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पटना की मोनिका दास देश की पहली ट्रांसजेंडर बैंकर

पटना की मोनिका दास देश की पहली ट्रांसजेंडर बैंकर

राजधानी की मोनिका दास देश की पहली ट्रांसजेंडर बैंकर बन गईं हैं। 24 वर्षीय मोनिका हनुमान नगर स्थित सिंडिकेट बैंक में क्लर्क हैं। पिछले साल अक्टूबर में उसने बैंक ज्वाइन किया था। 3 जून को उसने ट्रांसजेंडर होने का कानूनी मान्यता का पत्र बैंक को सौंप दिया है। बैंक ने भी मोनिका के इस कदम की सराहना की है। शाखा प्रबंधक पीकेएस चौधरी ने कहा कि मोनिका क्लर्क के रूप में बहुत अच्छा काम कर रही हैं। हम उन्हें प्रोत्साहित करेंगे।

एलएलबी तक हुई है पढ़ाई
मोनिका ने स्कूली शिक्षा नवोदय विद्यालय से जबकि स्नातक स्तर की पढ़ाई पटना विश्वविद्यालय से की है। उसने पटना लॉ कॉलेज से एलएलबी की डिग्री भी ली है। उसके पिता भगवान ढोली सेल्स टैक्स ऑफिसर थे जबकि मां अनिमा रानी भौमिक बीएसएनएल से रिटायर्ड कर्मचारी हैं। समाज के तानों से तंग आकर पिता ने गोपाल नाम रख दिया

मोनिका बताती हैं जब वह तीन साल की थी तो उसके ट्रांसजेंडर होने की बात आस पड़ोस को हुई। लोग हंसी उड़ाने लगे। जब थोड़ी बड़ी हुई तो कोई दोस्ती नहीं करता था। मोनिका के दर्द को देखकर पिता ने उसका नाम गोपाल रख दिया।

स्कूल में सबसे अलग रहती थी
मोनिका बताती हैं उनका व्यक्तित्व सबकुछ लड़कियों जैसा था। उसका मन लड़कियों की तरह रहने को करता था। वह दिखने में सुंदर थी, हालांकि चाल-ढाल और बोलचाल लड़कों जैसा था। वह स्कूल में सबसे अलग रहती थी। ताने सुनने को मिलते थे, फिर भी  अपना ध्यान सिर्फ पढ़ाई में लगाए रखा। पिता ने समाज के ताने और हंसी का पात्र बनाने से बचाने के लिए नवोदय विद्यालय बिक्रम में नामांकन करवा दिया गया। बारहवीं तक की पढ़ाई वहीं से की। 

भाई कहते हैं तुम्हारे कारण जग हंसाई हुई
मोनिका के चार भाई हैं। दो बैंक में हैं और दो प्राइवेट जॉब करते हैं। मोनिका बताती हैं कि  उसके ट्रांसजेंडर होने की बात से उनके भाई काफी नाराज रहते हैं। यहां तक कि वे लोग उससे बात भी नहीं करते। मोनिका कंकड़बाग स्थित टेंपू स्टैंड के पास रहती है।

सुप्रीम कोर्ट ने तीसरे जेंडर के रूप में दी थी मान्यता
अप्रैल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने पुरुष और महिला के अलावा ट्रांसजेंडर को तीसरे लिंग के रूप में मान्यता दी थी। अदालत ने कहा था कि ये भी भारत के नागरिक हैं और उन्हें भी संविधान से हर अधिकार प्राप्त होने चाहिए। अदालत ने ट्रांसजेंडरों की तीसरे लिंग के रूप में पहचान को मानवाधिकार का मामला बताया था। इस आदेश के बाद ट्रांसजेंडर को सभी तरह के पहचान पत्र जैसे जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, राशन कार्ड, ड्रार्इंवग लाइसेंस आदि से तीसरे जेंडर की मान्यता मिल सकेगी।

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