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45 लाख कैश की सूचना पर डाला था डकैती, मिले 12 लाख

12 लाख की डकैती को जिस अंदाज में अंजाम दिया गया, उससे साफ पता चलता है कि बदमाश काफी शातिर और पेशेवर थे। बदमाशों ने पहले से ही रेकी कर रखी थी और उन्हें पता था कि समिति में बड़ी रकम होती है। पुलिस सूत्रों की मानें तो डकैती 45 लाख रुपये की बड़ी रकम के लिए अंजाम दी गई थी, लेकिन 12 लाख ही मिले। नकाब से चेहरा छिपाया हुआ था और एक दूसरे से कोड वर्ड में बात कर रहे थे। इतना ही नहीं बदमाशों की बाइकों पर नंबर प्लेट भी नहीं थी, जिसके कारण पहचान का कोई सबूत नहीं मिल रहा।

डकैती की वारदात अंजाम देने आए बदमाशों के पास बड़ी रकम की सूचना दी थी। इसके लिए बदमाशों ने रेकी भी की थी। सूत्रों की मानें तो समिति के आसपास भी बदमाशों के साथी मौजूद थे और हर हरकत पर नजर रखी जा रही थी। डकैती से कुछ ही समय पूर्व चार किसान समिति में थे। ऐसे में समिति में वारदात को अंजाम देना शायद संभव नहीं हो पाता। ऐसे में बदमाशों ने किसानों के बाहर निकलने के इंतजार किया। इन किसानों के जाने के तुरंत बाद बदमाश समिति पर पहुंच गए।

बदमाश काफी पेशेवर थे और उन्होंने सभी लोगों को बंधक बना लिया था। विरोध करने पर मारपीट की, लेकिन फायर नहीं किया। साफ है कि बदमाश चुपचाप वारदात अंजाम देकर निकल जाना चाहते थे। बदमाश समिति के अंदर करीब सात मिनट तक रूके। इस समय में बदमाशों ने एक दूसरे को नंबर से बुलाया। ज्यादातर बातचीत इशारों में हो रही थी। इतने से समय में लूटपाट करने के बाद बदमाश निकल भागे। ऐसे में पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इतने शातिर बदमाश कर्मचारियों के मोबाइल को साथ नहीं रखेंगे और मोबाइल को सकौती मार्ग पर कहीं फेंका होगा। पुलिस इन्हीं मोबाइल की तलाश भी रख रही है।

बदमाश बोले, यहां तो बहुत थोड़ी रकम है

समिति के कर्मचारी मई और जून में किसानों से किसान क्रेडिट कार्ड का भुगतान भी महलका सेंटर पर ही लेता है। इसके अलावा किसानों को जो कर्ज दिया जाता है, उस रकम को भी यहीं पर वसूला जाता है। बुधवार को किसानों से आई रकम करीब 45 लाख रुपये थी। इसी इनपुट के आधार पर बदमाशों ने डकैती डाली थी। हालांकि कर्मचारियों ने इस रकम को बुधवार को ही बैंक में जमा करा दिया था। गुरुवार को सुबह से लेकर दोपहर तक करीब 12 लाख रुपये की रकम किसानों द्वारा जमा की गई थी। इसी रकम को बदमाश लूटकर ले गए। बदमाशों को जब समिति में जब 12 लाख रुपये मिले तो खुद ही कहने लगे कि सूचना तो ज्यादा रकम की थी, लेकिन यहां तो कम है।

सुनसान जगह बदमाशों के लिए बनी मुफीद

महलका गांव के बाहर जिस जगह पर सहकारी समिति बनी हुई है, वहां बराबर में ही बिजली घर है। यहां दो से तीन कर्मचारी रहते है। इसके अलावा समिति में भी चार से पांच कर्मचारी रहते हैं। इसके अलावा दिनभर किसानों का आना जाना लगा रहता है। ये जगह गांव से करीब एक किलोमीटर बाहर है और आसपास केवल एक ही स्कूल है। ऐसे में बदमाशों के लिए यहां डकैती डालना और फिर फरार होना बड़ा आसान रहा। फलावदा थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह तो यहां तक बोले कि उन्हें समिति के किसी अधिकारी या किसी अन्य ने ये तक नहीं बताया कि इस केंद्र पर रकम का लेनदेन भी होता है।

चल बे, जेब भी खाली कर दे

बदमाशों को मोटी रकम मिलने की उम्मीद थी, लेकिन 12 लाख रुपये मिलने के बाद बदमाशों ने गालियां देना शुरू कर दिया। कर्मचारी सुनील ने बताया कि एक बदमाश ने उनकी कनपटी पर पिस्टल लगा दी और कई बार पूछा कि बाकी की रकम कहां है? खुद भी कार्यालय में रखी अलमारियों की तलाशी ली। इसके बाद बदमाशों ने गुस्से में सभी को कहा कि चल बे, जेब खाली कर दो। इसके बाद सभी कर्मचारियों और किसानों के पर्स व जेब में जितने भी रुपये थे सब लूट लिए।

अरुण ने जमा कराए थे एक लाख रुपये

अरुण ने समिति से कुछ रकम कर्ज पर ली थी। इसी रकम का भुगतान करने के लिए अरुण गुरुवार को समिति पर आए थे। उन्होंने बकाया एक लाख तीन हजार रुपये की रकम जमा करा दी थी। उनके पास 47 हजार रुपये बाकी थी और वे वहीं बैठकर बातचीत करने लगे। इसी दौरान बदमाश आ गए और अरुण की रकम भी लूट ली।

बदमाशों को किया जा रहा ट्रेस

किसान सेवा सहकारी समिति में लूट हुई है। 11.60 लाख रुपये समिति के है और 47 हजार रुपये किसान अरुण के हैं। बदमाशों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है और उनकी तलाश की जा रही है।

राजेश कुमार, एसपी देहात मेरठ।

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  • Web Title:45 lakh cache of information was put on robbery, 12 lakhs