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6 अप्रैल, 2020|7:34|IST

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सदी के अंत तक आसमान से होगी आग की बारिश

सदी के अंत तक आसमान से होगी आग की बारिश

ग्लोबल वार्मिंग की वजह से हुए जलवायु परिवर्तन एवं उसके नकारात्मक नतीजों को हम बेमौसम बारिश और सर्दी के मौसम में भी बेतहाशा गर्मी के रूप में देख रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद भी नहीं चेते, तो आने वाले वर्ष भयावह हो सकते हैं। विश्व पृथ्वी दिवस के मौके पर 'अर्थ लीग' की ओर से जारी बयान में दावा किया गया है कि इस सदी के अंत तक वैश्विक तापमान में छह डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है। यह पूर्व के दो डिग्री के अनुमानों से करीब तीन गुना अधिक है।

भयावह होगी स्थिति
- 10 हजार विमान गर्मी की वजह से होंगे रोजाना दुघर्टनाग्रस्त 
- 10 फीसदी विमानों के हादसे होने की आशंका हमेशा बनी रहेगी
- 50 डिग्री सेल्सियस से अधिक तपमान दर्ज होगा भारत के अधिकतर शहरों का
- अत्यधिक गर्मी की वजह से तमाम बीमारियां धारण कर सकती हैं माहामारी का रूप
- समुद्र का जलस्तर बढ़ेगा, कई देशों के समुद्र में समाने की आशंका

आकलन का आधार
- 17 देशों के प्रमुख पर्यावरण वैज्ञानिकों ने इस आकलन के लिए पर्यावरण में छोड़े जा रहे कार्बन उत्सजर्न को बनाया है पैमाना
- तेजी से काटे जारे जंगलों, घास के मैदानों को साफ करने एवं अन्य मानवीय गतिविधियों को भी अध्ययन में शामिल किया गया 

चिंताजनक स्थिति
- 01 खरब टन कार्बन उत्सजर्न की आगामी सीमा अगले 25 साल में खत्म होने आशंका की है
- इस सीमा से अगर अधिक कार्बन उत्सजर्न हुआ, तो पृथ्वी के तापमान को बढ़ने से रोकना मुश्किल

उम्मीदें बाकी
- 30 नवंबर से 11 दिसंबर 2015 तक फ्रांस की राजधानी पेरिस में इससे निपटने के लिए जुटेंगे विश्व के नेता
- 2014 में अमेरिका और चीन ने एक समझौता किया जिसके तहत बीजिंग 2030 तक उत्सजर्न सीमित करेगा

इन उपायों से बचेगी धरती
- 02 डिग्री सेल्सियस से अधिक वैश्विक तापमान किसी भी हाल में न बढ़े इसका उपाय किया जाए 
- 193 देश सदी के मध्य तक कार्बन के निपटारे की कार्ययोजना तैयार कर उनपर अमल करें
- 100 फीसदी स्वच्छ ऊर्जा अपनाया जाए, इससे जुड़ी तकनीकों को सभी मुल्कों को मुहैया कराया जाए
- 135 अरब डॉलर का बजट दुनिया की सरकारों को जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए रखना होगा

भारत बन सकता है मार्गदर्शक: मोदी
पृथ्वी दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि भारत विश्व को जलवायु परिवर्तन से निबटने के रास्ते दिखा सकता है, क्योंकि पर्यावरण की देखभाल करना देश की मान्यताओं का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, पृथ्वी दिवस हमारे ग्रह को स्वच्छ, हरित रखने तथा स्थायी विकास पर ध्यान केंद्रित करने की हमारी कटिबद्धता को दोहराने का सवरेत्तम अवसर है। हमारा नाता ऐसी संस्कृति से है, जो इस मंत्र में विश्वास करती है कि धरती हमारी मां है। हम उसकी संतानें हैं। मोदी ने कहा, पर्यावरण की देखभाल करना हमारी मान्यताओं का अभिन्न अंग है। भारत जलवायु परिवर्तन से निबटने के लिए सही मायनों में विश्व को रास्ता दिखा सकता है।

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  • Web Title:सदी के अंत तक आसमान से होगी आग की बारिश