र समझौते को प्रभावी तरीके से लागू करवाया जाए। साथ ही पारस्परिक संधियों में इस अहम मुद्दे को अलग से जगह दी जाए।

गूगल-फेसबुक का सहयोग

भारत की ओर से गूगल व फेसबुक जैसी कंपनियों का भरोसा जीतने की भी मुहिम शुरू की गई है। व्यापक पहुंच को देखते हुए साइबर क्राइम रोकने में इनका सहयोग खासा महत्वपूर्ण होगा। इसके लिए संबंधित देशों व कंपनियों से बात की जाएगी।

अंतराष्ट्रीय सहयोग से हैकरों को मिलेगी मात

साइबर क्राइम अकेले भारत की समस्या नहीं है, बल्कि इसका शिकार अमेरिका, रूस और चीन जैसे दुनिया के ताकतवार देश भी हैं। चूंकि किसी देश पर साइबर हमला प्राय: उसकी सीमा से बाहर से किया जाता है इसलिए अपराधियों को कानून के कटघरे में खड़ा करना आसान नहीं होता। साथ ही हैकर उन्नत तकनीक से लैस होते हैं। ऐसे में अंतराष्ट्रीय सहयोग विशेष रूप से कारगर हो सकता है। 

बढ़ती ताकत के साथ बढ़े हमले
27,605 साइटों पर वर्ष 2012 में हमले किए गए
28,481 वेबसाइटों को 2013 में हैक किया गया
9,057  वेबसाइटें इस साल मई तक हो चुकी थीं शिकार
32,323 साइट वर्ष 2014 में हैकरों के शिकार बने 

क्यों पड़ी जरूरत
सितंबर 2014 में हैकरों ने अतिसंवेदनशील नार्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक के कंप्यूटरों में सेंध लगाया
अधिकतर हमले चीन, पाकिस्तान व अफ्रीकी देशों से होते हैं, सबूतों के अभाव में कार्रवाई नहीं
सरकार भी शिकार
371 सरकारी साइटें (gov.in AüSX nic.in डोमेन) वर्ष 2012 में हैक हुईं
189 और 155 सरकारी साइटें क्रमश: 2013 और 2014 में शिकार बनीं

अपनाए गए उपाय
- मार्च 2015 में केंद्र सरकार ने कार्यालयी कामकाज में निजी कंपनियों का ईमेल इस्तेमाल करने से मना किया।
- कर्मचारियों को नेशनल इन्फॉर्मेशन सेंटर द्वारा तैयार ईमेल इस्तेमाल करने का निर्देश दिया।
- सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा डाटाबेस बना चुकी है, जिसमें शामिल विशेषज्ञ साइबर हमले होने पर सरकार की मदद करेंगे

सुरक्षा पर बढ़ा खर्च
36.02 करोड़ रुपए का प्रावधान सरकार ने वर्ष 2012-13 के लिए साइबर सुरक्षा के लिए किया था.
58 करोड़ रुपए साइबर सुरक्षा पर चालू वित्त वर्ष में खर्च करने की योजना, बीते साल यह राशि 62 करोड़ थी

बॉस का विकास

सरकार जल्द ही अपने कंप्यूटरों को संचालित करने के लिए इस्तेमाल हो रहे माइक्रोसाफ्ट के ऑपरेटिंग सिस्टम विंडो को अलविदा कह सकती है। इसके स्थान पर देश में विकसित भारत ऑपरेटिंग सिस्टम सॉल्यूशन (बॉस) का इस्तेमाल होगा। पिछले तीन महीने से इसके उन्नत संस्करण का परीक्षण किया जारी है।

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