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खेलों के पीछे अरबों का ‘खेल’

खेलों के पीछे अरबों का ‘खेल’

फुटबॉल को कंट्रोल करने वाली संस्था फीफा का लगभग 956 करोड़ रुपये का घोटाला दुनिया के सामने आ चुका है। इसके सात अधिकारी सलाखों के पीछे हैं। इस घोटाले के बावजूद सैप ब्लैटर को पांचवीं बार फीफा का अध्यक्ष बना दिया गया है। यह पहली बार नहीं है जब किसी खेल पर घोटालों के दाग लगे हैं। आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग हो या फिर दिल्ली के कॉमनवेल्थ खेल का घोटाला। इन घटनाओं ने न सिर्फ खेल में काली कमाई का सच सामने आया है बल्कि खेल संस्थाओं के ऊपर भी सवाल खड़े हुए हैं। खेलों के पीछे की सच्चाई से रूबरू कराती प्रियंका झा की रिपोर्ट...

अमेरिकी न्याय विभाग ने ठगी, रुपये के लेनदेन में धोखाधड़ी और मनी लॉन्डरिंग के मामले में कुल 14 लोगों पर आरोप लगाए हैं। इसमें फीफा के दो मौजूदा उपाध्यक्ष भी शामिल हैं। अभी तक सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने अपने पद की विश्वसनीयता का दुरुपयोग करते हुए स्पोर्ट्स कंपनियों से रिश्वत लेकर टूर्नामेंट के वाणिज्यिक अधिकार दिए हैं।

956 करोड़ का घपला
फीफा घोटाले में जिन सात अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है उन पर 24 सालों के अंदर 956 करोड़ रुपये से ज्यादा की घूस लेने और वित्तीय अनियमितताएं करने का आरोप है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि वे अमेरिका में फुटबॉल टूर्नामेंट के आयोजन में धांधली कर रहे थे। फीफा के एक्जीक्यूटिव कमिटी मेंबर वॉर्नर पर यह भी आरोप है कि उन्होंने 2010 वर्ल्ड कप की मेजबानी के लिए दक्षिण अफ्रीका के पक्ष में मतदान के एवज में 60 करोड़ रुपये से ज्यादा घूस के तौर पर लिए थे।

70% लोग फीफा अध्यक्ष के खिलाफ
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के मुताबिक फीफा में हुआ घोटाला खेल प्रेमियों को गंवारा नहीं है। एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि भले ही सैप ब्लैटर फिर से फीफा के अध्यक्ष चुने गए हों लेकिन हर पांच में से 4 फुटबॉल प्रेमी इसके खिलाफ है। सर्वेक्षण के मुताबिक 70 प्रतिशत लोगों का मानना है कि अगर ब्लैटर फीफा के अध्यक्ष रहे तो वे फीफा पर विश्वास खो देंगे। यह सर्वेक्षण 30 देशों के 35 हजार लोगों पर किया गया था।

कॉमनवेल्थ से दो हजार करोड़ का नुकसान
कैग की रिपोर्ट के मुताबिक भ्रष्टाचार, अनदेखी और अनियमितता की वजह से ही 2010 में भारत में हुए राष्ट्रमंडल खेलों की वजह से 2300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। अगर प्रति दिन के नुकसान का आंकलन किया जाए तो यह 195 करोड़ रुपये है। महज 12 दिन चलने वाले इस खेल में यह सिर्फ नुकसान का आंकड़ा है। कॉमनवेल्थ घोटाले ने दुनिया भर में भारत की साख को बट्टा लगा दिया था। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के सालाना भ्रष्टाचार सूचकांक में भारत का स्थान 3 पायदान गिरकर 87 पर पहुंच गया था। इस सूचकांक में कुल 178 देशों को शामिल किया गया था। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि राष्ट्रमंडल खेलों में हुए घोटाले की वजह से भारत के प्रति लोगों के नजरिए में बदलाव आया है और उसे भ्रष्ट देश की तरह देखा जाने लगा है। हालांकि बीते साल इस रिपोर्ट में भारत दो स्थान के सुधार के साथ 85वें पायदान पर था।

आईपीएल फिक्सिंग के बाद पारदर्शिता की मांग
2013 में इंडियन प्रीमियर लीग के मैचों के फिक्स होने से पूरी दुनिया सदमें में आ गई थी। दिल्ली पुलिस ने इसका खुलासा किया था।आईपीएल 6 के तीन मैचों में स्पॉट फिक्सिंग हुई थी। इसमें राजस्थान रॉयल्स के खिलाड़ी शामिल थे। मामले में श्रीसंथ सहित तीन खिलाडियों और 11 सटोरियों को गिरफ्तार किया गया था।

हर दिन 6 लाख रुपये कानूनी लड़ाई में बर्बाद
साल 2013 में आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग का मामला सामने आने के बाद बीसीसीआई ने कुल 23 करोड़ रुपये कानूनी गतिविधियों पर खर्च किए। इस हिसाब से यह रकम रोजाना औसतन 6 लाख रुपये होती है। बीसीसीआई का मानना है कि इस साल यह खर्च बढ़कर दोगुना हो जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि बीसीसीआई कई लोगों को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रही है।

राजनेताओं का दबदबा
भारत में कुल 40 खेल एसोसिएशन हैं। इनमें से अधिकांश के प्रमुख कोई राजनेता या उनके सहायक हैं। इतना ही नहीं इन नेताओं का खेल से कोई रिश्ता भी नहीं रहा है। कांग्रेसी नेता प्रिया रंजन दसमुंशी भारतीय फुटबॉल फेडरेशन की लगभग 30 साल तक मुखिया रही और अब इसकी कमान एनसीपी के प्रफुल पटेल के हाथ में है। इनके अलावा सुरेश कलमाड़ी ने 1996 से लेकर 2011 तक इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन की कमान संभाली थी। बड़े-बड़े घोटाले सामने आने के बाद बीसीसीआई समेत कई संस्थाओं की जबाबदेही तय करने के लिए उन्हें सूचना के अधिकार के अंतर्गत लाने की मांग की गई।

बीसीसीआई पर भी सवाल
बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया पर सबकी नजर रहती है। यह स्वायत्त संस्था है। इस संस्था पर कोई भी निगरानी नहीं रखता। बीसीसीआई की आय का सबसे बड़ा स्त्रोत मीडिया राइट्स हैं। बीसीसीआई के आंकड़ों के मुताबिक साल 2012-13 के बीच उसकी आय 756.30 करोड़ रुपये रही। इसी साल 434.31 करोड़ रुपये खर्च भी किए गए। काफी समय से मांग की जा रही है कि इस संस्था को भी आरटीआई के दायरे में लाया जाना चाहिए।

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  • Web Title:Games billions behind 'play'