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मुरादाबाद में पब्लिक को लगातार अप्रैल फूल बनाते रहे अफसर

बैठकें हुईं वादे हुए निरीक्षण हुए। ऐसा लगा कि सपना साकार हो जाएगा। दिन गुजरे महीने बीते और साल गुजर गया। पब्लिक इंतजार करती रही और मिला कुछ नहीं। पब्लिक बरसों से विकास के नाम पर अप्रैल फूल बन रही है। एक अप्रैल पर हंसी मजाक की बातें होंगी उस बीच एक टीस जरूर रहेगी कि अफसर साल भर मूर्ख बनाते रहे। विकास की योजनाएं अभी तक घिसट रही हैं। अफसर अपना समय काट कर किसी दूसरे शहर की राह नापेंगे। मूर्ख बनाकर हंसने जैसी स्थित को बयां करते इन अधूरे और चालू नहीं होने वाले इन प्रोजेक्ट की कहानी पहली अप्रैल को लेकर आपके सामने लेकर आया है हिन्दुस्तान।

स्टेशन रोड पर नहीं बन सका फ्लाई ओवर :

स्टेशन रोड पर एक फ्लाईओवर बनाया जाना था वह भी नहीं बन सका। इसके लिए मंजूरी के दावे अफसरों ने खूूब किए। डबल फाटक से फव्वारा तक फ्लाईओवर का सर्वे हो गया बैठकों में ऐलान हो गया पर हुआ कुछ नहीं। शहर में जाम की समस्या से लोग जूझ रहे हैं। दो प्रमुख आरओबी में लोकोशेड का चौड़ीकरण चल रहा। कांशीराम नगर का 89 करोड़ मंजूर हो चुके हैं। उद्घाटन का पत्थर भी लग चुका है पर पिछले पांच साल से इन प्रोजेक्ट पर शहरवासी मूर्ख बन रहे हैं।

बस्ती से जेल बाहर नहीं ले जा सके

शहर के बीचोंबीच बनी पुरानी जेल ओवर क्राउड से हांफ रही है। क्षमता से चार गुना बंदी रह रहे हैं। जेल शिफ्टिंग के लिए जमीन सिरस खेड़ा में फाइनल हो चुकी। बजट भी मिल चुका। किसानों से करार भी हो चुका पर अभी तक जमीन की खरीद नहीं हो सकी। इससे इस साल भी जेल शिफ्टिंग सपना ही रहेगी। पेशी पर हर दिन बंदी जाते हैं तो जेल रोड पर जाम लग जाता है। बाजार जाने वाले हों या घर पहुंचने को जल्दी में निकलने वाले खीझ कर रह जाते हैं। सिरस खेड़ा गांव में नई जेल का निर्माण होना है। किसान भी चाहते हैं जल्द उनको मुआवजा मिले और बैनामा हो।

गोविंद नगर अंडर पास का भी सपना अधूरा :

गोविंद नगर के सैकड़ों लोग ट्रेन से कट कर दम तोड़ चुके हैं। रेलवे लाइन के खतनाक कर्व में किसी ने शहर के तमाम लोगों ने अपने लोगों को खो दिया है। किसी की बेटी तो किसी का बेटा यहां हादसे का शिकार हो चुका है। सैकड़ों जाने जा चुकी हैं। अभी भी मौतों का यह सिलसिला थमा नहीं। जब जब हादसे हुए लोग सड़कों पर उतरे तो अफसरों ने वादा किया जल्द बन जाएगा। न सिर्फ वादा किया कि अंडर पास बनेगा बल्कि नापजोख भी करवा डाली। रेलवे से लेकर लोकल प्रशासन तक इस पर हजार बार वादे कर चुका है। हर साल यह वादे अप्रैल फूल बन कर रह जाते हैं। ऐसा लगता है कि झूठे वादे करके अफसर मूर्ख बना रहे हैं।

तीन सौ बेड का अस्पताल नहीं बना :

तीन सौ बेड का अत्याधुनिक अस्पताल बनाया जाना था पर अभी तक सपना ही है। इसकी प्लानिंग करके प्रदेश सरकार को भेजा गया तो अफसरों ने ढोल पीटा। उसकी मंजूरी जल्द होने के सपने दिखाए पर हुआ कुछ नहीं। जिला अस्पताल के अलावा कोई भी सरकारी अस्पताल नहीं है। बेड यहां कभी कभी कम पड़ जाते हैं। एक एक बेड पर तीन तीन लोगों को शिफ्ट करना पड़ता है। तीन सौ बेड का अस्पतला रामगंगा के किनारे बनाया जना था।

बर्न और डायलेसिस यूनिट का इंतजार :

जिला अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक बर्न यूनिट बनाए जाने के लिए ऐलान किया गया। जलने के बाद मरीजों को मेरठ या अन्य शहरों के लिए तत्काल रेफर कर दिया जाता है। मुरादाबाद में बर्न यूनिट हो तो यह समस्या नहीं रहेगी। इसी तरह किडनी खराब होने डायलेसिस की जरूरत पड़ती है वह सुविधा सरकारी अस्पतलाओं में नहीं है। एक डायलेसिस यूनिट का ऐलान यहां हो चुका है पर अभी तक पूरा नहीं हो सका।

खिलाड़ियों को बरसों से स्टेडियम का इंतजार :

मुरादाबाद के खिलाड़ियों को बरसों से स्टेडियम का इंतजार है। अस्पताल के साथ एक स्टेडियम का प्रस्ताव भी स्थानीय स्तर से तैयार करके शासन को भेजा गया था पर अभी तक पूरा नहीं किया जा सका। स्टेडियम के लिए मुरादाबाद से डीएसएस सचिव विजय गुप्ता ने मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा और खेल निदेशालय तक दस्तक दी। अभी तक स्टेडियम ख्वाब है। रामगंगा पार स्टेडियम का प्रस्ताव बनाया गया था।

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  • Web Title: The officer make April Fool to public for dovelopment