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अब स्वीडन पढ़ने जाएंगे बिहारी छात्र

अब स्वीडन पढ़ने जाएंगे बिहारी छात्र

अब तक देखा गया है कि बिहार या देश के छात्र बड़ी संख्या में यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में जाकर पढ़ाई करते हैं। लेकिन अब बिहार के छात्र यूरोपीय देश स्वीडन जाएंगे और वहां के भी छात्र यहां पढ़ने आएंगे। यही नहीं शिक्षकों का भी आदान-प्रदान होगा।

एएन कॉलेज और स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में स्थित ‘रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ के बीच ‘लिन्नेस-पामे फैकल्टी एंड स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम’ पर समझौता हुआ है। इस पर आने वाला सारा खर्च स्वीडन सरकार वहन करेगी। स्वीडन सरकार यह प्रोग्राम पूर्व प्रधानमंत्री स्व. ओलोफ पामे के नाम पर चलाती है। दोनों संस्थाओं के बीच सात साल का करार हुआ है।

‘पर्यावरण व वाटर मैनेजमेंट’ के लिए समझौता
यह समझौता एएन कॉलेज के एनवायरमेंट एंड वॉटर मैनेजमेंट और रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के लैंड एंड वाटर विभाग के बीच हुआ है। दोनों संस्थानों का सिलेबस लगभग बराबर है। दोनों के छात्र तीन से छह माह के लिए एक -दूसरे के यहां पढ़ने जाएंगे।

वहीं शिक्षक तीन सप्ताह के लिए एक-दूसरे के यहां पढ़ाने जाएंगे। प्रोग्राम के एएन कॉलेज के कोआर्डिनेटर डॉ अशोक घोष ने बताया कि सितंबर में दोनों संस्थानों के कोऑर्डिनेटर बैठक करेंगे। इसमें पूरी योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. ललन सिंह ने बताया कि कॉलेज के लिए यह गौरव की बात है।

केटीएच की विश्व र्रैंकिंग 110
रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (केटीएच) स्वीडन का सबसे पुराना और सबसे बड़ा तकनीकी विश्वविद्यालय है। इसकी स्थापना 1827 में हुई थी। वर्तमान में इसकी विश्व रैकिंग 110 है, जबकि यूरोपियन रैकिंग 10 है।

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