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‘मोदी मैजिक’ पर मुग्ध मुस्लिम छात्रा कर रही मोदी पर शोध

‘मोदी मैजिक’ पर मुग्ध मुस्लिम छात्रा कर रही मोदी पर शोध

भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में पहली बार किसी गैर कांग्रेसी दल ने अपने बूते लोकसभा में बहुमत हासिल किया। यह करिश्मा यूं ही नहीं था। इसकी सबसे अहम धुरी थे गुजरात के तत्कालीन मुख्य मंत्री नरेंद्र मोदी। उनके इस करिश्माई नेतृत्व ने बीएचयू से कन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट में एमए कर चुकी छात्रा नजमा परवीन को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने मोदी पर शोध करने का फैसला कर लिया।

नजमा का फैसला आनन फानन नहीं है। उन्होंने 2014 के आम चुनाव के दौरान मोदी की हर रैली को न्यूज चैनलों पर काफी बारीकी से देखा। गुजरात के सीएम के रूप में उनके नेतृत्व पर चली बहसें देखीं और पढ़ीं। मोदी पर लिखी गयी किताबों से भी प्रेरणा मिली है। नजमा को मोदी में कई खूबियां दिखाई दीं। चाहे वह लोगों से मन की बात करना हो या सांसदों को एक गांव गोद लेकर उसका विकास करने को कहना। नजमा के शोध का विषय ही

कठिनाई से पूरी हुई है शिक्षा
लल्लापुरा के बुनकर दंपती मोहम्मद वसी और जहीरा बानो की तीन संतानों में दूसरे नंबर की नजमा की पढ़ाई काफी कठिनाई से हुई। क्षेत्र के फरो निस्वां स्कूल से इंटर तक पढ़ाई की। आठवीं तक पिता ने पढ़ाया फिर विशाल भारत संस्थान के संपर्क में आयी। संस्था के संस्थापक डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने आगे की पढ़ाई में मदद की। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से बीए करने के बाद बीएचयू से एमए की डिग्री ली।

दो काल में होगा शोध
नजमा ने शोध के लिए दो काल तय किये हैं। मोदी के राजनीतिक उदय से पहले की राजनीति और मोदी के राष्ट्रीय राजनीति में आने के बाद का काल। आजादी के आंदोलन में शामिल राजनेताओं की पृष्ठभूमि को समेटते हुए मोदी के सम्पूर्ण व्यक्तित्व का आकलन होगा।

शोध के सात प्रमुख अध्याय
- 1947 से 2014 तक की राजनीतिक पृष्ठभूमि
- नरेंद्र मोदी का जीवन परिचय एवं सामाजिक कार्य
- मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी का कार्यकाल
- मोदी का राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश एवं मीडिया द्वारा नकारात्मक प्रचार
- 2014 का आम चुनाव
- मोदी का करिश्माई नेतृत्व एवं महाविजय
- उपसंहार

लंबी बहस के बाद शोध को स्वीकृति
नजमा के शोध निदेशक बीएचयू के राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. कौशल किशोर मिश्र बताते हैं कि शोध के विषय पर सहमति नहीं बन पा रही थी। विषय स्वीकृत करने वाली समिति में इसपर गहन विचार विमर्श हुआ। अंतत: सभी ने काफी सोच विचार के बाद इसे स्वीकृति दी।

यह भी सुगबुगाहट
बीएचयू के एक तबके में यह भी सुगबुगाहट है कि नजमा का यह शोध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कतिपय नेताओं के दबाव में कराया जा रहा है। संघ नेता मोदी को महानायक के रूप में प्रस्तुत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इसी की एक कड़ी यह शोध भी है।

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